Tuesday, March 10, 2020

आयकर के छापे से बवाल

     
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के दस से ज्यादा करीबियों के ठिकाने पर आयकर छापे से बवाल मच गया।  भाजपा और कांग्रेस आमने सामने टकराव की मुद्रा में आ गये। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राज्यपाल को ज्ञापन देकर आयकर छापे को राजनीतिक रंग दे दिया। छापे से तिलमिलाई सरकार आयकर की कार्रवाई को सरकार को अस्थिर करने की साजिश बताया।








0 रमेश कुमार ’’रिपु‘‘
              छत्तीसगढ़ में केन्द्रीय आयकर की टीम ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के करीबियों के यहां छापे डालकर सरकार की चूलें हिला दी। सरकार इस छापे से घबरा गई। और आनन फानन में राज्यपाल अनसुइया उइके को ज्ञापन देकर इसे रोकने की मांग कर बैठी। मीडिया से मुख्यमंत्री ने कहा,‘‘यह छापा प्रदेश सरकार को अस्थिर करने की साजिश है। ज्ञापन में आरोप लगाया कि राज्य सरकार चूंकि पूर्व सरकार के भ्रष्टाचार पर कार्रवाई कर रही है, इसलिए केन्द्र सरकार इसका बदला ले रही है‘‘। चैकाने वाली बात है कि बहुमत वाली सरकार आयकर के छापे से अस्थिर कैसे हो जायेगी? आयकर विभाग ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के करीबियों के यहां छापा डाला तो राजधानी रायपुर से लेकर दिल्ली तक हलचल मच गई। यह छापा बिहार में चुनाव से पहले डाला गया है। राजनीतिक हल्कों में चर्चा है कि झारखंड चुनाव की फंडिग छत्तीसगढ़ सरकार ने की थी। बिहार चुनाव की भी फंडिंग का दायित्व छत्तीसगढ़ सरकार को दिया गया है। संभवतःइस छापे के चलते सरकार की रणनीति फेल हो गई। इस छापे ने सबसे अधिक मीडिया का ध्यान मुख्यमंत्री की उप सचिव सौम्या चैरसिया के निवास में पड़े छापे ने खींचा। इसकी वजह यह है कि वो छापे के दो दिन बाद मीडिया के सामने मुखातिब होते हुए कहा,‘‘ मै दो दिन तक आॅफिस में थी। मुझे मीडिया से पता चला कि मेरे यहां आयकर का छापा पड़ा है’’। जबकि उनके ड्राइवर पन्नालाल ने 29 फरवरी को मीडिया को बताया कि छापों से पहले फाइलों से भरे चार,पांच बैग लेकर वह सी.एम हाउस गया था। इन फाइलों में क्या था, उसे नहीं मालूम’’।  
सौम्या के यहां क्या मिला              
सौम्या चैरसिया के ठिकानों पर जांच में आयकर विभाग को प्रापर्टी और लेन देन के दस्तावेज,दर्जनों रजिस्ट्री के पेपर मिले हैं। ज्वेलरी मिली हैं, जिनका मूल्यांकन किया गया। सौम्या के सभी लाॅकरों को सील करने और बैंक खातों के लेनदेन पर रोक लगा दी गई है। आय से अधिक राशि खर्च करने, बैंकों में रकम जमा करने और निवेश का खुलासा हुआ है। आयकर अधिकारी पिछले छह वर्षो के पुराने रिकार्ड की जांच कर रहे हैं। सौम्या की मां और ड्राइवर पन्नालाल से तीन फरवरी को 5 अफसरों की टीम ने दोबारा पूछताछ की। सौम्या के घर से मिले लैपटॉप, पैनड्राइव को भी सीज किया गया है। ये सारी जानकारियां आयकर के दिल्ली मुख्यालय को भेजी गई हैं। दूसरी ओर रायपुर, बिलासपुर, जगदलपुर के 32 ठिकानों में 5 दिनों की छापेमारी में मिले दस्तावेजी सबूतों के आधार पर अधिकारी जांच आगे बढ़ाने में लगे हैं।
हवाला के प्रमाण मिले
आयकर के इस छापे से 15 माह पुरानी भूपेश बघेल की सरकार आयकर के चक्रव्यूह में फंसती नजर आ रही है। आयकर टीम ने 27 फरवरी से लेकर 2 मार्च तक प्रदेश में कई ठिकानों पर छापा मारा। इनकम टैक्स कमिश्नर व मीडिया प्रवक्ता सुरभि अहलूवालिया ने बताया कि जांच के दौरान 150 करोड़ रूपये नकद मिले। साक्ष्य मिले हैं कि शराब और माइनिंग का पैसा नियमित रूप से अफसरों को जा रहा था। इसके अलावा नोटबंदी के दौरान भारी नगदी जमा करने की भी जानकारी मिली है। शेल कंपनियों में निवेश की भी सूचनाएं हैं। जब्त किए गए दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक डेटा से पता चला कि अफसरों के साथ कई लोगों को नियमित भुगतान किया जा रहा था। हवाला कारोबार के भी प्रमाण मिले हैं।
