Wednesday, June 19, 2019

अबला बन गई बला

             बस्तर की शर्मिली आदिवासी महिलाएं लज्जा छोड़कर बंदूक उठा ली हैं। पुलिस के रोजनामचे में इनामी हार्डकोर नक्सली बन गई हैं। कोई भी उन्हें अब अबला नहीं बल्कि, बला कहता है। खूंरेजी महिलाएं कही जाती हैं।
0 रमेश कुमार ‘‘रिपु‘‘
                         बस्तर में नक्सलियों के एक बड़े नेटवर्क का संचालन अब महिलाएं ही करती हैं। कभी ये आदिवासी महिलाएं बेहद शर्मिली हुआ करती थीें लेकिन अब इनके चेहरे पर लज्जा नहीं दिखती। बर्बरता और कू्ररता की एक मिसाल बन गई हैं। नक्सली महिलाओं के नाम से जानी जाती हैं। नक्सली नेता अपने संगठन में खूंरेजी महिलाओं को आरक्षण देते हुए उन्हें कैडर के हिसाब से पद देते हैं। पद,प्रतिष्ठा और अच्छे वेतन के लिए आदिवासी लड़कियां चूल्हा चैका और पढ़ाई छोड़कर माओवादी बन रही हैं। बस्तर के सातों नक्सल प्रभावित जिलों में ऐसी कई महिला नक्सली खूंखार लीडर हैं जो बेहतर तरीके से नक्सली मूवमेंट को अंजाम दे रही हैं। जंगल में रहते हुए इनका आचारण भी जंगली हो गया है। दया के भाव इनके चेहरे में नहीं झलकता। ममता की उम्मीद भी बेमानी है। पुलिस वालों की सख्त दुश्मन हैं। इनकी बर्बरता और हिंसक वारदात की वजह से पुलिस ने कई महिला नक्सलियों पर इनाम घोषित किया है। जिसमें कुमारी वनोजा पर 8 लाख, कुमारी सोढ़ी लिंगे पर 5 लाख एवं माड़वी मंगली की गिरफ्तारी पर 3 लाख रूपए का इनाम है।
नक्सली महिलाओं की हिंसक वारदात की वजह से अब उन्हें कोई भी अबला नहीं बल्कि कहता है। नक्सल प्रभावित जिला सुकमा के बुरकापाल में 24 अप्रैल को माओवादी और सुरक्षा बल के जवानों के बीच हुई मुठभेड़ में तीन सैकड़ा से अधिक माओवादी थे। जिसमें से आधे से अधिक वर्दी में महिला नक्सलीं थी। जो सुरक्षा बल के जवानों पर गोलियां चला रही थीं। चैकाने वाली बात है कि छत्तीसगढ़ में अब तक जितनी भी बड़ी वारदातें हुई हैं उसमें महिला नक्सलियों की अहम भूमिका रही है। दरभा के झीरम घाटी पर हुए कांग्रेसियों की परिवर्तन यात्रा हमले को भी नक्सली महिला लीडरों ने अंजाम दिया था। बस्तर में नक्सलियों के खिलाफ आंदोलन छेड़ने वाले कांग्रेस नेता महेंद्र कर्मा को झीरम घाटी में बेरहमी से मारा गया था। उन्हें मारने वालों में ज्यादातर महिलाएं ही शामिल थीं। महिला नक्सली कर्मा को पीटते हुए सड़क से लगभग आधा किलोमीटर अन्दर ले गई थीं और इस दौरान उनके चेहरे पर चाकुओं से वार भी करती रहीं। कर्मा की हत्या के बाद उनके शव पर डांस करने वाली भी महिला नक्सली ही थीं। ये क्रोध का चरम था।पिछले कई घटनाओं में महिला नक्सलियों के नाम सामने आने के बाद पुलिस ने भी अति संवेदनशील क्षेत्रों में संदिग्ध महिलाओं पर नजर रखना प्रारम्भ कर दिया है। बस्तर के पूर्व आई जी एस.आर.पी. कल्लूरी के समय सबसे अधिक महिला नक्सलियों ने सरेंडर किए। सरेंडर की  कुछ महिला नक्सलियों की शादी भी प्रशासन ने कराया। ताकि महिलाओं में समाज की मुख्यधारा में शामिल होने की इच्छा जागे। यह अलग बात है कि उनके हटते ही लालगलियारे में महिला नक्सलियों की हलचल एक बार फिर तेज हो गई है।
महिलाएं आसानी से करती हैं रेकी
