Friday, March 1, 2013

मै अंधेरों के सौदागरों का.....

 मै अंधेरों के सौदागरों का दोस्त बन जाता
तो फिर चराग-ए-दिल लेकर किधर जाता

गेहूं के दानें को मिट्टी में गाड़ दिया बच्चा
यदि उससे खेलते रहता तो वो बिखर जाता

नदी हॅू,समुंदर से मिल के समुंदर हो गया
अगर तालाब का पानी होता तो मर जाता

सियासत के आईने में भला मै कैसे संवरता
जिन्दगी का आईना होता तो संवर जाता

खौलता पानी हॅू,मगर आग बुझा सकता हॅू
अगर सोना होता तो आग में निखर जाता

          0  रमेश कुमार ‘रिपु‘

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