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Sunday, December 9, 2012
शहरयार से ये कहकर
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प्रकृति के आए ‘अच्छे दिन’
पेड़ों की शाखें उदास थीं। क्यों कि उनके कंधों पर पंक्षी नहीं बैठते थे। दरिया की तह पर मछली,कछुआ रोया करते थे। क्यों कि नदियों के पान...
नक्सलियों नें बदल ली जिन्दगी
राजनांदगांव पीटीएस में तीन सैकड़ा जवानों के साथ ग्यारह ऐसे जवान भी प्रशिक्षण ले रहे हैं जो कभी नक्सली थे। आत्मसमर्पण के बाद इनकी जिन्दगी...
नक्सलवाद के पंजे में छग की गर्दन
नक्सलियों ने छत्तीसगढ़ को गृहराज्य बना लिया है। बस्तर का अबूझमाड़ जंगल माओवादियों की राजधानी है। राज्य के 14 जिले नक्सल प्रभावित हैं,जब...
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