डेढ़ हजार की आबादी वाले छत्तीसगढ़ के रायपुर से दो सौ पैंतीस किलोमीटर दूर गरियाबंद जिले के देवभोग तहसील के सुपेबेड़ा गांव में पिछले पांच सालों से शहनाई नहीं बजी। क्यों कि इस गांव का पानी किडनी का दुश्मन है। सैकड़ों लोगों की जानें चली गई। पन्द्रह सालों तक बीजेपी की सरकार ने पीने का पानी मुहैया नहीं करा सकी और अब कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री को गांव वाले उनके किये वायदों को याद दिला रहे हैं।
0 रमेश कुमार ‘‘रिपु’’
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से दो सौ पैतीस किलोमीटर दूर गरियाबंद जिले के देवभोग तहसील के सुपेबेड़ा गांव में पानी में मौत बसती है। सुनकर हैरानी होती है। पानी में मौत कैसे बसती है? दरअसल आजादी के इतने बरसों के बाद भी न तो रमन की सरकार और न ही भूपेश की सरकार ने मीठा पानी उपलब्ध करा सकी। यहां के किसी भी बोर का पानी जीवन नहीं है। डेढ़ हजार आबादी वाले इस गांव के लोगों का कहना है कि करीब सवा सौ लोगों की मौत हो चुकी है। साढ़े तीन सौ लोगों के रक्त की रिपोर्ट पाॅजिटीव आने से राज्यपाल अनुसुइया उइके हैरत में हैं। उन्हें जब इसकी जानकारी दी तो उन्हांेने कहा,’’मै हतप्रभ हूं कि सवा सौ लोगों की पानी की वजह से किडनी फेल हो जाने से जानें जा चुकी है। खबर चैकानें वाली थी इसलिए वहां जाकर इस गांव के लोगों से मिली। सरकार सुपेबेड़ा गांव के प्रति काफी गंभीर है। वह यहां के मरीजों के लिए सब कुछ करने को तैयार है। इसके बाद भी मेरी जरूरत महसूस होती है तो उन्हें व्यक्तिगत मदद को तैयार हूं’’। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा,’’ राज्यपाल की चिंता वाजिब है। हम लोग भी चिंतित है। हम तो चाहते हैं कि उसके कारण का पता लगे।राज्यपाल सुपेबेड़ा की स्थिति देखने के बाद केन्द्र सरकार को भी कहें कि पता लगाये कि आखिर मौत की वजह क्या है’’?
सुपेबेड़ा पूरे छत्तीसगढ़ में मौत के गांव के नाम से जाना जाता है। यही वजह है कि किडनी की बीमारी के कारण एक दशक से हालात बेहद खराब हैं। पांच साल से यहां किसी भी घर में शहनाई नहीं बजी। किडनी की बीमारी के डर से इस गांव में न कोई अपनी लड़की ब्याहना चाहता है और न ही यहां की लड़की को कोई बहू बनाकर अपने घर ले जाना चाहता है। हैरान करने वाली बात यह है कि किडनी की बीमारी की वजह से हर घर में एक महिला की मांग उजड़ चुकी है। खुशी छिन चुकी है। अपने परिवार के 17 सदस्य को किडनी की बीमारी से खो चुके त्रिलोचन सोनवानी ने बताया कि सरकार और स्वास्थ्य विभाग इसे राजनीतिक मुद्दा बनाकर वाहवाही लूटने में लगी है। चाहे पूर्व बीजेपी की सरकार हो या वर्तमान कांग्रेस की सरकार। त्रिलोचन सोनवानी पहले व्यक्ति हैं जो गांव के 12 व्यक्तियों को रायपुर के मैकाहारा अस्पताल में भर्ती करवाया। जिसमें सात लोगांे की मौत हो गई और पांच अपने गांव सुपेबेड़ा लौट आये। क्यों कि उन्हें मैकाहारा में दवाई खरीदने के लिए बाध्य किया जाता था और अस्पताल में खाना भी नहीं मिलता था।
मौत का गांव
