Thursday, December 26, 2019

सवालों के घेरे में सरकार






सत्ता पाने के लिए काग्रेस ने जनता से जो वादे किये थे,वो सत्ताई भंवर में उलझ कर रह गये हैं। सरकार अपने वायदे पर उम्मीद से कम खरी उतरी। डाॅ रमन सिंह कांग्रेस सरकार के एक बरस को बुरे सपने जैसा करार देते हैं। वहीं अजीत जोगी कहते हैं नरवा, गुरवा और बाड़ी में ही उलझी रही सरकार। सवाल यह है कि भूपेश सरकार नवा छत्तीसगढ़ गढ़ने में कितने कदम चली। 

0 रमेश कुमार’’रिपु’’
                 ‘‘नवा छत्तीसगढ़ गढ़बों’’। भूपेश सरकार का यह नारा आज भी प्रदेश के हर जिले में विज्ञापन के रूप में चश्पा है। एक साल में भूपेश सरकार कितने घर चली, विपक्ष सरकार से पूछ रहा है। क्या एक साल में भूपेश का कद बढ़ा या फिर कांग्रेस का, अथवा सरकार का। वैसे देखा जाये तो प्रदेश सरकार ने अपने एक बरस सुर्खियों की राजनीति में ही गंवाये। एक साल की सरकार ने प्रदेश की जनता को क्या दिया। उसके घोषणा पत्र के कितने वायदे पूरे हुए। कांग्रेस के नवा छत्तीसगढ़ गढ़बों के नारे का सच, कितना सच है,इसका सही मूल्यांकन जनता और विपक्ष करता है। वैसे विपक्ष का एक सूत्रीय काम होता है सरकार की खामियां ढूंढना। बावजूद इसके देखा जाये तो भूपेश सरकार पूर्व सरकार के ज्यादातर मामले की जांच के लिए एसआइटी का गठन करते एक बरस बिता दिये। आठ एसआईटी गठित की गई। हाई कोर्ट ने सात एसआईटी को न केवल रद्द किया बल्कि, जांच पर भी रोक लगा दी। सरकार सत्ता में आने के लिए किसानों से ढाई हजार रूपये प्रति क्ंिवटल की दर से धान खरीदने का वायदा किया था। लेकिन अब वह प्रदेश की 2048 केन्द्रों में 1815 और 1835 रुपए की दर पर धान 15 फरवरी तक खरीदेगी। इस साल 54 नए खरीदी केन्द्र बनाए गए हैं। जबकि 48 मंडियों एवं 76 उपमंडियों के प्रांगण का उपयोग भी खरीदी के लिए किया जाएगा। इस साल प्रदेश के 19 लाख 56 हजार किसानों ने धान बेचने के लिए अपना पंजीयन कराया है। जो कि पिछले साल की तुलना में दो लाख 58 हजार ज्यादा है। सरकार द्वारा घोषित 25 सौ रुपए मंेे से अंतर की राशि किसानों को अलग से दी जायेगी। लेकिन कैसे दी जायेगी,यह सरकार ने अभी तक नहीं बताया। अलबत्ता प्रदेश सरकार द्वारा किसानों को अंतर की राशि देने के लिए पांच मंत्रियों की कमेटी बनाई है। जो तेलंगाना की रइत बंधु और ओडिशा की कादिया पॉलिसी का अध्ययन करेगी। कमेटी आगामी बजट सत्र के पहले सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। सीएम भूपेश कहते हैं कि, किसानों को हर हाल में 25 सौ रुपए प्रति क्विंटल की दर से भुगतान किया जाएगा। सरकार ने शीतकालीन सत्र के अनुपूरक बजट में 205 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। जाहिर सी बात है यदि अंतर की राशि प्रदेश सरकार अपनी जेब से देती है, तो उसे 600 करोड़ रूपये का नुकसान होगा। 
किसानों का गुस्सा सड़कों पर
प्रदेश में किसानों से सरकार 1815 और 1835 रुपए की दर पर धान खरीदने का आदेश जारी किया तो विपक्ष ने हंगामा किया। किसानों ने सड़कों पर प्रदर्शन किया। कवर्धा में धान खरीदी शुरू होने के दूसरे हफ्तें विवाद बढ़ा। कवर्धा के किसानों ने सरकार की खिलाफ़त की और कहा पूरा धान खरीदने का वायदा करने के बाद, तय सीमा में धान लिया जा रहा है। बचा हुआ धान सरकारी सख्ती की वजह से किसान किसी और को भी नहीं बेच सकते। जिले के झिरौनी केंद्र में किसानों ने मुख्यमंत्री का पूतला फूंका। किसानों का कहना है कि सॉफ्टवेयर को ऐसे सेट कर दिया गया है कि, वह एक सीमा तक ही धान खरीदी की एंट्री कर रहा है। जबकि सरकार और इसके अधिकारी पूरा धान लेने  की बात कह रहे हैं। प्रदेश के आधे से अधिक धान खरीदी केन्द्रों में किसानों ने बहिष्कार किया। बावजूद इसके सरकार ने इस साल 85 लाख मीट्रिक टन धान खरीदी का लक्ष्य रखा है।
