पंजाब चुनाव जीतने के बाद आप की नजर अब छत्तीसगढ़ पर है। छत्तीसगढ़िया को साधने की उसकी रणनीति से सवाल यह है कि ‘आप’ किसकी सियासत को करेगी हाफ।
0 रमेश कुमार ‘रिपु’
छत्तीसगढ़ में भी पंजाब,दिल्ली की तरह आम आदमी पार्टी के सुप्रीमो केजरीवाल अपनी पार्टी की लोकप्रियता को ऊंचाई तक पहुंचाने के लिए सियासी दांव खेलकर हलचल मचा दिये हैं। आप ने राज्य सभा में डाॅ संदीप पाठक को भेज कर राज्य की जनता का ध्यान अपनी ओर खींचा है। सवाल यह है कि धर्म और वर्ग आधारित राजनीति क्या अगले चुनाव में काम आयेगी? भूपेश सरकार शहरी संस्कृति की राजनीति करती है। नित्य नये इवेंट के जरिये मीडिया की सुर्खियां बनीती है। प्रदेश में बीजेपी सक्रियता की तपिश तेज नहीं है। लेकिन भूपेश सरकार की कमियों पर मीडिया में कटाक्ष करने से पीछे नहीं हटती। जोगी कांग्रेस अपना सियासी वजूद बचाने में लगी है। ऐसे सियासी हालात में आप अपने सधे सियासी तंत्र और मंत्र के दम पर तीसरा विकल्प बनने का दावा कर रही है। वैसे उसके पास ऐसा कोई बड़ा चेहरा नहीं है,जिसे सामने करके वह चुनाव फतह कर सके। इसलिए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और स्वास्थ्य मंत्री टी.एस.सिंह देव जो कि कांग्रेस में असंतुष्ट हैं,आप के नेता उनसे मुलाकात कर कांग्रेस की दीवार में सुराग बनाने की कोशिश की।
आप के नेताओं की उनसे हुई मुलाकात को उन्होंने पर्दे के पीछे नहीं रखा,बल्कि उसे सियासी पत्थर बनाकर फेंका। ताकि वह पत्थर दस जनपथ जाकर गिरे। उन्होंने मीडिया से कहा आप के कुछ नेता उनसे मिलने आये थे। बीजेपी मुझे सी.एम कभी नहीं बनायेगी, इसलिए बीजेपी में जाने का सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने स्पष्ट किया, कि इस मुलाकात को किसी और अर्थ में न लिया जाए। वे कांग्रेसी हैं और आजीवन कांग्रेस में रहेंगे।’’ लेकिन एक सच यह भी है, कि राजनीतिक व्यक्तियों की कथनी और करनी में हमेशा अंतर रहता है। चूंकि देश भर में कांग्रेस की सियासी सेहत ठीक नहीं है। लिहाजा माकूल वक्त पर कोई बड़ा उलटफेर होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। जिस तरह सरकार के खिलाफ टी.एस सिंहदेव के बयान आते रहे हैं,जानकारों का कहना है,कांग्रेस की बी टीम सिंहदेव बना सकते हैं। वैसे भी आप को कांग्रेस का विकल्प देश की जनता मानती है। तभी तो पंजाब में कांग्रेस पर नहीं ‘आप’ पर भरोसा जनता ने किया। वैसे टी.एस.सिंह देव के विकल्प बतौर आप ने छत्तीसगढ़िया को लुभाने कांकेर के भानुप्रतापपुर से युवा नेता कोमल हुपेंडी का मुख्यमंत्री घोषित किया है। गौरतलब है,कि प्रदेश में बाहरी बनाम छत्तीसगढ़िया और आदिवासी मुख्यमंत्री बनाने की अर्से से मांग उठ रही है।
आप के मंसूबे बड़े
