Wednesday, June 12, 2019

मरीज न बनें अस्पताल

    मरीज न बनें अस्पताल
आयुष्मान योजना से आगे की योजना को छत्तीसगढ़ सरकार उतारना चाहती हैं। ताकि अस्पताल मरीज न बनें। सरकार को सबके सेहत की चिंता है,इसलिए डेढ़ साल के भीतर सभी 27 जिला अस्पतालों को मल्टी स्पेशियलिटी बनाया जाएगा। आयुष्मान योजना में ऐसी कई बीमारियां है, जिनका इलाज नहीं है। और इस योजना का लाभ मरीजों को भर्ती होने के बाद मिलता है। जबकि इससे बेहतर कई योजनाएं प्रदेश में संचालित हैं। प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री टी.एस.सिंह देव से बीमार स्वास्थ्य व्यवस्था की अंतहीन पीड़ा और स्वास्थ्य को लेकर रमेश कुमार ‘‘रिपु‘‘ ने उनसे बातचीत की,जिसके प्रमुख अंश -

0 प्रदेश सरकार आयुष्मान योजना को केरल,ओड़िसा,दिल्ली सरकार की तरह क्या इसलिए बंद करना चाहती है इसलिए कि यह केन्द्र की बीजेपी सरकार की योजना है?
00 छत्तीसगढ़ में अभी आयुष्मान योजना बंद नहीं की जा रही है। बताया जा रहा है कि छत्तीसगढ़ में आयुष्मान पांच लाख रूपये तक का उपचार नहीं कर रही है। छत्तीसगढ़ सरकार के पास आयुष्मान योजना से आगे जाने की योजना है। इसे राजनीतिक रंग देकर लोग देख रहे हैं कि बीजेपी की योजना है इसलिए इसे बंद किया जा रहा है। जबकि ऐसा नहीं है। आयुष्मान योजना को देश की पांच सरकारों ने नहीं स्वीकारा। उनका कहना है कि हमारे यहां इससे बेहतर योजनायें है। प्रदेश सरकार के पास भी इससे अच्छी योजनायें हैं। संजीवनी सहायता कोष जैसी योजनाएं संचालित हैं।
0 कई जिला अस्पताल खुद बीमार हैं। उनके उपचार की दिशा में क्या करने जा रहे हैं?
00 वर्तमान में कई अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सक तो हैं लेकिन, जरुरी संसाधनों की कमी है। इसलिए प्रदेश के सभी 27 जिला अस्पतालों को मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल में अपग्रेड किया जाएगा। इसके अलावा सभी 6 मेडिकल कॉलेजों को सुपर स्पेशियलिटी बनाया जाएगा। इसके लिए राज्य सरकार ने तैयारी शुरू कर दी है। योजना के मुताबिक अगले डेढ़ साल में इन अस्पतालों को नई सुविधाओं से लैंस कर दिया जाएगा। ऐसा इसलिए किया जा रहा है कि ताकि स्वास्थ व्यवस्थायें दुरूस्त हो सकंे। ऐसा होने से सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में भी मरीजों को बेहतर इलाज मिल सकेगा।   
0 आयुष्मान योजना को अन्य योजनाओं से बेहतर बताया जा रहा है। यदि ऐसा नहीं है तो फिर खामियां क्या है?
00 छत्तीसगढ़ में आयुष्मान योजना केवल 42-43 लाख नागरिकों को ही कव्हर्ड करता है। 17-18 लाख इसके दायरे में नहीं आते। जबकि सबको स्वास्थ्य सुविधा मिलनी चाहिए। यूपीए सरकार के समय प्रधान मंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत 50 हजार रूपये तक के इलाज की व्यवस्था थी। पहले 300 रूपये में स्वास्थ्य बीमा होता था, आज 11 सौ रूपये लगते है। जाहिर है कि बीमा कंपनियों के माध्यम से टैक्स पेमेंट दूसरी जगह जा रहा है। 11 सौ रूपये के प्रीमियम पर 50 हजार रूपये तक के इलाज की सुविधा है। जिसमें 60 फीसदी केन्द्र सरकार देती है और 40 फीसदी राशि राज्य सरकार। 50 हजार रूपये के उपचार में छत्तीसगढ़ सरकार ट्रस्ट माॅडल के तहत पेमेंट कर रही है। दरअसल आयुष्मान योजना के संदर्भ में कइयों को जानकारी नहीं है। इस योजना में कई खामियां है। इस योजना में मरीजों को फायदा,उसके भर्ती होने के बाद मिलता है। यानी भर्ती होने से पहले जितनी भी जांचे हैं मसलन,एक्सरे,ब्लड जांच,सोनोग्राफी आदि जांच के लिए मरीज को भर्ती से पहले खुद पेमेंट करना पड़ेगा। जाहिर सी बात है कि हर मरीज तो भर्ती नहीं होता। एक जानकारी के अनुसार 70-86 फीसदी लोग भर्ती नहीं होते। दूसरी ओर आयुष्मान योजना में ऐसी कई बीमारियां हैं, जिनका इलाज नहीं है। गेंगरीन के आॅपरेशन की व्यवस्था है, लेकिन शुगर का नहीं होगा। आयुष्मान योजना में 13 सौ बीमारी के उपचार की व्यवस्था है लेकिन, पांच लाख से ऊपर के इलाज की व्यवस्था नहीं है। 
0 तो क्या आयुष्मान योजना 13 सौ बीमारियों का इलाज जुमला है। यह केवल मन की बातें और प्रचार तक ही सीमित है?