बुरे सपने जैसी सरकारः रमन
पूर्व मुख्यमंत्री डाॅ रमन सिंह कहते हैं,‘‘ पूरा एक वर्ष छत्तीसगढ़ के लिए एक बुरे सपने जैसा रहा है। गेड़ी चढ़ने,भौरा चलाने और सोंटा मारने से विकास नहीं होता। दरअसल हाल ही में लोक संस्कृति के त्योहार हरेली और गौरा,गौरी पूजन में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने गेड़ी चलाई थी और सोंटा (चाबुक) भी खुद को मरवाया था। इस सरकार की जो सबसे खतरनाक बात रही, वह ये कि जिन वर्गों को बड़े सपने दिखा कर सत्ता में आई,सबसे ज्यादा उन्हें ही परेशान किया। 2500 रुपया प्रति क्ंिवटल कीमत धान की किसानों को देने से सदन में मुकर गए। धान खरीदी केन्द्रों में अराजकता की स्थिति है। सरकार केवल एक कमेटी का गठन करके धान खरीदी को लेकर अपनी जिम्मेदारी से बचना चाहती है। किसानों का कर्जा माफ करने में फर्जीवाड़ा किया गया। जिस किसान ने कर्जा लिया ही नहीं था, उसे ऋण माफी का प्रमाण पत्र थमा दिया गया। राष्ट्रीयकृत व व्यवसायिक बैंकों से कर्ज लेने वाले किसानों का एक रुपया भी माफ नहीं किया गया। 
निर्भया जैसी स्थिति हर जिले में
डाॅ रमन सिंह ने कहा,सत्ता में आयी सरकार केवल बदला और तबादले को ही बदलाव समझ बैठी है। पुलिसिंग का हाल तो ऐसा बेहाल है कि दुष्कर्म और हत्या आदि की घटनाएं रुक ही नहीं रही हैं। खुद सरकार द्वारा दी गयी जानकारी के अनुसार साल भर में 80 हजार से अधिक अपराध छत्तीसगढ़ में दर्ज किये गए हैं। जबकि अभी भी यह साल बचा हुआ है। केवल रायपुर में रेप,हत्या की 80 से अधिक जघन्य वारदात हो चुकी हैं। डॉ रमन ने कहा कि छत्तीसगढ़ में किसी भी जिले में महिलायें, बच्चियां सुरक्षित नहीं हैं। आये दिन हो रहे अनाचार, हत्याए व छेड़छाड़ की घटनाओं से छत्तीसगढ़ की पहचान अब अपराध गढ़ के रूप में होने लगी है। राज्य के रायपुर संभाग में ही 448 रेप व 664 अपहरण के मामले दर्ज किये गये हैं। बिलासपुर संभाग में 891 रेप व 1377 अपहरण के मामले दर्ज किये गये हैं। कुल 27 जिलों में 7 महिने के भीतर ही 35954 अपराध के मामले दर्ज हैं। हर कोने से निर्भया जैसी वारदातें सामने आ रही हैं। इसी विधानसभा में हमने अपने विधायक भीमा मंडावी जी को खोया है। उनकी नृशंस हत्या की एनआई जांच रोकने के लिए एड़ी,चोटी का जोर लगा दिया था। आखिर किस बात की परदेदारी है। क्या छिपाना चाहते हैं ये। अब हाई कोर्ट ने एनआईए जांच का रास्ता साफ किया है। जांच होने दीजिये पता चलेगा। यही कांग्रेस अध्यक्ष रहते हुए झीरम का सबूत अपनी जेब में होने की बात करते थे, कहाँ है साक्ष्य, अभी तक एजेंसियों को दिया क्यों नहीं।
दिल्ली के वकीलों को पैसा लुटाया
