नये इंडिया में सरकार हड़पने की साजिश तेज है। यह दौर पैसे के दम पर सरकार गिराने और बनाने का है। आन्ध्र में विधायकों को खरीदने का भंडाफोड़ होने के बाद अब गैर बीजेपी शासित राज्यों के कान खड़े हो गए हैं। मौजूदा राजनीति इशारा कर रही है,आने वाले समय में चार राज्यों की सरकार गिर सकती है।
0 रमेश कुमार ‘रिपु’
वोट से बनने वाली सरकार को प्रभावित करने वाली राजनीति के आकार लेने से लोकतंत्र का चेहरा बदलने लगा है। क्यों कि चुनी गई सरकार को गिराने की साजिश पैसे वाली राजनीति करने लगी है। यानी नये इंडिया में पैसे पर राजनीति पलने लगी। और पैसे के दम पर सरकार गिरने और बनने लगी है। केन्द्र सरकार किसी भी राज्य की सरकार के काम काज और उसकी व्यवस्था पर ऊंगली नहीं उठाना चाहती। तोहमत लगने से बचना चाहती है। कानून के जरिये हटाना जरूरी नहीं समझती। जैसा कि बाबरी मस्जिद गिरने के बाद नरसिम्हा राव सरकार ने कानून व्यवस्था के मुद्दे पर यू.पी.की कल्याण सिंह सरकार, हिमाचल प्रदेश की शांता कुमार,राजस्थान की भैरों सिंह शेखावत और एम.पी. की सुंदर लाल पटवा सरकार को बर्खास्त कर राष्ट्रपति शासन लागू करवा दिया था। अब ऐसा नहीं होता। नये इंडिया में सरकार हड़पने की साजिश तेज है। यह दौर पैसे के दम पर सरकार गिराने और बनाने का है। आन्ध्र में विधायकों को खरीदने का भंडाफोड़ होने के बाद अब गैर बीजेपी शासित राज्यों के कान खड़े हो गए हैं।
महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे कितने दिनों के मुख्यमंत्री हैं,खुद शिंदे भी नहीं जानते। क्यांे कि उनके बाइस विधायक बीजेपी में शामिल होने को आतुर हैं। इसके पीछे वजह यह है, कि सरकार में वे शिंदे गुट के हैं। लेकिन अपने विधान सभा क्षेत्र में वे शिवसेना के विधायक हैं। एकनाथ शिंदे गुट के विधायकों की फजीहत हो रही है। इससे बचने वे बीजेपी में शामिल होना चाहते हैं। कम से कम मौजूदा राजनीति की कालिख लगने से बच जायेंगे। क्यों कि महाराष्ट्र के चार प्रोजेक्ट गुजरात शिफ्ट करने के बावजूद शिंदे ने केन्द्र सरकार से कुछ नहीं कहा।
टाटा एयरबस परियोजना 22000 करोड़ रुपये की है, महाराष्ट्र से गुजरात स्थानांतरित कर दिया गया। अब वायुसेना के लिए टाटा एयरबस द्वारा सी.295 परिवहन विमान का निर्माण गुजरात के वड़ोदरा शहर में होगा। उद्धव सरकार ने कोविड के समय 6.5 लाख करोड़ रुपए और दावोस से 80000 करोड़ रुपए का निवेश लाए थे। इसी तरह देश का पहला सेमीकंडक्टर प्लांट जिसकी कुल लागत 154000 करोड़ रुपये है। अब महाराष्ट्र की बजाय गुजरात के अहमदाबाद जिले में लगेगा। दो अन्य प्रोजेक्ट भी गुजरात शिफ्ट कर दिया गया। इन वजहों से देर सबेर एकनाथ शिंदे गुट के विधायकों दो फाड़ की संभावना ज्यादा है। एकनाथ शिंदे के नाम के आगे से मुख्यमंत्री शब्द भी हटने की आशंका है।
विपक्ष चीख-चीख कर कह रहा है। जनता के वोट से बने लोकतंत्र को दो चार काॅरपोरेट के लोग अपने तरीके से गढ़ने लगे हैं। देश की हर राज्य सरकार के मन में भय ब्याप्त हो गया है, कि अगली सुबह उनकी सरकार रहेगी या नहीं। बहुमत वाली सरकार के कब बुरे दिन आ जाएं,वह भी नहीं जानती। ईडी, आईटी और सीबीआई के छापे का खौफ अपनी जगह है। एक नया खौफ गैर बीजेपी सरकार को हो गया है। जैसा कि दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया कहते हैं,उनकी सरकार को अस्थिर करने की साजिश बीजेपी कर रही है। आडियो टेप में दिल्ली सरकार के 43 विधायकों को खरीदने की बात सामने आई है। तेलंगाना के टी.आर.एस. के विधायकों को खरीदने के आरोप में गिरफ्तार तीन लोगों ने इस साजिश का पर्दाफाश किया। आडियो टेप में शाह और बी.