Wednesday, September 9, 2020

कोविड से मात खाते भूपेश

 









कोविड 19 में एकदम से उछाल आने और विपक्ष के हमले से विवश होकर भूपेश सरकार को लाॅक डाउन की घोषणा करनी पड़ी। प्रदेश सरकार ने तबाही के वाइरस को गंभीरता से नहीं लिया, यही वजह है कि आज हर विभाग में कोरोना के मरीज हैं। मंत्री के घर से लेकर मंत्रालय तक कोरोना पहुंच गया है। क्या मुख्यमंत्री भूपेश बघेल दे पाएंगे इस महामारी को मात?
0 रमेश कुमार ‘‘रिपु‘‘
  छत्तीसगढ़ में कोविड-19 के मामलों में खतरनाक रूप से बढ़ोतरी होने पर विपक्ष ने मीडिया में सवाल किया,‘‘क्या भूपेश सरकार राजधानी रायपुर को भोपाल या इंदौर बनाना चाहती है’’। ऐसा सवाल विपक्ष इसलिए किया कि लाॅक डाउन के वक्त यहां मुश्किल से 11 कोरोना के मरीज थे। जिसमें दस ठीक हो गए थे। इसके बाद लाॅक डाउन, अनलाॅक होने पर भी कोरोना को लेकर हालात बिगड़े नहीं थे। कोरबा के कटघोरा तहसील में कोराना बम फूटने पर, स्थिति नियंत्रण में है, सरकार का यही दावा था। अब कोविड 19 पांव पांव चलकर, गांव गांव पहुंच गया। इस वक्त प्रदेश में करीब 6 हजार कोरोना के मरीज हैं। माना जा रहा है कि यह संख्या अगस्त तक दस हजार के करीब पहुंच जाएगी। अब तक 30 मौतें हो गई है। सवाल यह है कि महामारी कोविड- 19 के कहर की दूसरी लहर जानलेवा कैसे हो गई।
लापरवाही
कोरोना को लेकर सरकार और प्रशासन गंभीर नहीं थे। वरना बिलासपुर सेंट्रल जेल में 21 जुलाई को 9 कैदी संक्रमित न मिलते। प्रदेश के गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू के बंगले के दो कर्मचारी कोरोना पॉजिटिव पाए गए। दोनों ही कर्मचारी महिला हैं। गृहमंत्री के बंगले में मेड का काम करती थीं। एसआईबी के डीआईजी के संक्रमित मिलने के बाद, पुराने पुलिस मुख्यालय को सील कर दिया गया है। हाईकोर्ट के दो कर्मचारी कोरोना संक्रमित मिले। डाॅक्टर और नर्से संक्रमित मिली। स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंह देव ने कहा कि कोराना टेस्ट की वजह से कोविड 19 के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। यानी वे चाहते हैं कि कोविंड 19 का पॉजिटिव रिपोर्ट आने पर आंकड़े न बताए जाएं। सवाल यह है कि ऐसा करने से क्या समस्या का हल हो जाएगा? रायपुर कोराना का हाॅट स्पाॅट बना तो प्रदेश के 10 जिलों में 22 जुलाई से 28 जुलाई तक का पूर्ण लॉकडाउन किया गया है। वहीं अन्य जिलों में भी आंशिक छूट देने के साथ सख्ती बढ़ा दी गई है।  
पहले से अधिक सख्ती
इस बार पुलिस मोहल्लों और गलियों में दोगुनी फोर्स से नजर रख रही है। पकड़े गए लोगों को प्रतिबंधात्मक धाराओं में मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया जाएगा। बाहर निकलने का पुख्ता कारण नहीं बताने वालों की गाड़ी जब्त कर कोर्ट में पेश की जाएगी। शासन के आदेश के उल्लंघन पर धारा 188 का केस दर्ज करेंगे। गलियों में ड्रोन से  नजर रखा जा रहा है। जरूरी समझा गया तो लाॅक डाउन बढ़ाया जा सकता है। रोजाना 5000 से अधिक टेस्टिंग किया जा रहा है, जिसे बढ़ाकर अब 10 हजार करने का लक्ष्य रखा गया है। लॉक डाउन का अधिकार जिला प्रशासन को दिया गया है, कोरोना को नियंत्रित करने का। कोविड-19 के बढ़ते कदम की वजह से मंत्रालय व संचालनालय के सभी दफ्तर भी बंद है। रायपुर में 2 सौ से ज्यादा और बीरगांव में 40 से ज्यादा इलाकों को कंटेनमेंट जोन घोषित किया गया है।  
