मरवाही विधान सभा उप चुनाव से तय होगा कि भूपेश बघेल मुख्यमंत्री के रूप में राज्य में कितना लोकप्रिय हैं। अमित जोगी और उनकी पत्नी ऋचा जोगी का नामांकन रद्द होने से बीजेपी और कांग्रेस के बीच सीधी मुकाबला है। पहली बार मरवाही विधान सभा के चुनावी समर में जोगी परिवार नहीं रहेगा। सवाल यह है कि, क्या कांग्रेस को मात देने, अमित जोगी बीजेपी का साथ देंगे?
0 रमेश कुमार ‘रिपु’’
छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकार को कोई फर्क नहीं पड़ेगा मरवाही विधान सभा उप चुनाव हारने या जीतने से। क्यों कि कांग्रेस के 68 विधायक हैं। राज्य में यह पहला उपचुनाव है। यह चुनाव तय करेगा कि भूपेश बघेल राज्य में कितना लोकप्रिय हैं। यदि कांग्रेस यह सीट हार जाती है, तो स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंह देव को मौका मिल जाएगा कहने को कि, भूपेश बधेल की लोकप्रियता गिर गई है। अजीत जोगी की मृत्यु के बाद यह सीट खाली हुई है। राज्य बनने के बाद से अब तक मरवाही विधान सभा में जोगी परिवार का ही कब्जा था। यह पहला अवसर है, जब छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद पहली बार अजीत जोगी के बिन चुनाव हो रहा है। भूपेश बघेल और अजीत जोगी के बीच 36 का सियासी रिश्ता था। अमित जोगी को कांग्रेस से निकाले जाने के बाद अजीत जोगी दूसरी पार्टी छजका बनाई। इस पार्टी के पांच विधायक थे। अब चार रह गए। छजका के प्रदेश अध्यक्ष अमित जोगी हैं। मरवाही सीट खाली होने पर मुख्यमंत्री ने सारी व्यवस्था बना ली थी। मरवाही विधान सभा को प्रदेश का 29 वां जिला घोषित कर दिया। नगर पंचायत मरवाही को नगर पालिका बना दिया। पूरा प्रशासनिक अमला अपने मन माफिक तैनात कर दिया।
जोगी परिवार का नामांकन रद्द
अजीत जोगी दो दशक तक राजनीतिक आदिवासी बनकर राजनीति की। निधन के साथ ही उनकी जाति का मामला भी खत्म हो गया। भूपेश सरकार एक झटके में अमित जोगी की जाति के मामले का अंत कर दिया। मरवाही विधान सभा के उपचुनाव में अमित जोगी और उनकी पत्नी ऋचा जोगी का नामांकन जिला निर्वाचन अधिकारी ने रद्द कर दिया। अमित जोगी के नामांकन में आपत्ति कांग्रेस के अलावा गोंडवाना गणतंत्र पार्टी की ओर से उर्मिला मार्को और निर्दलीय प्रताप सिंह भानू ने की थी। तीनों ही के पास राज्य स्तरीय छानबीन समिति के उस आदेश की कॉपी थी, जिसमें अमित जोगी का जाति प्रमाण पत्र निरस्त किया गया था। 17 अक्टूबर को करीब दो घंटे चली दावा,आपत्ति पर सुनवाई के बाद रिटर्निंग आफिसर डोमन सिंह ने ऋचा जोगी का भी पर्चा रद्द करते हुए कहा,पर्चा विधि मान्य नहीं है। छानबीन समिति ने जांच में पाया कि उनके पास अनुसूचित जन जाति का वैध प्रमाण पत्र नहीं था। मुंगेली जिला की जाति सत्यापन समिति ने पत्नी ऋचा जोगी का प्रमाणपत्र निलंबित कर दिया है। मरवाही उप चुनाव के 19 प्रत्याशियों के नामांकन पर दावा आपत्ति की जाँच में सबसे ज्यादा समय अमित जोगी पर लगा। 120 मिनट चली बहस में अमित 90 मिनट बोले।
नकली आदिवासी थे जोगी
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा,‘‘ भाजपा ने नकली आदिवासी के मुद्दे पर चुनाव लड़ा और सत्ता में आए। पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ने जाति मामले में पूरे 15 साल लगा दिए और उसी के दम पर सत्ता हासिल की। जोगी की जाति के संबंध में उनकी ही शिकायत थी। सभी जानते हैं कि किस प्रकार से उनकी जुगलबंदी रही है। अनुसूचित जनजाति के नाम पर बहुत से लोग फर्जी सर्टिफिकेट बनाकर नौकरी करते हैं। शिकायत होती है, तो स्टे लेकर सालों तक फायदा उठाते रहते हैं। अब फैसला आया, तो भाजपा को इसका स्वागत करना चाहिए।‘‘
यह षडयंत्र हैः डाॅ रमन
पूर्व मुख्यमंत्री डाॅ रमन सिंह ने कहा कि षडयंत्र के तहत अमित जोगी का नामांकन रद्द किया गया है। 18 अक्टूबर को अमित जोगी ने फैसला किया कि वे मरवाही विधान सभा में न्याय यात्रा निकालेंगे। उन्होंने कहा मुझे पूरा विश्वास है की मरवाही अजित जोगी और उनके परिवार के साथ हो रहे इस अन्याय के खिलाफ न्याय जरूर करेगा। कुछ लोग इस गलत फहमी मे हैं की जोगी परिवार को चुनाव लड़ने से रोक कर, उन्होंने जोगी परिवार को खत्म कर दिया है। पर मैं उन्हें कह देना चाहता हूँ की ये पिक्चर का अन्त नहीं है, पिक्चर अभी बाकी है। वहीं विधायक रेणू जोगी अपने एक वीडियो में लोगों से कह रही हैं बेटे अमित जोगी को नामांकन साजिश के तहत रद्द किया गया है। अन्याय हुआ है। अब आप लोगों को बदला लेना है।