00 एक हद तक यह जुमला ही है। आयुष्मान में 10 करोड़ परिवार को इंगित किया गया है।  50 करोड़ लोग इसके दायरे में आयेंगे। लेकिन 70 करोड़ लोगों को इसका लाभ नहीं मिलेगा। इसकी अपनी सीमा है। छत्तीसगढ़ में पचास हजार के ऊपर के उपचार में केन्द्र सरकार का कोई योगदान नहीं है। यह केवल मन की बातें और प्रचार तक आयुष्मान योजना उपस्थित है। सबको स्वास्थ्य का लाभ मिल सके और बीमार अस्पताल का भी इलाज हो सके, इसलिए छत्तीसगढ़ सरकार ने स्वास्थ्य विभाग की बेहतरी के लिए बेहतर योजनाओं पर काम कर रही है। प्रदेश की संजीवनी सहायता कोष से 30 बीमारियों का इलाज होता है। हाॅर्ट की बीमारी के लिए डेढ़ लाख,किडनी ट्रांसप्लांट के लिए तीन लाख रूपये की सहायता मिलती है।
0 क्या यह मान लिया जाये कि अयुष्मान योजना का विकल्प है सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल?
00 आयुष्मान योजना की कल्पना है निःशुल्क उपचार। लेकिन उसकी अपनी एक सीमा है। हम उस सीमा से आगे जाकर सबको स्वास्थ्य लाभ देना चाहते हैं। पांच लाख से ऊपर जाने की चुनौती है। हार्ट,लीवर आदि के ट्रांसप्लांट की व्यवस्था हो, यह चाहते हैं। सुपर स्पेशियलिटी में न्यूरो सर्जरी, न्यूरो लाजिस्ट कार्डियक नेफ्रो, सर्जरी, पीडियाट्रिक, आंतों समेत सभी बड़ी बीमारियों के विशेषज्ञ और सर्जरी की मशीनरी के साथ डाॅक्टर भी उपलब्ध रहेंगे। मल्टी स्पेशियलिटी मेडिसिन, सर्जरी पीडियाट्रिक,और हड्डी रोग विशेषज्ञ जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। प्रदेश में अभी एक मात्र सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल डीकेएस रायपुर में है। योजना के मुताबिक अगले डेढ़ साल में 6 मेडिकल कॉलेजों में मिलेगी सुपर स्पेशियलिटी सुविधा। जिला अस्पतालों में ट्राॅमा सेंटर से लेकर तमाम सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
0 मेडिकल काॅलेजों में मरीजों का रिकार्ड रखने को क्यों कहा गया है।
00 दरअसल मेडिकल काॅलेज में हर तरह के मरीज आते है। ओपीडी में जितने भी रजिस्ट्रेशन हो रहे हैं,उनके नाम और बीमारी की जानकारी हर हफ्ते मेडिकल कॉलेज में उपलब्ध कराई जाएगी। हर महीने इसकी समीक्षा कर यह पता लगाया जाएगा कि जिस बीमारी का उपचार प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में हो सकता है, उसके लिए मरीज मेडिकल कॉलेज क्यों आ रहे हैं।
0 छत्तीसगढ़ में एक चिकित्सक पर 25 हजार मरीजों के उपचार का दायित्व है। ऐसी स्थिति मंे नया छत्तीसगढ़ गढ़बों का नारा कितना असरकारक है।
00 इससे इंकार नहीं है कि चिकित्सकों और विशेषज्ञों की कमी है। सभी जिलों में चिकित्सकों की भर्ती चल रही है। अभी हमारे पास मात्र 132 स्पेशलिस्ट है। जबकि 1500 चाहिए। 800 मेडिकल आॅफीसर की कमी है। 300 मेडिकल आॅफीसर के पद भरे जायेंगे। 425 पद खाली हैं। जिसमें 345 चिकित्सकों के इंटरव्यू के लिए आये हैं। इनकी पोस्टिंग के बाद 600 और मेडिकल आॅफीसर की भर्ती के इश्तिहार निकाले जायेंगे। बेहतर पैकेज दिये जायेंगे। मेडिकल काॅलेज से हर साल एक हजार चिकित्सक निकल रहे हैं। ऐसी नीतियां बनायेंगे कि हर चिकित्सक को दो साल ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सकीय सेवा देना अनिवार्य है।
0 पिछले 10-15 सालों में डेढ़ हजार चिकित्सक इस्तीफा दे चुके हैं। दो हजार पद रिक्त हैं। ऐसी स्थिति में क्या सरकारी अस्पतालों को निजी हाथों में दे देना चाहिए? 
