Thursday, June 19, 2025

लाल आतंक के जंगल में विकास की नई इबारत से ग्रामीण गदगद

बालाघाट \ रमेश कुमार ‘रिपु’. लौगुर का जंगल कभी लाल आतंक का ठिकाना हुआ करता था। अब यहां समृद्धि की बयार देखकर गांव वाले फूले नहीं समाते । लौगुर जंगल का नाम लेते ही बालाघाट के हर व्यक्ति के चेहरे पर खौफ दिखने लगता था।अब वहां परिवर्तन की गाथाएं लिखी जाने लगी है। लौगुर को भी कभी विकास की आहट सुनने को मिलेगा, ग्रामीण इसकी कभी कल्पना नहीं किये थे। जिस मार्ग पर कभी बैलगाड़ी वाले चलना सबसे कठिन काम मानते थे,उस मार्ग पर अब बैलगाड़ी,घोड़ा गाड़ी,चार पहिया और तीन पहिये सहज हो गए। इस घने जंगल में 11 करोड़ 70 लाख रुपए की लागत से पांच हाई लेबल ब्रिज बन रहे हैं। जिसमें से चार पूरे हो गए हैं। विकास का नया अध्याय लाल आतंक के जंगल में लिखे जाने से ग्रामीण गदगद हैं। बारिश में भी सफर आसान हुआ मप्र ग्रामीण सडक विकास प्राधिकरण द्वारा 5 हाई लेवल ब्रिज का कार्य शुरू किया गया था जिनमें से 4 पूर्ण हो चुके है। सबसे बड़ी बात है, इसी घने जंगल में 17.42 किमी. लंबी 1255.92 लाख रुपये की सड़क निर्माण कीविभाग द्वारा पूरी तैयारी कर ली गई है। इस घने जंगल में बसें 7 वनग्रामों के लिए उस्काल नदी जल का एक बड़ास्रोत तो है, लेकिन बारिश के दौरान परिवहन में समस्या भी बन जाया करती है। अब से बारिश में भी यहां के जनजातीय नागरिक आसानी से सफर कर पायेगी। इस घने जंगल में खारा, पोलबत्तूर, कोकमा, तल्लाबोडी, लौगुर,वरूरगोटा और सल्फारीठ वनग्राम आबाद है। जो अब सीधे सड़क से जुड़कर विकास के रास्ते पर आ सकेंगे। नक्सलियों के डर के बीच मिली सफलता
मप्र ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण महाप्रबंधक श्रीमती माया परते ने बताया कि यहां पुल पुलिया और ब्रिज केनिर्माण कार्य के लिये कोई कम्पनी नक्सबल डर के कारण तैयार नहीं हो पा रहीं थी। विकास द्वारा कई बार टैंडर लगाने के बाद प्रशासनिक सहयोग देने का प्रस्ताकव दिया। इसके अलावा वनों को बचाते हुए निर्माण करने कीअलग चुनौती रहीं है। यहां चार ब्रिज पुर्ण हो गए है, एक 17 किलोमीटर की एक सड़क जो खुरसुड़ होकर पोलबत्तूर से खारा को जोड़ेगी, जिससे चिखलाझोड़ी मार्ग से जोड़ेगी। कलेक्टर  मृणाल मीना ने कहा कि इस घने जंगल में बहुत ही आवश्यंक आधारभूत सरंचना तैयार हुई है। ब्रिज तैयार होने इसी बारिश में 7 वन ग्रामों को सुगमता होगी।
कई खूबियां है लौगुर में बालाघाट में लौगुर का 66.71 किमी.क्षेत्र व 412 हेक्टेयर में बसा घनघोर जंगल अपने आप मे कई खूबियों वाला है। जिसकी उत्तर में सीमा चिखलाझोडी रोड़ व दक्षिण में सामनापुर, पूर्व में बैहर-बालाघाट रोड़ से मिलता है। इसजंगल का एक बड़ा क्षेत्र मयूरबिन के लिए खास पहचान रहता है। यह जंगल अब भी आम नागरिकों की पहुँच के कारण अनछुआ है। इस जंगल मे प्रवेश तीन स्थानों से हो सकता है। एक बैहर बालाघाट रोड़ से, चिखलाझोडी रोड से और एक सामनापुर रोड़ पर आमगांव की ओर से मोटर सायकिल से सम्भव है। अभी एमपीआरआरडीसी द्वारा खुरसुड़ की ओर से खारा तक उस्काल नदी और अन्य नालों ब्रिज तैयार हुए है।
 ग्रामीणों में विकास की उम्मीद जागी 17 जून को खुरसुड़ निवासी श्री चंद ने अपनी बैलगाड़ी पहली बार पूल से निकालते हुए कहा कि मैं हमारी बैलगाड़ी बिना मुसीबत से निकल पाएगी। कई बार नदी के पानी मे बैल उतरते नही थे और पहिये पत्थरों व रेत में फंस जाते थे। फुलकन बाई का कहना है कि अब गांव की बेटियों आसानी से ब्याही जा सकेगी। कई रिश्ते सुव्यवस्थितपहुँच मार्ग नही होने से नही हो पाते थे। अब यह धारणा बदलने लगी है। वन समिति अध्यक्ष श्री प्रह्लाद को भी वन ग्राम में विकास की नई उम्मीद दिखाई देने लगी है।

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