इनके यहां पड़ा आइटी का छापा
विवेक ढांड- छत्तीसगढ़ के विवेक ढांड पहले पूर्व मुख्यसचिव हैं। छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद स्व. रत्नेश सालोमन के जरिये प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री अजीत जोगी को साधने वाले विवेक ढांड ने प्रदेश में सत्ता परिवर्तन होने के बाद डॉ रमन सिंह के कार्यकाल में मुख्य सचिव रहे हैं। इस समय रेरा के चेयरमेन है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को इन्होंने पढ़ाया भी है।
सौम्या चैरसिया - मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की उप सचिव हैं। 2008 बैच की अफसर हैं। दिसंबर 2018 से मुख्यमंत्री की उपसचिव हैं। आइटी के छापे से सुर्खियों में आई।
एजाज ढेबर - छत्तीसगढ़ में कभी अजीत जोगी के बेहद करीबी तथा बाद में उनसे अलग होकर हाल ही में राजधानी रायपुर के महापौर बने एजाज ढेबर तथा उनके भाई अनवर ढेबर के ढेबर स्टील, ढेबर सिटी, रियल स्टेट वेलिंगटन होटल सहित कुछ रेस्टोरेंट में भी केंद्रीय आयकर विभाग की टीम ने छापा मारा है। हाल ही में उन्हें मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की पसंद पर महापौर बनाया गया है। ढेबर परिवार को कांग्रेस का आर्थिक मददगार माना जाता है। इनके भाई अनवर ढेबर के यहां भी आइटी ने छापा मारा है।
अरूणपति त्रिपाठी- इंडियन टेलीकाॅम सर्विस के अधिकारी है। आबकारी विभाग में ओएसडी हैं। केन्द्र से प्रतिनियुक्ति पर आए हैं।
अनिल टूटेजा- आईएएस अनिल टुटेजा तथा उनकी पत्नी मीनाक्षी टुटेजा जो कि ब्यूटीशियन संस्थान की संचालक है,के ठिकानों पर भी आयकर की टीम ने छापा मारा है। नान घोटाला में नाम आने के बाद अनिल टुटेजा को रमन सरकार ने बिना कामकाज के मंत्रालय में अटैच कर रखा था। उन्हें हाल ही में अदालत के स्थगन के बाद उद्योग विभाग के संयुक्त सचिव के पद पर नियुक्ति दी गई है।
गुरूचरण सिंह होरा - रायपुर विकास प्राधिकरण में इंजीनियर थे। इन्होंने 2013 में नौकरी छोड़ कर होटल का कारोबार शुरू किया। जमीन की कारोबारी में भी हाथ अजमाया। इस समय एक होटल और सिटी केबल न्यूज चैनल के मालिक हैं।
अनमोलक सिंह भाटिया -प्रमुख रूप से शराब के कारोबारी है। इन्हें कांग्रेस का करीबी कहा जाता है। डाॅ रमन सिंह के समय ये नेपथ्य में थे।
डाॅ ए. फरिश्ता - डाॅ फरिश्ता के यहां भी आयकर का छापा पड़ा। यहां आय से अधिक संपत्ति मिलने की जानकारी है। इसके अलावा चार्टड एकाउंटेंट कमलेश जैन, संजय संचेती सहित 22 अन्य लोगों के यहां आइटी के छापे पड़े।
मुख्यमंत्री ने बताया
आयकर छापे में विभाग के अधिकारियों को क्या क्या मिला जारी प्रेस नोट को झूठा करार देते हुए    मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा,‘‘आयकर विभाग को भाजपा से जुड़े गुरूचरण सिंह होरा के आफिस से 50 लाख और घर पर 51 लाख कैश मिला। रेरा चेयरमैन विवेक ढांड के यहां तीन लाख और अनिल टुटेजा के पास से 13 लाख रुपए मिले। हमारे कार्यकर्ता अफरोज के यहां भी आयकर टीम को उसके घर पर मात्र 18 सौ रुपए मिला। महापौर एजाज ढेबर के के पास मात्र तीन हजार कैश मिला। उनकी मां के पास जरूर चार लाख रुपये मिले। वो भी वे नाती,पोतों को देने के लिए पैसे जमा करती हैं’’।
एक छापा कई बातें
