गर्म राख हवाओं से, चौखट तक पहुंचती हैं
बेजुबां चाहतें, दिल से दिल तक पहुंचती हैं
यहां के लोग सिर्फ बातों पे यकीन करते हैं
अब समुंदर में, कागज की नाव चलती है
कितना कुछ हो गया, हमारे मुल्क में यारों
फिर भी दिमाग की खिड़कियां बंद रहती है
अपनी जुबां को लगाम दूं,उनका ये हुक्म है
अनशन,धरना औ नुमाइश से सरकार डरती है
इस कदर तू, मेरी कीमत न बढ़ा बाजार में
मेरे इरादे की बर्फ,बोली देख के पिघलती है
जो मर चुके हैं,उनके नाम वोट पड़ गये‘रिपु’
यहां जिंदा लोगों की, लंबी कतार लगती है
0 रमेश कुमार ‘रिपु‘
मे. 09300244876
बेजुबां चाहतें, दिल से दिल तक पहुंचती हैं
यहां के लोग सिर्फ बातों पे यकीन करते हैं
अब समुंदर में, कागज की नाव चलती है
कितना कुछ हो गया, हमारे मुल्क में यारों
फिर भी दिमाग की खिड़कियां बंद रहती है
अपनी जुबां को लगाम दूं,उनका ये हुक्म है
अनशन,धरना औ नुमाइश से सरकार डरती है
इस कदर तू, मेरी कीमत न बढ़ा बाजार में
मेरे इरादे की बर्फ,बोली देख के पिघलती है
जो मर चुके हैं,उनके नाम वोट पड़ गये‘रिपु’
यहां जिंदा लोगों की, लंबी कतार लगती है
0 रमेश कुमार ‘रिपु‘
मे. 09300244876
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