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष विक्रम उसेंडी कहते हैं,‘‘ पुलिस और प्रशासनिक मशीनरी को केवल बदलापुर की राजनीति के लिए झोंक दिया गया। विधानसभा में सवाल पूछने पर चैंकाने वाली जानकारी सामने आयी कि केवल कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम को ही 60 लाख रूपये की फीस दे दी गई ताकि, झूठा मामला बना कर हमें फंसाया जा सके। ऐसे आरोपियों पर प्रदेश की गाढ़ी कमाई लुटाना कहां का न्याय है। इसके अलावा भी दिल्ली के कांग्रेसी वकीलों पर करोड़ों लुटाये गए। अधिकांश मामलों पर कोर्ट में सरकार को मुंह की खानी पड़ी। प्रदेश सरकार ने नेशनल हेराल्ड को दिया 50 लाख का विज्ञापन। जो जनहित में नहीं है।
सरकार के पास विजन नहीं: जोगी
देखा जाये तो विपक्ष का हर नेता भूपेश सरकार की खिलाफत कर रहा है। उन्होंने कोई ऐसा काम नहीं किया है जिसे विपक्ष कहे कि यह काम ठीक था। छजका के सुप्रीमों अजीत जोगी कहते हैं, 15 साल बाद कांग्रेस सत्ता में आई लेकिन, पूरा एक साल हताशा एवं निराशा से भरा रहा। सरकार के पास कोई विजन नहीं है। इस सरकार ने एक साल नरवा, घुरवा, और बाड़ी में ही गुम रही। युवाओं को रोजगार, किसानों को परेशानी, महंगाई पर नियंत्रण, स्वास्थ्य शिक्षा समेत हर क्षेत्र में सरकार कुछ नहीं कर पाई। सरकार कहती है बिजली बिल आधा कर दिया गया है। भरपूर बिजली दी जा रही है। लेकिन लो वोल्टेज की परेशानी के चलते बालोद जिले के डौंडी विकास खंड के ग्राम पंचायत मथेना में 40 किसानों की 140 एकड़ फसल सूख गई। पुलिस कर्मियों को मिलने वाले नक्सल भत्ते को बंद कर दिया गया। यह फैसला दुर्भाग्यपूर्ण है। 
खत्म हो जायेगा नक्सलवादः भूपेश
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल कहते हैं समीक्षा के नजरिये से एक साल की अवधि कम है। प्रदेश की जनता के साथ छल नहीं किया। रमन सरकार 20 लाख हेक्टेयर सिंचाई क्षमता की बात करते रहे, जबकि हमारी क्षमता 11 लाख हेक्टेयर की है। ग्रामीणों को रोजगार दे रहे हैं। ई टेंडर बंद कर दिया गया है। नक्सल समस्या में 50 फीसदी की कमी आई है। पूरी उम्मीद है कि पांच साल में नक्सल समस्या खत्म हो जायेगा। प्रदेश की जनता को 450 करोड़ की बिजली बांटी। धान खरीदी के लिए 21 हजार करोड़ खर्च किया गया है। नरवा, घुरवा और बाड़ी योजना के लिए 4000 करोड़ का फंड दिया गया है। गोठान सरकारी योजना नहीं है। इसका संचालन गांव वालों को ही करना है। हरेली,तीजा और पोरा जो इस प्रदेश का त्योहार है। छुट्टियां घोषित की। मंत्रिमंडल के काम काज की समीक्षा पार्टी हाई कमान और बड़े नेता कर रहे हैं। यह प्रक्रिया चलती रहेगी। हमारी देनदारी 50 हजार करोड़ की है। किसानों का कर्जा माफी,धान खरीदी,मानक बोरा संग्रहण दर बढ़ाया है। इस वजह से  सभी सेक्टरों में उछाल आया है। आदिवासियों की जमीन छीनी जाती रही है। उनको 4200 एकड़ जमीन वापस करने का काम पहली बार हुआ। स्वच्छता दीदी योजना के तहत मानदेय बढ़कर छह हजार किया। जमीन की गाइड लाइन दर में 30 फीसदी की कमी की गई। छोटे भूखंडों की के क्रय विक्रय से रोक हटाया गया। 1250 करोड़ की लागत के 28694 नवीन आवास स्वीकृत किये गये।
सरकार के समक्ष चुनौतियां
इससे इंकार नहीं है कि प्रदेश सरकार को स्थायी रूप से नक्सल समस्या मिली है। सरकार के पास देनदारी अधिक है। घाटे से उबारना और आय बढ़ाना है। 7.18 फीसदी ब्याज दर पर सरकार ने 2 हजार करोड़ का कर्ज लिया। केन्द्र सरकार ने किसानों को बोनस देने से इंकार कर दिया है। लेकिन कांग्रेस के घोंषणा पत्र में ऐसे कई वायदे हैं, जो उसके लिए चुनौती है। हर साल 2500 रूपये क्विंटल किसानों से धान खरीदना। प्रदेश के 40 लाख बेरोजगारों को बेरोजगारी भत्ता देना या फिर उनके लिए रोजगार की व्यवस्था करना। दस लाख बेरोजगारों को ढाई हजार रूपये बेरोजगारी भत्ता देने की बात कही थी। नरवा,घुरवा और बाड़ी योजना को जमीनी धरातल पर सफल करना। कुपोषण दूर करना। शराब बंदी के लिए गठित कमेटी की रिपोर्ट को लागू करना।