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल 28 फरवरी को बोले कि सरकार को अस्थिर करने की यह साजिश है।आइटी के छापे को संघीय ढांचा के खिलाफ कार्रवाई बताया। सवाल यह है कि आयकर टीम के छापे का विरोध कांग्रेसियों ने सड़कों पर उतर कर स्थानीय आयकर विभाग के आॅफिस में जाकर क्यों किया। जब कुछ नहीं था, तो फिर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सरकार को अस्थिर करने की बात क्यों कही? जाहिर सी बात है कि प्रदेश में सीबीआइ को पहले ही सरकार प्रतिबंधित कर चुकी है। आयकर को प्रतिबंधित करना भूल गई। बिहार चुनाव की फंडिग की उनकी रणनीति फेल हो गई है। सौम्या के ड्राइवर पन्नालाल की बातें और मिले दस्तावेज की जांच से संभावना है कि कुछ सनसनीखेज तथ्यों का खुलासा होगा।
हमले का मौका मिला
प्रदेश की 15 माह पुरानी सरकार पर भाजपा को हमला करने का मौका मिल गया। राज्य सभा सदस्य रामविचार नेताम ने कहा कि अफसरों के यहां आइटी के छापे सेे मुख्यमंत्री बदहवास क्यों हो गये हैं। क्या मुख्यमंत्री विधायकों की जगह अफसरों की मदद से सरकार चला रहे हैं’’। वहीं दिल्ली में कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा, केन्द्रीय एजेंसियां इतनी निष्पक्ष है तो अभिषेक सिंह की जांच क्यों नहीं करती। उनका नाम पनामा पेपर्स में आया था’’। इस पर डाॅ रमन सिंह ने कहा कि पनामा का मामला पांच साल पहले ही रफा दफा हो चुका है। सुप्रीम कोर्ट में पूरी कार्रवाई हुई है। स्पष्ट रूप से कहा गया है कि इसमें कोई लेने देन नहीं हुआ है। आरोप लगाने से कुछ नहीं होता। कांग्रेस हर स्तर पर इस मामले में जा चुकी है। प्रदेश सरकार के पास 68 विधायक हैं। आयकर के छापे से सरकार कैसे अस्थिर हो सकती है। सीआरपीएफ लेकर आइटी  छापा ने मारा। पुलिस और सीआरपीएफ में कोई अंतर नहीं है’’।
छापे पर वि.स. में हंगामा
भाजपा के शासन में भी आयकर छापा पड़ा था। आय से अधिक संपत्ति रखने के मामले में आइएएस बाबूलाल अग्रवाल भी फंसे थे। सरकार के बहुत करीबी कहे जाने वाले शराब कारोबारी पप्पू भाटिया के यहां भी आयकर छापा पड़ा था,जिसे तत्कालीन विपक्ष ने मुद्दा बनाया था। लेकिन रमन सरकार ने इसकी खिलाफत नहीं की थी। लोकसभा चुनाव से पहले कमलनाथ के सलाहकार आर के मिगलानी और उनके रिश्ते दारों के यहां आयकर छापे पड़े थे। तब भी केन्द्र और राज्य सरकार पर उंगली नहीं उठी थी। लेकिन छत्तीसगढ़ विधानसभा में दो फरवरी को आइटी के छापे पर जमकर हंगामा हुआ। विपक्षी विधायकों ने सरकार पर छापे में बाधा डालने का आरोप लगाते हुए स्थगन पर चर्चा की मांग की। भाजपा विधायक ननकीराम कंवर ने शासकीय कार्य में बाधा डालने वाले सभी मंत्रियों के खिलाफ केस किए जाने की मांग की। शून्यकाल में भाजपा विधायक शिवरतन शर्मा ने छापों के संबंध में स्थगन पर चर्चा कराने की मांग करते हुए कहा कि सरकार द्वारा छापों को रोकने की कोशिश की गई है। पुलिस ने आयकर अफसरों की 20 से ज्यादा गाड़ियों को जब्त की। जोगी कांग्रेस विधायक धर्मजीत सिंह ने कहा कि पहले भी सीआरपीएफ की मौजूदगी में कार्रवाई हुई है। किसी अफसर के यहां छापा पड़ने से सरकार कैसे अस्थिर हो सकती है। कैबिनेट रोक दिया गया। सीएम दिल्ली चले गए, कांग्रेस सड़क पर उतर गई। सरकार को प्रतिक्रया देने से पहले प्रतीक्षा करनी चाहिए थी। 
बहरहाल आइटी छापे को प्रदेश सरकार को अस्थिर करने की साजिश करार देना सार्थक राजनीति  नहीं है। ऐसी बातों से केन्द्र और राज्य सरकार के बीच टकराव की स्थिति निर्मित होती है,जो प्रदेश की जनता और विकास के लिए हितकर नहीं है। दोनों सरकारों को इससे बचना चाहिए’’।

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