Wednesday, July 3, 2019

स्काई वाॅक पर राजनीति

  
डाॅ रमन सिंह की स्काई वाॅक योजना को सरकार भ्रष्टाचार का स्मारक बताते हुए इसे जमीं दोज करने जा रही है। सवाल यह है कि डेढ़ किलोमीटर के स्काई वाॅक को नष्ट कर देने से सरकार और जनता को मिलेगा क्या?


0 रमेश कुमार ’’रिपु‘‘
            मुख्यमंत्री भूपेश बघेल एक बार फिर विपक्ष की नजर में किरकिरी बने हुए हैं। वजह यह है कि करीब पचास करोड़ की लगात से बन रहे स्काई वाॅक को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने तोड़ने के संकेत दे दिये हैं। वैसे भी स्काईवाॅक परियोजना को जब तत्कालीन मुख्यमंत्री डाॅ रमन सिंह हरी झंडी दिखाये थे, उस दौरान प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस सहित कई सामजिक कार्यकत्र्ताओं ने इसके विरोध में धरना और प्रदर्शन किया था। लेकिन तात्कालीन मुख्यमंत्री रमन सिंह एवं लोकनिर्माण मंत्री राजेश मूणत ने किसी की भी मांगें नहीं मानी थी। स्काई वाॅक योजना के पीछे मंशा यह थी कि इससे पैदल चलने वाले यात्रियों को सुविधा होगी और ट्रैफिक दबाव कम होगा। निर्माण कार्य सतत जारी रहा। इस परियोजना को दिसंबर 2018 तक पूरा करना था। इस परियोजना का ठेका एक्सप्रेस वे लिमिटेड लखनऊ स्थित कंपनी को दिया गया है। प्रदेश में सरकार बदली तो एक बार फिर स्काई वाॅक का मुद्दा गरमाया। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के समक्ष स्काई वाॅक की बात रखी और उन्होंने उनकी मांगी मान ली। मेकाहारा चैक से शास्त्री चैक होते हुए जय स्तंभ चैक तक बन रहे डेढ़ किलोमीटर लंबे स्काई वॉक को तोड़कर जमींदोज करने का निर्णय लिया गया है।
स्काई वाॅक के तोड़े जाने के निर्णय को भाजपा बदलापुर की राजनीति करार दे रही है। तत्कालीन लोकनिर्माण मंत्री राजेश मूणत कहते हैं,यह हमारी सरकार का ड्रीम प्रोजेक्ट है। यदि इसे तोड़ा जायेगा तो पार्टी शांत नहीं बैठेगी। नयी सरकर पूर्व सरकार के काम काज पर बदले की भावना से ऊंगली उठा रही है। काम काज का यह तरीका जायज नहीं है’’। सवाल यह है कि इसकी उपयोगिता भविष्य में होगी कि नहीं, इस पर सरकार को आम लोगों की राय शुमारी लेनी चाहिए। महापौर प्रमोद दुबे आम लोगों से बातचीत कर उनका पक्ष जानने का प्रयास कर रहे हैं। भाजपा के प्रवक्ता एवं एनआरडीए के पूर्व चेयरमैन संजय श्रीवास्तव कहते हैं,उनकी राय शुमारी पर भरोसा नहीं किया जा सकता। वो सरकार के पक्ष की ही बात करेंगे और उसी के अनुसार ही काम करेंगे। कांग्रेस की सरकार बदले की भावना से कार्य कर रही है। डॉक्टर रमन सिंह की सरकार ने शहर में पैदल यात्रा करने वालों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए,इस महत्वाकांक्षी योजना की नींव रखी थी। उसे तोड़ना न केवल सरकारी धन की बर्बादी है,बल्कि इससे पदयात्रियों को शहर में मिलने सुविधाएं भी नहीं मिल सकेंगी’’।
सोशल मीडिया में बहस