एल संतोष से बातचीत में कह रहे हैं,अलग से पैसा रखा है। तेलंगाना में चार विधायकों को खरीदने के लिए 25-25 करोड़ रुपये दिये जा रहे थे। दिल्ली सरकार के 43 विधायकों को खरीदने के लिए 1075 करोड़ रुपये का अरेंज किया गया। यह अलग बात है कि कोर्ट ने पुलिस को तीनो आरोपियों रामचन्द्र भारती,संत डी सिम्हजी ओर व्यपारी नंदकुमार को हिरासत में लेने के आदेश को खारिज करते हुए रिहा करने आदेश दिया। नदकुमार को विधायक पी रोहित रेड्डी के मोहनाबाद स्थित फार्म हाउस से गिरफ्तार किया गया था।
सवाल यह है कि इतनी बड़ी रकम पर ईडी और इनकम टैक्स चुप क्यों है? यह पता लगाया जाना चाहिए कि आखिर इतनी राशि आई कहांँ से। आडियो में बी.एल संतोष का नाम आया है तो ईडी को उनके खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। चुप्पी कई संदेहों की ओर इशारा कर रही है। जाहिर सी बात है, कि पंजाब में भी सरकार को अस्थिर पैसे के दम पर करने की कोई योजना हो सकती है।
पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले में करीब 3 महीने पहले झारखंड सरकार को अस्थिर करने के लिए कांग्रेस के विधायक इरफान अंसारी,राजेश कच्छप और नमन विक्सल,ड्राइवर और एक सहयोगी कोे गिरफ्तार किया गया था। इन्हें हेमंत सोरेन सरकार से समर्थन वापस लेने के लिए 48 लाख रुपये रिश्वत दिया गया था। सरकार गिरने के बाद दस करोड़ रुपये और मंत्री पद का वायदा था। रांची के अरगोड़ा थाने में तीनों विधायको के खिलाफ एफ.आई.आर.दर्ज की गई। कांग्रेस ने तीनों को पार्टी से निष्कासित कर दिया है।
गौरतलब है,कि बीजेपी ने हेमंत सोरेन को आफर दिया था कि वो कांग्रेस को छोड़कर बीजेपी के समर्थन से सरकार बना लें। अभी हेमंत सोरेन की विधायकी का मामला राज्यपाल के पास है। चुनाव आयोग ने अपनी तरफ से रिपोर्ट दे दी है। फैसला राज्यपाल को करना है। जाहिर सी बात है राज्यपाल हेमंत सोरेन के खिलाफ तब तक कोई कार्रवाई नहीं करेंगे,जब तक बीजेपी सरकार बनाने के लिए किसी योजना के अंजाम तक नहीं पहुंँच जाती है। यानी झारखंड सरकार में बीजेपी को किसी शिंदे की तलाश है।
देश की राजनीति में हाॅर्स टेªेडिंग का खेल में अचानक बड़ी तेजी से उभरा। कर्नाटक, महाराष्ट्र,मध्यप्रदेश जैसे बड़़े राज्यो में विधायकों को खरीद कर चुनी गई सरकार को गिरा कर नई सरकार बनाने की राजनीति हुई है। प्रलोभन के जरिये विधायकों को पार्टी छोड़ने के लिए उकसाया गया। जिन पार्टियों से विधायक गए उन्होंने सामने वाली पार्टियों पर विधायकों को खरीदने का आरोप लगाया। सबसे अधिक चैंकाने वाला खेल मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र में हुआ। कमलनाथ की सरकार ज्योतिरादित्य की वजह से गिर गई और उद्धव की महाविकास अघाड़ी सरकार एकनाथ शिंदे की बगावत से गिर गई। दोनों की सरकार को गिराने में बीजेपी का अहम रोल रहा। वहीं कर्नाटक में सरकार बनने और गिरने का खेल कई बार हुआ। छब्बीस जुलाई 2019 को बीएस येदियुरप्पा चैथी बार राज्य के मुख्यमंत्री बने। इस वक्त बसवराज बोम्मई मुख्यमंत्री हैं।
आने वाले समय में चुनी सरकार को इसी तरह गिराने का खेल चलने से भारतीय राजनीति वह नहीं रह जायेगी,जिसे जनता जानती है। जिस देश में सत्ता की बागडोर छीनने की साजिश वाली राजनीति आकार लेगी, वहाँ काॅरपोरेट जगत के लोग चाहेंगे कि केन्द्र ही नहीं राज्यो में भी सरकार उनके दम पर बने। इससे काला धन को सफेद करने वालों की संख्या बढ़ेगी। जो एक स्वस्थ्य लोकतंत्र के हित में नहीं है।
Friday, November 4, 2022
सरकार गिराने की साजिश में अव्वल बीजेपी
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