0 रमेश तिवारी ‘‘रिपु’’
मिस्टर कोरोना तुम्हें थैंक्यू करने का मन कर रहा है। तुम्हारी वजह से पूरी दुनिया लाॅक डाउन होने से गुस्सा है, लेकिन करीब 50 से 75 हजार लोग प्रीमैच्योर मौत से बच गए। साफ,सुथरी हवा मिलने से 5 साल से कम उम्र के करीब 4000 बच्चे और 70 साल से नीचे के 51000 से 73000 वयस्कों की जिंदगी प्रदूषण नहीं होने की मुसीबत से बच गई।
तुम्हारी वजह सेे पूरी दुनिया को यह बात समझ में आई कि भारत नमस्ते क्यों करता आया है। शाकाहारी बने,तंदुरूस्त रहें। ऐसा कहने के पीछे,भारत का राज क्या है? तुम धन्यवाद के हकदार हो। तुम्हारी वजह से कई जगह गंगा का पानी निर्मल हो गया। जबकि गंगा को निर्मल करने के लिए चार हजार करोड़ रूपये से अधिक खर्च हो चुके हैं। लेकिन राम की गंगा मैली की मैली रही। लॉकडाउन से नदी में औद्योगिक कचरे की डंपिंग में कमी आई है। गंगा का पानी ज्यादातर मॉनिटरिंग सेंटरों में नहाने के लिए उपयुक्त पाया गया है।
हवाई सफर रूकने से कार्बन डाईऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड, बैंजीन आदि
गैसों के उत्सर्जन में 22 फीसदी की कमी आई है। हवा स्वच्छ हो गई। धरती की
ओजोन में बढ़ते छिद्र से वैज्ञानिक परेशान हो रहे थे। धरती गर्म होती जा रही
थी। लेकिन ऐसी सारी समस्या छू हो गई है। शिकायत रहती थी कि लोग अपने
बच्चों को,पति,पत्नी एक दूसरे को समय नहीं दे पाते थे। भाग दौड़ की जिन्दगी
में रिश्तों में दरार बढ़ गई थी। आज इसकी शिकायत किसी को नहीं है। आम आदमी
कहता था कि कानून का राज कब आयेगा? अब रोजनामचे में एफआईआर नहीं दिख रही
है। अपराधी किस बिल में घुस गये पुलिस को भी पता नहीं।
शहर से लेकर गांव तक खामोशी पसरी हुई है। इतनी खामोशी से जंगल के जानवर भी हैरान हो गए हैं। वे जंगल से शहर की सड़कों पर यह देखने निकल आए हैं कि आखिर हो क्या गया है। डायनासोर जिस तरह लुप्त हो गया है, कहीं आदमी भी लुप्त तो नहीं हो गए हैं? सड़कों पर मोर नाच रहे है। वो भी बेमौसम में। हिरण सड़कों पर धमाल कर रही हैं। हाथी झुंड के झुंड जंगलों से निकल कर शहरों में आ गए हैं। तुम्हारे आने से दहशत और मौत की एक तरफ तस्वीर है, तो दूसरी तरफ दुनिया की अदुभुत तस्वीर भी देखने को मिली।
शहर से लेकर गांव तक खामोशी पसरी हुई है। इतनी खामोशी से जंगल के जानवर भी हैरान हो गए हैं। वे जंगल से शहर की सड़कों पर यह देखने निकल आए हैं कि आखिर हो क्या गया है। डायनासोर जिस तरह लुप्त हो गया है, कहीं आदमी भी लुप्त तो नहीं हो गए हैं? सड़कों पर मोर नाच रहे है। वो भी बेमौसम में। हिरण सड़कों पर धमाल कर रही हैं। हाथी झुंड के झुंड जंगलों से निकल कर शहरों में आ गए हैं। तुम्हारे आने से दहशत और मौत की एक तरफ तस्वीर है, तो दूसरी तरफ दुनिया की अदुभुत तस्वीर भी देखने को मिली।


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