बस्तर संभाग के सातों जिले अतिसंवेदनशील हैं। सभी जिले में बंदूक चलाने में माहिर बड़ी संख्या में महिला नक्सलियों की भरती की गयी है। मारकाट में माहिर महिला नक्सलियों को बड़े ऑपरेशन की जिम्मेदारी भी दी जाती है। अब तक इनामी सैकड़ों नक्सली महिलाएं पुलिस के हत्थे भी चढ़ी हैं। जिन्होंने खुलासा किए हैं कि बड़े नक्सली लीडर ज्यादातर महिला नक्सलियों को ही अॅापरेशन की कमान सौंपते हैं। इसलिए कि महिलाएं बड़ी आसानी से फोर्स के कैम्पों तक पहुंच कर रैकी कर सकती हैं और बेखौफ होकर बाजार व शहरों में रहकर नेटवर्क तैयार कर सकती हैं। 
दलम की कमांडर हैं महिलाएं
बस्तर की जेलों में वर्तमान में लगभग 50 महिला नक्सली कैद हैं। जिन्हें सातों जिलों से पुलिस ने पकड़ा है। इनमें चार हार्डकोर नक्सली निर्मल्लका, सोनी सोढ़ी, पदमा एवं चंद्रिका हंै जो नक्सलियों के बड़े मूवमेेंट को आपरेट करती थीं। 2006 से महिला नक्सलियों को दलम में शामिल किया जा रहा है। बस्तर संभाग के दरभा, भेज्जी, फरसेगढ़, कुटरू, छोटेडोंगर, झारा घाटी, आवापल्ली, आमाबेड़ा, ओरछा सहित आधा दर्जन इलाकों में महिलाओं को एरिया कमांडर के पद पर तैनात कर नक्सली मूवमेंट को बढ़ाने और हिंसा फैलाने का काम सौंपा गया है। पुलिस भी मानती है कि इन दस सालों में बड़ी संख्या में महिलाएं नक्सली दलम मेें शामिल होकर संगठन को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई हैं। पुलिस की संदिग्ध महिलाओं पर पैनी निगाह है।
गजब की बसंती
कांकेर जिले के लोहारी गांव की रहने वाली नक्सली कमांडर संध्या उर्फ बसंती उर्फ जुरी गावड़े को पुलिस आज तक नहीं भूली है और न ही माओवादी नेता। सन् 2010 में ताड़मेटला में हुए नक्सल हमले में 76 जवान शहीद हुए थे। इस वारदात को अंजाम देने में बसंती का हाथ था। बसंती 2001 में नक्सलियों के बाल संगठन में शामिल हुई थी। इसके बाद संगठन में अलग-अलग जगहों पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाने के बाद अपने गांव में जन मिलिशिया कमांडर के तौर पर काम कर रही थी। नक्सल नेताओं के शोषण से तंग आ कर बसंती ने आत्मसमर्पण कर दिया। उसका प्रमुख काम पुलिस पार्टी पर हमला कर हथियार लूटना, सीनियर नक्सली नेताओं की सुरक्षा करना,संगठन के विस्तार में सहयोग करना और नक्सली संगठन के खिलाफ काम करने वालों को सजा देना था। उसने जो गंभीर वारदात को अंजाम दिया उसमें से दुर्गूकोन्दल, आमाबेड़ा, कोयलीबेड़ा और पखांजूर थाना क्षेत्र में कई जगह विस्फोट, आगजनी और एम्बुश लगाने की घटनाओं में शामिल। 13 सितंबर 2003 दंतेवाड़ा जिले के गीदम थाने में हमला और लूट। 2007 में बीजापुर जिले के रानीबोदली कैंप पर हमला। 2013 में मन्हाकाल निवासी जग्गु धुर्वा की हत्या प्रमुख है।
27 जवानों की जान ली सुकाय
प्रदेश के नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा जिले के गीदम थाना क्षेत्र से सुकाय वेट्टी को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया। सुकाय वेट्टी पिछले पांच सालों से नक्सलियों से जुड़ी थी। 2011 में एलजीएस सदस्य के रूप में वह संगठन से जुड़ी। पूर्वी बस्तर डिविजन के कुआनार में एल.जी.एस. की सक्रिय सदस्य थी। सन् 2010 में मुडपाल के जंगल में पुलिस पर एम्बुश लगाकर हमला,नारायणपुर के धौड़ाई इलाके में सीआरपीएफ के जवानों पर हमला इसमें 27 जवान शहीद हुए थे। 2013 में कोंडागांव के केशकाल थाना क्षेत्र में पुलिस नक्सली मुठभेड़ में शामिल थी। दस लाख की इनामी थी।
माओवादी महिला बना दिए