आप ने 2018 के विधान सभा चुनाव में 85 सीटों में अपने उम्मीदवार खड़े कर अपनी उपस्थिति प्रदेश में दर्ज कराई थी। उसे मात्र 123535 वोट मिले थे। उसके सभी उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई थी। आम चुनाव के डेढ़ साल पहले आप की सक्रियता से जाहिर है, कि उसके मंसूबे बड़े हैं। साल 2023 में होने वाले विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने बघेल सरकार को कड़ी टक्कर देने के लिए सदस्यता अभियान की शुरुआत कर दी है। पार्टी का दावा है कि सभी 33 जिलों से लोग आम आदमी पार्टी से जुड़ रहे हैं। राज्य में ‘आप’ना सिर्फ बघेल सरकार बल्कि भाजपा को भी चुनौती देने की रणनीति बना रही है। आप के मैदान में आने से यहां मुकाबला त्रिकोंणीय हो सकता है। छत्तीसगढ़ आम आदमी पार्टी यूथ विंग के प्रदेश अध्यक्ष तेजेंद्र तोड़ेकर ने कहा,यहां की जनता ने पन्द्रह साल डॉ रमन सरकार और अब भूपेश बघेल सरकार को भी देख ली हैं। प्रदेश की जनता अब बेहतर विकल्प के रूप में आम आदमी पार्टी को देख रही है।’’
तीसरा विकल्प बनने की चाह
पार्टी के गुजरात प्रभारी छत्तीसगढ़ निवासी सांसद डाॅ संदीप पाठक, प्रदेश प्रभारी संजीव झा और दिल्ली की आप सरकार के मंत्री गोपाल राय के हाल ही के छत्तीसगढ़ दौरे से पार्टी अपने आप को तीसरे विकल्प के रूप में पेश करना चाहती है। आप का डेढ़ वर्ष में संगठन के विस्तार के साथ गांव-गांव में जन संवाद के जरिये लोगों तक पैठ बनाना मुख्य एजेंडा है। छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद से यहां दो ही पार्टियांे के बीच सियासी द्वंद होता आया है। फिर भी वोटों का बंटवारा जाति आधार पर बनी पार्टियों में सपा बसपा, गोंडवाना गणतंत्र पार्टी, जदयू व वामपंथी दलों के बीच होता रहा है। छोटी पार्टियां ज्यादा उभर नहीं पाईं। लेकिन 2016 में गठित जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ ने 2018 के चुनाव में पांच सीटें जीतकर कुछ जगह बनाई थी। आज उसकी पार्टी के तीन विधायक हैं। अजीत जोगी की वर्ष 2020 में निधन के बाद तीसरी पार्टी की संभावनाएं भी खत्म हो गई।
छोटे राज्यों पर नजर
‘आप’ अपनी सियासी जमीन उन राज्यों में बनाना चाहती है जो छोटे राज्य हैं। दिल्ली में 2013 से आप की सरकार है। गोवा में पिछले चुनाव में दो सीट जीती। धीरे-धीरे पार्टी गोवा, गुजरात, हरियाणा,झारखंड, कर्नाटक, मध्यप्रदेश,महाराष्ट्र, ओडिशा, मेघालय, नागालैंड, राजस्थान, तेलंगाना, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़ व उत्तरप्रदेश में संगठन खडा करने की कोशिश की। आप ने पंजाब में 2017 के चुनाव में बीस सीटें जीतकर मुख्य विपक्षी पार्टी बनी। कुछ ही महीने पहले सम्पन्न हुए विधान सभा चुनाव में पार्टी ने 117 में से 92 सीटें जीती। यह जीत उसे गुजरात, हिमाचल प्रदेश के बाद छत्तीसगढ़ में होने वाले विधानसभा चुनाव की ओर मोड़ दिया है।
