Saturday, August 27, 2022

अच्छे दिन के लिए चाहिए जादू




नोटबंदी के बाद भी लोग अपनी काली कमाई की न कर पाएं सफाई इसके लिए जादू चाहिए। देश की पीलियाग्रस्त अर्थव्यव स्था को जादू चाहिए,ताकि वो दौड़ सके। देश को जादूगर चाहिए जो एक पल में महंगाई की ऊचांई को कम कर दे। कंगाल हो रहे बैंकों को मालामाल कर दे। घाटे में चल रहे देश के 27 राज्यों और सार्वजनिक संस्थाओं में पैसे का बूम आ जाये।इसके लिए जादू चाहिए।

0 रमेश कुमार ‘रिपु’

  देश ईडी,सी.बी.आई.और आईटी के छापे से नहीं चलता। विपक्ष के सड़क पर उतरने से भी देश नहीं चलता। चुनाव में  करोड़ों रुपये फूंक देने से भी देश नहीं दौड़ता। विधायकों की खरीद फरोख्त से किसी पार्टी की राजनीति का हेमेग्लोबिन ठीक हो सकता है। टांग खिंचाई राजनीति से सरकार गिर सकती है,बन सकती है,मगर इससे अर्थ व्यवस्था की धड़कन ठीक नहीं हो सकती। बातों के जलपान से जनता खुश हो सकती है,मगर कंगाल हो रहे बैंक के चेहरे पर चमक नहीं लौट सकती। लोकतंत्र के लिए राजनीति चाहिए,मगर देश को चलाने के लिए लंका जैसी अर्थव्यवस्था नहीं चाहिए। इस समय देश की अर्थव्यवस्था लंका जैसी नहीं है,मगर लंका जैसी होने को हैं। इससे बचने के लिए देश को जादू चाहिए। एक ऐसा जादूगर चाहिए,जो नोटबंदी के बाद भी अपनी काली कमाई की सफाई करने वालों को पकड़ सके। यानी काले धन की सफाई के लिए जादू चाहिए। देश की पीलियाग्रस्त अर्थव्यवस्था को जादू चाहिए,ताकि वो दौड़ सके। देश को जादूगर चाहिए,जो एक पल में महंगाई की ऊचांई को कम कर दे। कंगाल हो रहे बैंको को मालामाल कर दे। घाटे में चल रहे देश के 27 राज्यों और सार्वजनिक संस्थाओं में पैसे का बूम आ जाये। इसके लिए जादू चाहिए।

सवाल ये है,कि राजनीति के किस जेब में जादू की छड़ी है? क्यों कि महंगाई और बढ़ती बेरोजगारी के खिलाफ कांग्रेस सड़कों पर उतरी,तो वजीरे आजम को कहना पड़ा,कि पांच अगस्त को कुछ लोग काले जादू की ओर मुड़ते नजर आए। देश ने देखा कैसे काला जादू फैलाने का प्रयास किया गया। काला जादू पर जो विश्वास करते हैं,वे कभी लोगों का विश्वास नहीं जीत पायेंगे। काला,पीला,सफेद किसी भी रंग का जादू हो,देश के कृषि क्षेत्र को भी चाहिए। क्यों कि जून 2022 में कृषि सेक्टर में 1.3 करोड़ लोग रोजगार से हाथ धो बैठे।ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी दर मई में 6.62 फीसदी थी,जो बढ़कर जून 2022 में 8.03 फीसदी हो गई। वहीं शहरी बेरोजगारी दर एक माह पहले 7.12 थी,जो अब 7.30 प्रतिशत है। बढ़ती बेरोजगारी को रोकने और वेतनभोगी कर्मचारियों को भी जादू चाहिए। जून 2022 में 25 लाख नौकरियों में गिरवाट आई। बढ़ती बेरोजगारी पर राज्य सरकारों ने हाथ खड़े कर दिये हैं। हरियाणा में 30.7 फीसदी,राजस्थान में 29.9 फीसदी, असम में 17.4 फीसदी, जम्मू-कश्मीर में 17.4 फीसदी और बिहार में 18 फीसदी से ज्यादा लोग बेरोजगार हैं। देश में दिसम्बर 2021 तक बेरोजगार लोगों की संख्या 5.3 करोड़ थी। जिसमें 1.7 करोड़ महिलायें हैं। आज जादू 3.8 करोड़ लोगों को चाहिए,जो लगातार काम तलाश रहे हैं। केन्द्र में बीजेपी के आठ साल के कार्यकाल में 22 करोड़ लोगों ने नौकरी के लिए आवेदन किया और मात्र 7 लाख 22 हजार लोगों को नौकरी मिली। बावजूद इसके नौकरी के साथ ही शिक्षा क्षेत्र में भी जादू चाहिए।

