Monday, November 15, 2021

अपनी कहानी जैसे

 ▪️अपनी कहानी जैसी


मन्नू भंडारी बिलकुल अपनी कहानी जैसी थीं। जैसे उनकी कहानियों के पात्र शोर नहीं मचाते थे,नारे बाजी के हिमायती नहीं हैं,मूल्यों के प्रति सजग हैं और एक समग्र नजरिया रखते हैं,वैसी ही मन्नू भंडारी सारी जिन्दगी रहीं। कहानियों में नये तेवर,नये स्वाद और आडम्बर से परे के लिए हमेशा मन्नू जी जानी जायेंगी। राजेन्द्र यादव ने स्त्री विमर्श का जो स्वरूप हिन्दी जगत को दिया उससे अलहदा है मन्नू भंडारी की कहानियों की दुनिया में नारी। आज हिन्दी जगत में स्त्री लेखन को लेकर नारीवाद और अस्मिता विमर्श का बोलबाला है,लेकिन मन्नू भंडारी की कहानियांें में वो ग्लैमर और शोर-शराबा नहीं है। दरअसल उन्होंने जैसा जीवन जिया वैसी ही कहानियां गढ़ी। मन्नू जी अपनी कहानियों के जरिये हिन्दी जगत के पाठकों को हमेशा याद आयेंगी।

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