कांग्रेस के घोषणा पत्र में था कि सरकार बनने के दस दिनों के बाद संविदा स्वास्थ्य कर्मियों को नियमित कर दिया जाएगा। 13 हजार एनएचएम कर्मी हड़ताल पर हैं। पांँच हजार कर्मचारी इस्तीफा दे चुके हैं। कांग्रेसी विधायक इनकी हड़ताल को जायज ठहरा रहे हैं। लेकिन मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री में तनतनी की सियासत का शिकार हड़ताली कर्मी हो रहे हैं।
0 रमेश कुमार ‘‘रिपु’’
छत्तीसगढ़ कांग्रेस में सियासत की नई भंगिमा देखी जा रही है। यहांँ मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री के बीच 63 की बजाए 36 का सियासी रिश्ता है। कभी स्वास्थ्य मंत्री टी.एस सिंह देव कांग्रेस सरकार में दूसरे नंबर के मंत्री माने जाते थे,लेकिन अब उनकी गिनती किस नंबर में होती है,कांग्रेसी भी नहीं जानते। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल उन्हें बायें कर दिए हैं। उनका नाम सरकार की प्रवक्ता सूची से हटा दिया गया है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और स्वास्थ्य मंत्री टी.एस सिंह देव में सत्ताई टकराहट का शिकार राज्य के 13 हजार संविदा स्वास्थ्य कर्मी हो रहेे हैं। उन्नीस सितंबर से हड़ताल पर हैं संविदा स्वास्थ्य कर्मी। लेकिन स्वास्थ्य मंत्री टी.एस सिंह देव बात करने की बजाए हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। पाँच हजार एनएचएम कर्मी इस्तीफा दे चुके हैं। आने वाले समय में प्रदेश के सभी संविदा स्वास्थ्य कर्मी इस्तीफा दे देंगे। अन्य कर्मचारी संगठन ने सरकार को धमकी में कहा है कि यदि सख्त कार्रवाई किए तो उनके समर्थन में हम भी हड़ताल पर चले जाएंगे।
पूर्व मंत्री एवं बीजेपी विधायक बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि राज्य में बीस हजार कोराना टेस्ट हर दिन हुआ करते थे। संविदा कर्मियों की हड़ताल से अब टेस्ट की संख्या दस हजार के करीब पहुंँच गई है। सरकार को इनसे बातें करके समस्या का हल निकाला जाना चाहिए। इसलिए भी कि कांग्रेस के घोषणा पत्र में है कि सरकार बनने पर दस दिनों के अंदर इन्हें नियमित किया जाएगा। सरकार की हटधर्मिता जनहित में नहीं है।’’
छवि खराब करने की साजिश
कांग्रेस के एक नेता ने कहा,सरकार मतलब मुख्यमंत्री होता है। चूंकि टी.एस सिंह देव की सत्ता में जो स्थिति थी, अब वो नहीं रही। इसलिए वे मुख्यमंत्री से वे नाराज चल रहे हैं। उनकी छवि खराब करने के मकसद से वे चाहते हैं कि संविदा कर्मी हड़ताल पर रहे हैं। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल गोधन न्याय योजना और राजीव गांधी न्याय योजना के जरिए अपनी छवि आम आदमियों के बीच चाऊर वाले बाबा से बेहतर बनाने की रणनीति बनाई। ताकि वे अगली बार भी मुख्यमंत्री बन सकें। लेकिन हैरानी वाली बात है कि उनकी छवि जैसी बननी चाहिए, वैसी नहीं बन पाई। जो छवि बनी भी, उसे खराब करने एक खेमा पूरे जी जान से लगा हुआ है। कायदे से मुख्यमंत्री को स्वास्थ्य विभाग किसी युवा विधायक को देना चाहिए।’’