आम व्यक्ति की नजर में देश की सबसे बड़ी समस्या मंहगाई है,उसके बाद बेरोजगारी। गरीबी तीसरे नम्बर पर है। सरकार अपनी पीठ थपथपा रही है, कि जून में खुदरा महंगाई दर में मई की तुलना में 0.3 फीसदी की कमी आई है। यानी महंगाई दर 7.01 फीसदी है। जबकि जीएसटी अब कई वस्तुओं में लग जाने से महंगाई दर 7.08 हो गई है। डाॅलर के मुकाबले गिरते रुपये ने अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने का काम और कठिन कर दिया है। डालर महंगा होने से आयात महंगा होता जा रहा है। जिसका असर घरेलू बाजार पर दिख रहा है। तुअर की जो दाल जून में सौ रुपये किलो थी, वो अगस्त में 120-130 रुपये किलो मिल रही है। आरबीआई का कहना है,महंगाई कम करना है तो लोग खरीददारी कम कर दें। यानी आरबीआई को भी जादू चाहिए। इसलिए कि लोन लेेने वालों के  ब्याज दर में कटौती नहीं हो सकती। सरकार यह यकीन दिलाने की कोशिश कर रही है,कि जादू चल जायेगा। जबकि आरबीआई हाथ खड़े कर दिया है। क्यों कि सरकार ने उद्योगपतियों के ग्यारह लाख करोड़ रुपये माफ कर दी है। बैंक कंगाल हो रहे हैं,रुपया आ नहीं रहा हैं। बैंक घाटे पर चल रहे हैं। क्यों कि आरबीआई रेपो रेट बढ़ाने की स्थिति में नहीं है। यानी निवेश करने वालों को ज्यादा ब्याज देने की स्थिति में नहीं है। जिससे निवेशक अपना डालर निकाल कर वहां निवेश करने लगे हैं,जहां उन्हें अधिक ब्याज मिल रहा है। जिसके चलते रुपया लगातार कमजोर हो रहा है,वहीं आयात बढ़ने से महंगाई बढ़ रही है। आरबीआई ने सरकार को लाभ पहुंचाने के लिए कोविड के समय ज्यादा रुपये छाप दिये,ताकि कर्ज लेने में दिक्कत न आये। और उसके चलते भी महंगाई बढ़ गई। बैंक को भी जादू चाहिए ताकि पैसा आ जाये। महंगाई पर नकेल लग जाये, ऐसा जादू चाहिए। 

केन्द्र सरकार ने 1568 प्रोजेक्ट की घोषणा की है। लेकिन रुपये नहीं होने से प्रोजेक्ट अधूरे हैं या फिर चालू ही नहीं हुए। पेट्रोलियम मंत्रालय के 149 प्रेाजेक्ट में 91 अटक गये हैं। रेल मंत्रालय के 211 प्रोजेक्ट में 127 अटके पड़े हैं। सड़क परिवहन के 843 प्रोजेक्ट में 301 अटके पड़े हैं। स्थिति यह है,कि 22 लाख करोड़ के प्रोजेक्ट की फंडिग की व्यवस्था नहीं होने से प्रोजेक्ट की लागत बढ़कर 26 लाख करोड़ हो गई हैं। यदि ये सभी प्रोजेक्ट 2024 तक पूरे नहीं हुए तो इनकी लागत 30 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो जायेगी। जाहिर सी बात है प्रोजेक्ट जल्द पूरे हो जायें इसके लिए भी जादू चाहिए। 

सरकार को यकीन है कि 2024 में भी जादू चलेगा। चुनाव जीतने का जादू उसके पास हो सकता है। भले वजीरे आजम रेवड़ी कल्चर का विरोध करते हैं,लेकिन यूपी में योगी ने दोबारा सरकार बनाने के लिए दिल खोलकर रेवड़ी बांटी। पांँच किलो मुफ्त अनाज बांटने में यूपी में 40-42 हजार करोड़ रुपये खर्च हुआ। बिहार में 22 हजार करोड़ रुपये,पश्चिम बंगाल में 19 हजार करोड़ रुपये उत्तराखंड में 2000 करोड रुपए और झारखंड में नौ हजार करोड़ रुपये। आगे भी मुफ्त अनाज बांटने के लिए रुपये चाहिए,बगैर जादू के कैसे होगा,आरबीआई को भी पता नहीं। सरकार को कर्मचारियों के वेतन, पेशन,अदालत के भवनों के अलावा अन्य सरकारी दफ्तरों का किराया देने के लिए जादू चाहिए। 

देश की अर्थव्यवस्था पटरी पर भले न आये मगरं देश-विदेश में घूमने के लिए नौ हजार करोड़ रुपये जहाज के लिए खर्च हो गया। देश की पेट्रोलियम कंपनी लगातार घाटे में चल रही है। हिन्दुस्तान पेट्रोलियम 10196 करोड़ रुपये के घाटे में है,भारत पेट्रोलियम 6291 करोड रुपये के घाटे में है। इसी तरह इंडियन आॅयल कारपोरेशन 1992 करोड़ रुपये के घाटे में चल रहे हैं। जाहिर सी बात है,जून 2022 तक के आंकड़े के अनुसार 18 हजार करोड़ रुपये से अधिक के घाटे पर है पेट्रोलियम कंपनियांँ। जादू से ही इनका घाटा पूरा किया जा सकता है। इनके अच्छे दिन 2024 तक नहीं आये तो देश में महंगाई की सूनामी आने से कोई रोक नहीं सकता। सन् 2014 में अच्छे दिन आयेंगे कहने वाले न तो गैस सिलेंडर को चार सौ रुपये के नीचे ला पाये और न ही महंगाई को पटकनी दे पाये और न ही डालर पर रुपये को सवार कर सके। सब ठीक हो जाये इसके लिए कौन सा जादू करना पड़ेगा लोकतंत्र नहीं जानता,शायद सरकार को पता हो। इसीलिए वजीरे आजम ने जादू की चर्चा की है। बहरहाल, जिनकी सरकार है,उनकी फिर सरकार बन गई,तो मोजूदा अर्थव्यवस्था उन्हीं को ढोना पड़ेगा और सरकार चली गई,तो बनने वाली सरकार खून के आंँसू रोयेगी। 
▪️मो. 7974304532

 

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