सुपेबेड़ा आज मौत के गांव के नाम से जाना जाता है। यहां ऐसा कोई घर नहीं बचा जहां किडनी से मौत न हुई हो। महेन्द्र मिश्रा के पिता के पिता जलंधर मिश्रा की मौत किड़नी की बीमारी से हो चुकी है। 65 वर्षीय दामोदर मसरा की डेढ़ साल पहले रक्त परीक्षण में 4.4 पाॅजिटिव पाया गया। इनके भाई चैवन सिंह पत्नी शैलेन्द्र दामोदर की मौत 2018 में हो चुकी है। जलंधर मसरा भी किडनी रोग से ग्रसित है। अंकुर राम आडिल किडनी की बीमारी से ग्रस्त है। इलाज कराने के चक्कर में उसकी आधी जमीन बिक गई। देव प्रकाश पुरैना किडनी रोग में अपने पिता मोहन लाल पुरैना को 2016 में खो चुके हैं। घर में विधवा मां और बहन है। रोजगार का कोई साधन नहीं है। सरकारी आंकड़े के मुताबिक अब तक 74 लोगों की मौत हो चुकी है।
मशीनें हैं एक्सपर्ट नहीं
डाॅ रमन सिंह के कार्यकाल में दो साल पहले डायलिसिस मशीन राजधानी से सुपेबेड़ा के लिए भेजा गया था लेकिन, मशीन चलाने के लिए एक्सपर्ट डॉक्टर नहीं होने की वजह से इसका फायदा किसी भी मरीज को नहीं मिला। जिन मरीजों को डायलिसिस की जरूरत है उन्हें राजधानी रायपुर के डीकेएस हॉस्पिटल और रामकृष्ण केयर भेजा जाता है। डाॅ रमन सिंह की सरकार ने इस गांव को इस समस्या से उबारने की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की। बल्कि अलेक्जेड्राइड की खदानें अपने करीबी उद्योगपतियों को देकर पानी में विषैलों तत्वों में इजाफा किया। किडनी पीड़ितों के इलाज के लिए जो भी व्यवस्था की बात की वो सारे बेबुनियादी है। स्वास्थ्य व्यवस्था के नाम पर जो डायलिसिस मशीन भेजी गई, वो आज तक चालू नहीं हुई। दो बोर कराये गये लेकिन, उसका भी पानी संक्रमित है।
निशाने पर थी रमन सरकार
तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल 18 जून 2018 में किडनी की बीमारी से प्रभावित गांव सुपेबेड़ा का दौरा किया था। उन्होंने पीड़ित परिवारों से मुलाकात की और गांव के हालातों का जायजा लिया। सुपेबेडा के हालातों के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा था,’’ रमन सिंह विकास यात्रा छोड़कर सुपेबेडा आये और जो दूषित पानी यहां के लोग सालों से पी रहे है उसे पीकर दिखायें। सरकार सिर्फ वादे करती है पर कुछ करती नहीं है। सरकार ने लोगों को वादा तो बहुत किया लेकिन एक भी वादे पूरे नहीं कर सकी। फिर चाहे वो नदी से शुद्ध पेयजल मुहैया कराने का दावा हो या फिर गांव में ही मरीजों को डायलसिस की सुविधा उपलब्ध कराना हो। सरकार अपने किसी भी वादे को पूरा नहीं कर पायी है’’।
भूपेश वायदा भूले
हैरान करने वाली बात यह है कि तात्कालीन पीसीसी अध्यक्ष भूपेश बघेल ने चुनाव के वक्त इस गांव का दौरा करने के बाद एक एक घर से कहा था,’’ प्रदेश मंे कांग्रेस की सरकार बनी तो हर पीड़ित घर को दस लाख रूपये कर अनुदान और प्रभावित परिवार के प्रत्येक युवा को रोजगार दिया जायेगा’’। प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बने दस माह हो गये लेकिन मुख्यमंत्री बनने के बाद भूपेश अपना वायदा भूल गये हैं।
सरकार हरकत में आई
राज्यपाल अनसुइया उइके के सुपेबेडा गांव के दौरे के बाद सरकार हरकत में आई। स्वास्थ्य एंव पंचायत मंत्री टीएस सिंह देव ने यहां आकर बड़ी बड़ी घोषणा कर गये हैं। उन्होंने ग्रामीणों से हाथ जोड़कर इलाज के लिए रायपुर चलने कहा। अपना मोबाइल नंबर दिया और बोले अब शिकायत का अवसर नहीं मिलेगा। सुपेबेड़ा समेत आसपास के प्रभावित गांव मिस्टीगुड़ा, सेंधगुड़ा, खमारगुड़ा, खोकसरा, रेवापाली,सागौनबाड़ी,किरलीगुड़ा,फूलीगुड़ा,मोटापारा आदि सभी गांव की जिम्मेदारी हमारी है। उन्होंने कहा कि पूर्व सरकार में हुई चूक की मौजूदा सरकार पुनरावृत्ति नहीं करेगी। तीन माह के अंदर गांव से तीन किलोमीटर दूर तेल नदी से पाइप लाइन के