अन्य संगठनों का समर्थन
इस समय राज्य में एक लाख से अधिक कोराना मरीज हैं। सात सौ की जानें जा चुकी हैं। सरकारी अस्पताल में बेड खाली नहीं है। संविदा कर्मियों के हड़ताल से न केवल स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं बल्कि, कोरोना के चलते आम आदमी की जान संशय में है। स्वास्थ्य मंत्री की चुप्पी हैरानी वाली है ही ऊपर से उनका यह कहना की हड़ताल खत्म नहीं किए तो सभी को बर्खास्त कर दिया जाएगा।’’ उनके इस बयान पर अब हर जिले से इस्तीफा का सिलसिला शुरू हो गया है। वहीं छत्तीसगढ़ संयुक्त अनियमित कर्मचारी महासंघ, सर्व विभागीय संविदा कर्मचारी महासंघ, मनरेगा कर्मचारी संघ एवं विभिन्न कर्मचारी संगठनों ने हड़ताल का समर्थन कर सरकार की परेशानी बढ़ा दिये हैं। महासंघ के सचिव श्रीकांत लास्कर ने कहा, यदि हड़ताली कर्मचारियों पर किसी प्रकार की कार्रवाई की गई तो राज्य के समस्त संविदा कर्मचारी भी अनिश्चित कालीन हड़ताल करने बाध्य होंगे। समस्त विभागों में कार्यरत अनियमित संविदा दैनिक वेतन भोगी अधिकारी कर्मचारियों द्वारा 25 सितंबर से नियमितिकरण के समर्थन में काली पट्टी लगाकर काम कर रहे हैं।
विधायकों ने सीएम को लिखा पत्र
कांगे्रस के विधायकों ने संविदा स्वास्थ्य कर्मियों की हड़ताल का समर्थन कर सरकार को संशय में डाल दिया है। विधायक अरुण वोरा ने मुख्यमंत्री को पत्र में लिख कर कहा, पिछले 7 माह से कोरोना काल में संविदा स्वास्थ्य कर्मी लगातार सेवाएं देते आए हैं। कांग्रेस अपने जन.घोषणा पत्र में किए वायदे को न भूले।‘‘ इससे पहले बसपा विधायक इंदू बंजारे, सौरभ सिंह, विनय भगत भी सी.एम को पत्र लिख चुके हैं। जबकि राजनांदगांव विधायक दलेश्वर साहू और महापौर हड़ताल मंच पर पहुंँच कर समर्थन किया। वहीं भिलाई विधायक और मेयर देवेंद्र यादव ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा, 16 साल से 13000 संविदा कर्मचारी अपनी सेवाएं दे रहे हैं। कोरोना में भी उन्होंने 7 माह से निष्ठा पूर्वक सेवा दी है। इसके चलते कई कर्मचारी संक्रमित भी हुए हैं। इनको स्वास्थ्य और अन्य सुविधाएं भी नहीं मिली। ऐसे में इनकी मांगों पर विचार किया जाना चाहिए।’’
एफआईआर के आदेश
जांजगीर में एनएचएम के 300 कर्मचारियों ने इस्तीफा दिया। इसमें डॉक्टर भी शामिल हैं। फावड़ा लेकर बारिश में भीगते हुए सभी ने गोठान में गोबर उठाया। कर्मचारी बोले,गोबर बेचकर पैसा मुख्यमंत्री राहत कोष में जमा करेंगे। वहीं दूसरी ओर एनएचएम संचालक ने कर्मचारियों को 24 घंटे के भीतर ड्यूटी ज्वॉइन नहीं करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी। बावजूद इसके बिलासपुर में 350, कोरिया में 300, अंबिकापुर में 250 और सुकमा में 136 से ज्यादा कर्मचारियों ने इस्तीफा दे दिया।