आरटीआई एक्टिविस्ट और सामाजिक कार्यकर्ता कुणाल शुक्ला ने इसे जनहित की लड़ाई मानते हैं।   जिस इलाके में इसका निर्माण करवाया जा रहा था, वह पहले से शहर का सबसे अधिक भीड़भाड़ और भारी ट्रैफिक दवाब वाला क्षेत्र है। स्काई वॉक सरकारी धन की फिजूल खर्ची थी। इससे शहर की सुन्दरता खराब हो रही है’’। गौरतलब है कि 2018 विधानसभा चुनाव में भाजपा की करारी हार के बाद मुख्यमंत्री बनने पर भूपेश बघेल ने स्काई वाॅक के निर्माण पर रोक लगाते हुए कहा था कि जनता की रायशुमारी के बाद इस दिशा में ठोस निर्णय लिया जायेगा। स्काईवॉक के तोड़ने की घोषणा होते ही सोशल मीडिया में एक बहस शुरू हो गई है कि इसका क्या किया जाये। बहुत लोग इसके पूर्ण निर्माण के पक्ष में है और कुछ सरकार के निर्णय को सही ठहरा रहे हैं।
तोड़ने पर दस करोड़ लगेंगे
भाजपा और कांग्रेस इस मुद्दे पर आमने सामने आ गए हैं। भाजपा शुरूआत से ही भूपेश बघेल पर बदलापुर की राजनीति करने का आरोप लगा रही है। स्काई वाॅक का लगभग 65 प्रतिशत निर्माण हो गया है। ऐसी स्थिति में इसे यदि तोड़ा जाता है तो करोड़ों का नुकसान होगा। भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश कार्यसमिति सदस्य विजय जयसिंघानी कहते हैं इसे तोड़ने में करीब दस करोड़ का खर्चा आयेगा। जैसा कि सरकार का कहना है कि पैदल चलने वालों के लिए यह उपयोगी नहीं है तो इसे फुटकर बाजार के रूप में भी उपयोग लाया जा सकता है। राय शुमारी यदि इसके तोड़े जाने में पक्ष में है तभी इसे तोड़ा जाय। साहित्यकार गिरीश पंकज कहते हैं, इसे स्काई बाजार बना दिया जाय। मालवीय रोड पर बैठने वाले दुकानदार यहाँ दुकान सजाएं। कपड़ा, फल, चश्मा, पर्स, खिलौने सब यहाँ बिके। व्यापारी अरूण शुक्ला कहते हैं,इसे तोड़कर ओवरब्रिज बनाना या अंडर वे बनाना सर्वोत्तम विकल्प है। 
भ्रष्टाचार का स्मारक हैः शुक्ला
प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि स्काई वाॅक भारतीय जनता पार्टी के बेलगाम कमीशनखोर अदूरदर्शी विकास का परिणाम है। राजधानी रायपुर के सीने पर स्काई वॉक ऐसा नासूर बन चुका है, जिसका निदान बिना बड़ी शल्य क्रिया के सम्भव नहीं है। रमन सरकार के भ्रष्टाचार का बड़ा स्मारक है स्काई वाॅक कहें तो गलत नहीं होगा। बताया गया था कि इसके निर्माण से जनसामान्य को पैदल चलने में आसानी होगी। लेकिन इस स्काई वॅाक ने अम्बेडकर अस्पताल से लेकर पुराने बस स्टैंड तक की सड़क के दोनों छोर की दूरियांे को भी बढ़ा दिया है। सड़क के इस पार से उस पार भी पैदल चलने वाले नहीं जा सकते। स्काई वाॅक के नीचे पांच फी गड्ढे वाला और तीन फीट ऊंचा डिवाइडर बना दिया गया है। स्काई वाॅक पर चढ़ने के लिए बीस से पच्चीस फिट ऊंची सीढ़ी पर चढ़ना पड़ेगा। जो कि बुजुर्गो के लिए कष्टदायी होगा। स्काई वाॅक के कारण सड़क की चैड़ाई भी कम हो गयी। कायदे से अदूरदर्शीपूर्वक स्काई वाॅक का निर्माण कर जनता के पैसे की बर्बादी और परेशान करने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह एवं पूर्व लोक निर्माण मंत्री राजेश मूणत को अपनी गलती स्वीकार कर रायपुर की जनता से माफी मांगनी चाहिए।
 जिम्मेदारों से हो वसूलीः डॉ गुप्ता
आरटीआई एक्टिविस्ट डॉ राकेश गुप्ता ने कहा कि इसको बनाने में जिन जिन लोगों ने इसका प्रस्ताव दिया। निरीक्षण किया और वे तमाम लोग जिनके हस्ताक्षर इस प्रोजेक्ट पर मौजूद हैं। उन सभी से इसकी भरपाई होनी चहिए। इसके अलावा उनके विरुध्द अपराधिक प्रकरण भी दर्ज किया जाना चाहिए। भाजपा को तो खुश होना चाहिए कि उसकी सरकार की गलती को मुख्यमंत्री सुधार रहे हैं।