एससी थे अजीत जोगी के पिता
पूर्व गृह मंत्री ननकीराम कंवर कहते हैं अजीत जोगी जिस महिला को अपनी मांँ बताया करते थे, वह उनकी वास्तविक माँं नहीं थी। जोगीसार गांँव का जब मै प्रभारी था, दौरा किया करता था। जिसे वे अपनी माँं बताते थे उसके पिता ने बताया था कि इसकी शादी नहीं हुई है। यानी जोगी कंवर जाति के नहीं थे। अजीत जोगी के पिताजी अनुसूचित जाति के थे। सतनामी या कोई दूसरे जाति के। इसलिए भी उस समय भी ज्यादा कुछ नहीं बोला क्यों कि कोर्ट में मामला चल रहा था। अब जाति प्रमाण पत्र निरस्त हुआ है, तो मेरे हिसाब से सही हुआ है। आज भी मैं कह सकता हूंँ कि, वे कंवर ब्लड के है ही नहीं। वैसे जोगी सरनेम कंवर जाति में नहीं होता है। उनके पिताजी अनुसूचित जाति की थी।
पूरा सरकारी तंत्र मरवाही में
इस समय आधा दर्जन मंत्री और संसदीय सचिव से लेकर पूरा प्रशासनिक अमला मरवाही विधान सभा में डेरा जमाए हुए है। अमित जोगी का नामांकन खारिज होने के बाद, अब बीजेपी और कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर हैं। मरवाही विधान सभा उपचुनाव से कांग्रेस की टिकट से डाॅक्टर डाॅ कृष्ण कुमार धु्रव और बीजेपी से डाॅ गंभीर सिंह हंै। तीन नवम्बर को मतदान है। 10 नवम्बर को परिणाम आयेगा। भाजपा जहांँ पहले चुनाव में पिछे चल रही थी, अचानक से सामने आ गई। अब लड़ाई कांग्रेस और भाजपा में आमने सामने की हो गई। वैसे इस समय सबसे चर्चा का विषय जनता कांग्रेस के दिग्गज नेता धरमजीत सिंह को लेकर हो रही है कि, आखिर वो हैं कहां। वहीं भूपेश बधेल डाॅ के के सिंह का नामांकन भरवाने आए, लेकिन टीएस सिंह देव नहीं आए। उन्हें इस चुनाव से दूर रखा गया है।
रेणू की अपील बेकार गई
मरवाही विधान सभा में छजका के कार्यकत्र्ता बहुत हैं। आदिवासी समाज के लोग हैं। अमित जोगी भावानात्मक कार्ड खेल सकते हैं। जिला बनने से लोग खुश हैं लेकिन, अमित जोगी का नामांकन खारिज होने से नाराजगी भी देखी जा रही है। इससे पहले रेणू जोगी ने अपील की थी कि, कांग्रेस को अपना उम्मीदवार मरवाही में नहीं खड़ा करना चाहिए। जिस तरह यूपी में सपा और बसपा सोनिया गांधी के खिलाफ अपना उम्मीदवार नहीं उतारती है। वैसा ही यहां भी करना चाहिए। भूपेश बघेल कहना था कि इस मामले पर निर्णय पार्टी हाईकमान ही ले सकता है,हम नहीं।
अर्चना कांग्रेस में शामिल
मरवाही उपचुनाव से पहले भाजपा को बड़ा झटका लगा है। भाजपा के पूर्व विधायक प्रत्याशी रही अर्चना पोर्ते और ध्यान सिंह पोर्ते कांग्रेस में शामिल हो गई हैं। साल 2018 में अर्चना पोर्ते ने पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के खिलाफ चुनाव लड़ी थीं। दूसरे नंबर पर थी भाजपा 2008 में। ध्यान सिंह पोर्ते भी भाजपा प्रत्याशी रह चुके हैं। अर्चना पोर्ते ने कहा, कुछ लोग 20 साल से आदिवासियों का हक और अधिकार छीनकर बैठे थे। लेकिन उन्होंने 20 साल से मरवाही का विकास नहीं किया। मरवाही की जनता के बारे में नहीं सोचा। इन लोगों ने जज्बातों से खेला, उन्हें ठगा। इस चुनाव में उन्हें मरवाही से बाहर करेंगे।
बहरहाल कांग्रेस विकास कार्य और जिला बनाने के दम पर, तो भाजपा कांग्रेस सरकार की विफलता को लेकर जनता के बीच है। कांग्रेस वहांँ पूरी ताकत झोंक दी है जबकि, भाजपा किसी भी तरह नहीं चाहेगी की कांग्रेस वहांँ जीत दर्ज करे। सवाल यह है कि अमित जोगी अपनी न्याय यात्रा के जरिये जनता से बदला लेने के लिए किसे वोट देने की अपील करेंगे? सबकी नजर है। वैसे वे सार्वजनिक रूप से बीजेपी को वोट देने की अपील नहीं करेंगे। लेकिन इसकी संभावना ज्यादा है कि, वे बीजेपी को वोट देने की गोपनीय तरीके से बात कर सकते है
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