पिछले कुछ वर्षो से माओवादियों की टुकड़ियों में महिलाओं की संख्या बढ़ती जा रही है। इसके पीछे सरकार विरोधी मानसिकता आदिवासी महिलाओं को माओवादी बना रही है,ऐसा कोई कारण नहीं है। बस्तर की आदिवासी महिलाएं बस्तरिया संस्कृति को ही ओढ़ती और बिछाती आई हैं। हाड़तोड़ मेहनत करना और पुरूषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खेती किसानी से लेकर वनोपज एकत्र करना, हाट बाजारों में बेचने के अलावा घर गृहस्थी और बाल बच्चे संभालना यह उनका स्थायी गुण है। विषम परिस्थितियों में नहीं घबराना आदिवासी महिलाओं की विशेषता है। आदिवासी महिलाओं की यही विशेषता लालगलियारे की जरूरत बन गया। आदिवासी औरतों में अनुशासन और किसी भी काम को मन लगाकर करने की इच्छा शक्ति बहुत तेज होती है। उनकी इस खूबी का इस्तेेमाल माओवादी नेताओं ने खूंखार छापामार और कू्ररता में उन्हें तब्दील कर उन्हें माओवादी महिला बना दिए हैं।
नाबालिग युवतियांे की मांग
आन्ध्र प्रदेश और छत्तीसगढ़ में हुई कई बड़ी नक्सली वारदातों को अंजाम देने वाली रमोली ने पुलिस को जो बताया वह किसी अजूबा से कम नहीं है। रमोली कहती है,बड़े नेता नाबालिग युवतियों को संगठन में शामिल करने का दबाव बनाते हैं। पहले युवतियों में जोश भरा जाता है कि यह अपने लोगों के लिए हमारी लड़ाई है। लेकिन शामिल होने के बाद दोयम दर्जे का व्यवहार किया जाता है। जुगरी निवासी छिनारी नारायणपुर मर्दापाल एलओएस सदस्य के रूप में वर्ष 2008 में भर्ती हुई थी। वर्तमान में उसे भानपुरी एरिया कमेटी सदस्य की जिम्मेदारी दी गई थी। दोनो महिला नक्सलियों पर 50-50 हजार का इनाम था। माओवादियों को प्रेम और संतान पैदा करने की इजाजत नहीं होती। आठ लाख रूपए की इनामी नक्सली 20 वर्षीया आसमती को 10 लाख रूपए के इनामी नक्सली संपत से प्यार हो गया। इन दोनों की मुहब्बत परवान चढ ही रही थी,इसकी भनक कमेटी के सचिव राजू उर्फ रामचन्द्र रेड्डी को लग गई। दोनों को अलग कर दिया। आसमती को यह अच्छा नहंी लगा और वह घर बसाने के लिए लाल गलियारे से नाता तोड़ने के लिए संपत को विवश किया और दोनों ने हथियार डाल दिए। छत्तीसगढ़ सीमा से लगे ओडिशा राज्य के मलकानगिरी जिले में एसपी मित्रभानु महापात्रो के समक्ष दो महिला समेत पांच माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया। इसमें एक माओवादी सुभा मड़कामी उर्फ राजू पर एक लाख रुपए का इनाम घोषित था। बताया गया है कि सुभा मड़कामी 23 वारदातों में शामिल रहा। महिला माओवादी भिमे माड़ी उर्फ कुमारी आठ वारदात, सोमा पोडयामी उर्फ विक्रम पांच वारदात में शामिल था।
जनयुद्ध का प्रशिक्षण
पुलिस को शिकायत मिल रही है कि नक्सल प्रभावित क्षेत्र के गांवों से लगातार आदिवासी महिलाएं लापता हो रही हैं। वहीं नक्सली हर गांव में प्रत्येक घर से एक युवती मांग कर उन्हें हथियार संचालन का प्रशिक्षण के साथ विद्रोह का भी ज्ञान देते हैं। ताकि वे बंदूक उठा सकें और चला सकें। नक्सली कैम्पों में मिली किताबों से पता चला कि घने जंगलों में नक्सली युवतियों को क्रांति का पाठ पढ़ा रहे हैं। किताब में दंडकारण्य जनता विद्रोह का एक पाठ भी जोड़ा गया है। जाहिर है कि महिला माओवादियों के दम पर ही छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद की दहशत है। जिस दिन नक्सलियों का साथ देना महिलाएं बंद कर देंगी माओवादी की उल्टी गिनती शुरू हो जाएगी।










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