00 सवाल यह है कि क्या निजी चिकित्सक ग्रामीण क्षेत्रों में जाना पसंद करेंगे। सरकारी नौकरी हर कोई चाहता है। फिर सवाल यह है कि कोई निजी क्षेत्रों में भागकर जो चिकित्सक काम कर रहे हैं वो सरकारी आस्पताल में काम क्यों नहीं करना चाहते। यदि निजी क्षेत्र के चिकित्सक सरकारी अस्पतालों में काम करने को इच्छुक हैं तो आयें। उनका स्वागत है। सरकार उन्हें सवा लाख,दो लाख और ढाई लाख का पेकेज देने को तैयार है। आपको बता दें कि बीजापुर कैंपस में हमारे यहां के प्रतिनिधि गये। उन्होने देखा कि लखनऊ के चिकित्सक वहां काम कर रहे हैं। जब बाहर के लोग यहां काम कर सकते हैं तो फिर यहां क्यों नहीं। दक्षिण भारत के हर जिले में मेेडिकल काॅलेज हैं। एमीबीएस चिकित्सक 20-30 हजार रूपये के वेतन पर काम कर रहे हैं। चुनाव के बाद दक्षिण भारत के कैंपेस में जाकर हम ऐसे चिकित्सकों को आमंत्रित करेंगे। उन्हें वहां से अधिक पैकेज देंगे। सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों की कमी को इस तरह दूर करने की योजना है। जो स्पेशलिस्ट डाॅक्टर ग्रामीण क्षेत्रों में हैं उनकी पोस्टिंग जिला चिकित्सालय में की जायेगी। कांग्रेस के घोषणा पत्र में जिक्र है नर्सो की वेतन विसंगतियों को दूर करना।
0 चिकित्सा के क्षेत्र में सरकार की और क्या योजनायें हैं।
00 मिनी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पीएचसी में अभी दो का स्टाफ होता है। लेकिन इसमें दो स्टाफ और बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है। इस तरह दो अतिरिक्त स्टॉफ के साथ इसे 24 घंटे सातों दिन खुला रखने पर विचार किया जा रहा है। पिछले साल भवनहीन अस्पतालों के लिए 900 भवन तैयार किये गये। जहां खनिज से पैसा आ रहा है,उन पैसों का इस्तेमाल वहीं पर चिकित्सा क्षेत्रों में किया जायेगा।
0 पिछले दिनों प्रधान मंत्री ने कहा छत्तीसगढ़ सरकार आयुष्मान योजना का बेहतर क्रियान्वयन नहीं कर रही है। क्या यह सच है।
00 मुझे लगता है कि नेशनल हेल्थ अथाॅरिटी को आंकड़ों की जानकारी है,लेकिन प्रधान मंत्री को नहीं है। इसलिए वे गलत बयानी कर गये छत्तीसगढ़ में। नेशनल हेल्थ अथॉरिटी द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक छत्तीसगढ़ आयुष्मान योजना के क्रियान्वयन पर देश में पहले नंबर पर है। छत्तीसगढ़ में एक लाख में 95 लोगों का इलाज आयुष्मान योजना के द्वारा संभव हुआ है। केंद्र सरकार की नेशनल हेल्थ अथॉरिटी द्वारा जारी किये गये आंकड़े यह बताते हैं कि दूसरे नंबर पर देश में जो राज्य है वहां एक लाख में सिर्फ 26 लोगों का इलाज आयुष्मान योजना से हो पा रहा है।
 

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