वहीं सियासी हल्कों में चर्चा है,कि 2023 के चुनाव में ‘आप’ की वजह से जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़,बीजेपी और कांग्रेसी तीनों को सियासी नुकसान होने की आशंका है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि डाॅ रमन सिंह के 15 साल की सत्ता से उपजी एंटीइनकबैसी कांग्रेस कहांँ से लायेगी? भूपेश सरकार की ज्यादातर अच्छी योजनायें दिल्ली सरकार की कापी है। भूपेश सरकार का नारा है गढ़बों नवा छत्तीसगढ़,वहीं आप का नारा है बदलबों छत्तीसगढ़। जाहिर सी बात आप के मुखिया छत्तीसगढ़ में अपने चुनावी घोंषणा पत्र में पंजाब जैसी बातों का जिक्र करेंगे। राज्य की जनता उससे मोहित हो कर करवट बदली सकती है।
जनता बदलाव चाहती है-राय
बीजेपी का एंटी वोटर कांग्रेस को वोट करता है। कांग्रेस सत्ता में सिर्फ एंटी इनकमबेसी की वजह से उसे वाक ओवर पिछली दफा मिला। लेकिन केन्द्र में बीजेपी की सरकार है। उसके पास लीडर हैं। कांग्रेस अंदर से कमजोर हो गई है। आर्थिक रूप से भी कमजोर है। बीजेपी के सारे बड़े लीडर छत्तीसगढ़ भूपेश सरकार की घेराबंदी करेंगे। वहीं कांग्रेस सरकार इन पाँच सालों में प्रदेश को और कर्जदार बना देगी। जैसा कि आप’ के मंत्री गोपाल राय कहते हैं,गोपाल राय कहते हैं,छत्तीसगढ़ में किसी भी संसाधन की कमी नहीं है बावजूद उसके सरकार को कर्ज लेकर सरकार चलानी पड़ रही है क्योंकि सरकार की इच्छा शक्ति कमजोर है और प्रदेश में भ्रष्टाचार का बोलबाला है। सरकार पर लगभग 1 लाख करोड़ का कर्ज है। प्रदेश में माइनिंग माफियाओ का राज है। सरकारी कर्मचारी सरकार से नाराज हैं। प्राइवेट स्कूल वालों ने प्रदेश में शिक्षा को धंधा बना लिया है। कांग्रेस और भाजपा मिले हुए हैं वो सिर्फ जनता को धोखा दे रहीं हैं। जनता के पास अब केजरीवाल के रूप में विकल्प मिल गया है। प्रदेश प्रभारी संजीव झा ने कहा छत्तीसगढ़ में जनता अब बदलाव चाह रही है। इस बार बदलाव जरूर होगा। जाहिर सी बात है कांग्रेस और बीजेपी के असंतुष्ट लोगों पर ‘आप’ की नजर रहेगी।
चूंकि बीजेपी प्रदेश में विपक्ष में होने के बाद भी उतनी सक्रिय नहीं है,जितनी होनी चाहिए। कांग्रेस को अपने वर्तमान विधायकों में आधे से अधिक की टिकट नहीं काटी तो कांग्रेस की वापसी पर ग्रहण लग सकता है। क्यों कि कांग्रेस के विधायकों का काम काज से जनता खुश नहीं है। राजनीति में जनता की सोच वक्त के साथ बदलती रही है। आप को जनता विकल्प के रूप में स्वीकार्य भी सकती है।
आप तीसरा विकल्प क्यों है सवाल पर सांसद संदीप पाठक कहते हैं,दरअसल हमने लगातार कांग्रेस को हराया है। आने वाले समय में दूसरी पार्टियों को भी हराएंगे तब क्लियर होगा कि हम देश का पूरा विकल्प बनने वाले हैं।‘ बहरहाल अपने आप में उलझी कांग्रेस एंटी इनकम्बेंसी से जूझ रही है तो बीजेपी के लिए रमन सिंह का विकल्प ढूंढना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में आप बेहतर रणनीति के साथ चुनावी मैदान में उतरी तो इन दोनों पार्टियों की उम्मीदों पर झाड़ू चला सकती है।




No comments:
Post a Comment