निर्णय स्वागत योग्यःविकास उपाध्याय
पश्चिम विधानसभा रायपुर के विधायक विकास उपाध्याय ने कहा कि पूर्व लोक निर्माण मंत्री राजेश मूणत की हठधर्मिता की स्मारक के रूप में स्काई वॉक खड़ी हुई है। जनता स्काई वॉक निर्माण के समय से लेकर अब तक इसका विरोध कर रही है। राजधानी में स्काई वॉक की कोई उपयोगिता नहीं है। जिस स्थान पर स्काई वॉक बनाया गया है असल में वहां फ्लाईओवर ही बनना था, जो ट्रैफिक समस्या को निजात दिलाता। 
स्काई वाॅक को बहुउपयोगी बनायें
स्काई वाॅक सत्ता पक्ष की नजरों में जायज नहीं है। सवाल यह है कि पैदल चलने वाले इसे कैसे स्वीकार करें। इससे इंकार नहीं किया जा सकता कि स्काई वाॅक के निमार्ण से पहले भविष्य में इसकी उपयोगिता किस तरह हो सकती है, भावी उपयोगकर्ताओं से परामर्श लेना चाहिए था। प्रथम प्रवक्ता आम लोगों ने अपनी राय साझा की। उनके अनुसार पैदल यात्रियों को मेट्रो या ओवरब्रिज का उपयोग नहीं करने के लिए जाना जाता है। क्योंकि उन्हें सीढ़ियों पर बातचीत करने के लिए अतिरिक्त प्रयास करना पड़ता है। इसलिए चढ़ाई या नीचे आने के लिए एस्केलेटर जरूरी है। यह समझा जाता है कि कुछ एस्केलेटर योजना का एक हिस्सा हैं,लेकिन ये बहुत ही अपर्याप्त होंगे। उनकी संख्या बढ़ानी होगी। पैदल चलने वाले लोग सड़क के दोनों ओर स्थित दुकानों,और अन्य कार्य स्थलों पर जाने के लिए बाजार में आते हैं। वे दुकान आदि के लिए निकटतम मार्ग लेने वाले स्काईवॉक का उपयोग करने के बजाय सड़क पर चलना चाहेंगे। यह आवश्यक है कि प्रत्येक 150-200 मीटर पर दोनों तरफ एस्केलेटर की व्यवस्था की जाए ताकि, उन्हें स्काईवॉक पर आकर्षित किया जा सके। स्काई वाॅक से यह होगा कि कहीं भी सड़क पार करने की आदत को हर जगह खत्म कर देगा, जैसा कि वे वर्तमान पैदल यात्री कर कर रहे हैं। यदि इसे नहीं तोड़ना है तो फिर क्रासिंग पैदल यात्री को मुक्त बनाने के लिए रोड क्रॉसिंग सिग्नल के दोनों ओर एस्केलेटर होना चाहिए। हमें स्काईवॉक के उपयोगकर्ताओं से दूरियां चलने की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। इसलिए स्काईवॉक पर चलती बेल्ट प्रदान करना अनिवार्य है। क्योंकि हमने उन्हें बैंकॉक और दिल्ली हवाई अड्डे के टी 3 टर्मिनल सहित विभिन्न हवाई अड्डों पर देखा है। इसे मूविंग वॉकवे, ऑटोवॉक, ट्रैवलेटर या ट्रैवलर कहा जाता है। यह एक धीमी गति से चलने वाला कन्वेयर तंत्र है। ये अक्सर जोड़े में स्थापित होते हैं। दोनों दिशाओ के लिए एक।स्काईवॉक को खारिज करना एक वांछनीय विकल्प नहीं है। यह सार्वजनिक निधियों का परिहार्य अपव्यय है। जाहिर है कि सुझाई गई सुविधा को पूरा करने में अतिरिक्त खर्च आयेगा साथ ही एक लम्बा रास्ता भी तय करना होगा। सड़ाकों को पैदल यात्री रहित बनाना होगा। स्काई वाॅक तोड़ने की बजाय इसे बहुउपयोगी बनाया जाये।
बहरहाल स्काई वाॅक दो सियासी दलों की दांतों के बीच फंस गया है। कांग्रेस इसे तोड़ कर अपनी ताकत की हैसियत का परिचय देना चाहती है और भाजपा इसे बचाकर बताना चाहती है कि उसका निर्णय सही था। कायदे से सरकार और विपक्ष को इसे राजनीतिक मुद्दा नहीं बनाना चाहिए,इसलिए कि दोनों परिस्थितियों में दांव पर जनता का पैसा लगा है।

 







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