ं सरकार ने संघ के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत कुमार सिन्हा समेत 50 से ज्यादा कर्मचारियों को बर्खास्त कर, एफआईआर दर्ज करने के आदेश देकर चैका दिया है। बस्तर में चार कर्मचारियों पर एफआईआर दर्ज करने के आदेश वहां के सीएमएचओ ने दिए। बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता संजय श्रीवास्तव ने कहा, आंदोलनरत स्वास्थ्य कर्मचारियों को वेतन देने की बजाए सरकार कोरोना काल मेें बर्खास्तगी का फरमान दे रही है। बिना पीपी किट,दास्ताना दिए कोरोना का इलाज करने, डाॅक्टरों का कह रही है। सरकार लोगों की जिन्दगी से खेल रही है।’’
निकाली गई भर्ती, मांगे आवेदन
हड़तालियों की कमर तोड़ने बलौदाबाजार में जिला चिकित्सा अधिकारी ने संविदा के 18 पदों पर भर्तियां निकाली। इनमें 6 ब्लॉक प्रोग्राम मैनेजर 6 ब्लॉक अकाउंट मैनेजर 6 ब्लॉक डाटा मैनेजर का पद शामिल है। वॉट्सऐप वीडियो कॉल के जरिए इंटरव्यू लिया जाएगा। सीएमएचओ मीरा बघेल ने कहा, रायपुर जिले में 700 संविदा स्वास्थ्यकर्मी हैं। इसमें से 150 हड़ताली कर्मचारियों की लिस्ट अभी उनके पास आई है। इसमें उन्होंने काम बंद करने की बात कही है। वैकल्पिक व्यवस्था कर काम किया जाएगा। कोई काम नहीं रुकेगा। थोड़ा प्रभावित जरूर होगा।’’
जनता की जान जोखिम मेंः जोगी
संविदा कर्मचारियों के समर्थन में जोगी कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अमित जोगी ने कहा,कोरोनाकाल में काम के कर्मचारियों को निकालने का मतलब जनता की जान जोखिम में डालना और अपने पैर पर कुल्हाड़ी मारना है। सरकार में यदि थोड़ी सी भी नैतिकता है, तो बीते 6 माह से कोरोना से लड़ने वाले इन कोरोना योद्धाओं को नोटिस के बजाय नियमितीकरण का आदेश जारी कर इनका सम्मान करें। आम आदमी पार्टी के बस्तर जिला अध्यक्ष तरुणा बेदरकर ने स्वास्थ्य मंत्री टी एस सिंहदेव की मार्मिक अपील को भावुक अत्याचार कहा है। इसी महामारी काल में छत्तीसगढ़ सरकार संसदीय सचिवों की नियुक्ति की, विधायकों का पेंशन बढ़ाया तो इस महामारी काल मे 24 घण्टे डयूटी देने वाले इन कर्मियों को नियमित करने में क्या परेशानी है? कायदे से दिल्ली की तर्ज पर कोरोना वारियर्स की मौत हो जाती है तो उनके परिवार को 1 करोड़ रूपये मुआवजा देना चाहिए।‘‘
अपना वायदा छोड़ा नहींः सिंहदेव
स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने वीडियो जारी कर कहा है कि घोषणा पत्र के अपने वादों को हमने छोड़ा नहीं है। मुझे लगता है कि यह समय हड़ताल में जाने का नहीं है। नियम कानून अपनी जगह होते हैं। प्रश्न कार्रवाई का नहीं है, प्रश्न आपके विवेक का,आपकी समझदारी का है।’’
बहरहाल संविदा कर्मी अपनी हड़ताल को ताकत बना लिए हैं,वहीं सरकार में बैठे लोग अपने वायदे को अमल में लाने की बजाए एक दूसरे की आस्तीन खींचने की सियासत में लीन है। सवाल यह है कि प्रदेश कोरोना काल में विषम स्थिति के दौर से गुजर रहा है। यदि प्रदेश के सभी संगठन हड़ताल पर चले गए तो क्या होगा,इस को ध्यान में रखकर सरकार को जल्द फैसला करना चाहिए।








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