जरिये गांव में पानी पहुंच जायेगा। जल्द अस्पताल खुल जायेगा। इसके अलावा विधवा महिलाओं के लिए कुटीर उद्योग खुल जायेगा। साथ ही बेरोजगार युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देकर रोजगार उपलब्ध कराया जायेगा’’। उन्होंने माना कि यहां उच्च स्तरीय शोध की आवश्यकता है, जिससे बीमारी के कारणों का पता लग सकेगा। उसके बाद ही इसका समाधान निकाला जा सकता है। सरकार की इस घोषणा का क्रियान्वयन कितना होता है यह वक्त बतायेगा। गांव के अंकुर राम आंडिल कहते हैं,’’ भूपेश बघेल ने गांवों वालों से जो वायदा कर गये थे,उसका क्या होगा’’।
क्रिएटिनिन लेबल 4 से ऊपर
डाॅ आशीष सिन्हा के नेतृत्व में डॉ चंद्रकांत दीवान, नेफ्रोलॉजिस्ट मनीष पटेल समेत पांच चिकित्सकों की टीम ने सुपेबेड़ा के रिमूवल प्लांट का पानी और खाद्य सामग्रियों के जांच में पाया कि पानी में कैडिमयम व क्रोमियम जैसे हैवी मेटल भारी मात्रा में है। वहीं 400 रक्त नमूने लिए गए जिसमें 256 किडनी की बीमारी से पॉजिटिव पाए गए हैं। हैरानी वाली बात यह है कि लिये गये ब्लड नमूने में ज्यादातर में क्रिएटिनिन लेबल 4 से ऊपर पाया गया है। किडनी में डेढ़ प्रतिशत क्रिएटिनिन का बढ़ना सामान्य माना ताता है। इससे अधिक क्रिएटिनिन का होना खतरनाक माना जाता है। लेकिन यहां के लोेगों को 23 पांइट तक क्रिएटिनिन पाया गया। यहां के पानी में फ्लोराइड,आर्सेनिक,क्रोमियम,केडिनियम,इसके अलवा एथेन और मिथेन जैसे रासायनिक तत्व अधिक मात्रा में पाये गये हैं।
हैंण्ड पंप का पानी जानलेवा
डाॅ आशीष सिन्हा किडनी रोग से ग्रसित मरीज 62 वर्षीय पूरनधर पुरैना ने बातें की तो उसने चैकाने वाला खुलासा किया। पुरैना ने बताया कि जब तक गांव वाले नदी व कुएं का पानी पी रहे थे, तब तक किसी को कोई बीमारी नहीं थी। लेकिन सरकारी हैंडपम्प से पानी पीना शुरु किया उसके बाद से ही यहां किडनी की बीमारी फैली। पानी में फ्लोराइड, आयरन, आर्सेनिक,क्रोमियम,केडिनियम,और दूसरे भारी तत्वों की अधिकता की वजह से लगभग सभी कि हड्डियां कमजोर हो गई हैं। दांत पीले और कई लोगों के कमर झुक गई है। कई लोग सीधे खड़े नहीं हो सकते। 2005 से 2018 तक किडनी बीमारी से मरने वाले परिजनों को संसदीय सचिव स्वेच्छानुदान से 20 हजार और मुख्यमंत्री से 50,50 हजार की सहायता राशि दी गई।
ग्रामीण मिलेंगे सीएम से
सुपेबेड़ा गांव की पहचान केवल छत्तीसग ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर एक किडनी प्रभावित गांव के रूप में रही है। गांव में अब तक किडनी की बीमारी से तत्कालीन सरकार ने ग्रामीणों की हर संभव मदद का दावा किया,लेकिन ग्रामीणों को इसका कोई लाभ नहीं मिला। कांग्रेस की सरकार बनते ही सुपेबेड़ा के लोगों में एक बार फिर बेहतर जीवन की उम्मीद जगी। भूपेश बघेल को उनका वादा याद दिलाने के लिए ग्रामीणों का एक प्रतिनिधिमंडल जल्द ही उनसे मिलने की तैयारी में है। छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस के सुप्रीमो अजीत जोगी ने कहा,’’ जब तक सुपेबेड़ा के दर्द का इलाज नहीं हो जाता राज्योत्सव नहीं मनाया जाना चाहिए।
बहरहाल मौत का गांव सुपेबेड़ा’’को इस नाम से निजात पाने में कितने दिन लगेंगे गांव वाले भी नहीं जानते। भूपेश सरकार इस गांव को जीवनदान देने की दिशा में क्या, क्या करती है,पूरे प्रदेश की नजर है।








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