शराब बंदी का वादा करके सत्ता में आई कांग्रेस अब 1 साल बाद भी शराब बंदी को लेकर कोई भी फैसला नहीं ले पाई। बल्कि दो घंटे और शराब दुकानें खोलने की सीमा बढ़ा दी गई। वहीं शराब से आय का लक्ष्य बढ़ा कर 4700 हजार करोड़ किया गया है। पूरे प्रदेश में ओवर रेट पर शराब बिक रही है उसके करीब 5420 मामले दर्ज किये गये हैं। स्काई वाॅक को तोड़ने की बात कही थी,कमेटी भी गठित की गई। लेकिन हुआ कुछ नहीं। पुलिस भर्ती बल .की परीक्षाओं का परिणाम लंबे समय से रोक कर रखा गया है। 61 हजार नौजवानों का भविष्य अंधकार में है। दो वर्ष की सेवाओं के उपरांत शिक्षाकर्मियों को नियमित करने का वादा भी झूठा साबित हुआ। सरकारी नौकरियों पर एक साल की रोक लगा दी गई। सरकार ने वादा किया था कि महिला स्व सहायता समूहों का कर्जा माफ किया जायेगा। इस वक्त 1 लाख से भी ज्यादा महिला स्व सहायता समूहों का लगभग 1100 करोड़ रुपया कर्जा है। सरकार ने एक फूटी कौड़ी माफ नहीं की। विधवा महिलाओं को 1 हजार रुपए पेंशन देने का वादा था, वो भी पूरा नहीं किया गया। पीड्ल्यूडी विभाग के माध्यम से होने वाले बड़े विकास के कार्य आज प्रदेश भर में रुके हुए हैं। रेल कारिडोर का पैसा रोक कर प्रदेश के विकास को बाधित किया गया है। स्मार्ट सिटी के सभी प्रोजेक्ट रुके। उच्च न्यायालय ने सरकार के कई फैसले को निरस्त किया,मसलन, सहकारी संस्थाओं को भंग करने का मामला हो, आरक्षण बढ़ाने का विषय हो प्रमोशन में आरक्षण देने का मामला हो, अनुसूचित जाति आयोग व महिला आयोग की सदस्यों की नियुक्ति का मामला हो, पूर्व मुख्य सचिव अमन सिंह के खिलाफ एसआईटी गठित करने का मामला हो। पाटन और कवर्धा के 700 किसान अब भी कर्जदार। सहकारी बैंक के सीइओ ने नोटिस दिया है। सरकार के कर्ज माफी घोषणा पर यह प्रश्न चिन्ह है। गन्ना किसान खेत में आग लगा रहे हैं। बंपर पैदावार के बाद भी शक्कर कारखाने में पर्ची नहीं मिलने से किसान परेशान हैं। जनता को लाभ पहुचाने वाली 22 तरह की योजनाओं पर सरकार ने रोक लगा दी।
 सियासी प्रतिशोध में बिताः कौशिक
नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने कहा,कांग्रेस सरकार के एक साल का कार्यकाल राजनीतिक प्रतिशोध का रहा है। प्रदेश सरकार के काम की शुरुआत पूर्व मुख्यमंत्री डॉण् रमन सिंह के खिलाफ बदलापुर से शुरू हुई और डॉ रमन सिंह के खिलाफ फिर दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई के साथ एक साल इस सरकार ने पूरा किया है। पूरे साल भर प्रदेश के मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता मनगढ़ंत और झूठे आरोप लगाकर भाजपा के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा सरकार के चरित्र हनन में ही लगे रहे। 
बहरहाल भूपेश सरकार ने एक साल में ढाई घर भले नहीं चली विपक्ष की नजरों में लेकिन अपनी छाप प्रदेश की जनता के बीच छोड़ी। इससे इंकार नहीं कि कांग्रेस सरकार को अपने घोषणा पत्र के कई कामों को अभी करना बाकी है। यदि उसे पूरा नहीं की तो सरकार के प्रति जनता में नाराजगी बढ़ सकती है।














     

No comments:

Post a Comment