सरकार दोषीः साय
एक तरफ भूपेश सरकार केन्द्र सरकार से पैसा नहीं मिलने का रोना रो रही है,दूसरी ओर हर विभाग के बजट में तीस फीसदी की कटौती कर दी है। बावजूद इसके 15 संसदीय सचिव और निगम मंडल में खाली पड़े 32 पद भरने के साथ ही अपने चार सलाहकारों को कैबिनेट मंत्री का दर्जा देकर खर्चा को बढ़ाया। कोरोना में सोशल डिस्टेसिंग की बात सरकार करती रही, दूसरी ओर राजनीतिक कार्यक्रमों में भीड़ एकत्र करती रही। जबकि शादी व्याह में 20 लोगों से अधिक शामिल होने की इजाजत नहीं है। जनता पूछ रही है, राजनीतिक कार्यक्रम में भीड़ पर नकेल क्यों नहीं? प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष विष्णुदेव साय ने कहा, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सरकार राजनीतिक नियुक्तियां करने में मस्त है, जबकि प्रदेश की जनता कोरोना के बढ़ते संक्रमण के चलते त्रस्त है। कोरोना के नाम पर पैसों की कमी का रोना रोती सरकार सियासी नौटंकियों में सरकारी धन पानी की तरह बहा रही है। वहीं कोरोना वॉरियर्स सफाई कर्मियों का वेतन काटकर उन्हें भी हताश करके उनका मनोबल तोड़ने का काम कर रही है। कोरोना की जांच के लिए टेक्नीशियन और एनएमए आदि रिक्त पदों की भर्ती दिसंबर में हो जाती तो आज कोरोना के खिलाफ लड़ाई में आसानी होती।
कोरोना में रायपुर टाॅप पर
राजधानी रायपुर को मुख्यमंत्री सुरक्षित नहीं कर पाए। आज राजधानी रायपुर कोरोना में टाॅप पर है। 22 जुलाई को प्रदेश में 268 और रायपुर में 84 कोरोना के मरीज मिले। भाठागांव में कोरोना से मरी महिला के संपर्क में आने से 24 लोगों को संक्रमण हुआ। पिछले दस दिनों में कोराना के 1800 मरीज मिले। अभी तक 5731 संक्रमित मरीज मिल चुके हैं। इनमें 30 मरीजों की मौत हो गई। हॉटस्पॉट बन चुके रायपुर में 1494 मामले मिले हैं। इनमें से 10 की मौत हो गई है। हालांकि प्रदेश में 4114 मरीजों के स्वस्थ होने के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी भी दी गई है। शराब बेचने वाली सरकार ने ध्यान नहीं दिया कि शराब बिकवाने वाली प्लेसमंट कंपनी के कर्मियों ने तमाम बैरीकेट्स उखाड़ दिए हैं। अब शराब दुकानें कोरोना संक्रमण का अड्डा बन गई हैं।   
संक्रमण का नया हमला
छत्तीसगढ़ में अब कोरोना के गंभीर लक्षणों वाले मरीज सामने आने लगे हैं। इन मरीजों को ऑक्सीजन और वेंटीलेटर की भी जरूरत पड़ रही है। डॉ भीमराव अंबेडकर मेकाहारा के मेडिसिन विभाग के एच.ओ.डी डॉ आरके पांडा ने बताया कि अब मरीजों में कोरोना के साथ डायरिया, न्यूरोजिकल साइड इफेक्ट, हार्ट और यूरिन की समस्या भी आ रही है। एक माह पहते तक माइल्ड केस आ रहे थे। उनमें कोई समस्या नहीं थी। अब 30 से 35 केस ऐसे आए हैं, जो गंभीर लक्षण वाले हैं। यह पता चला कि है कि जिन मरीजों को ऑक्सीजन की जरूरत पड़ी है, उनको लंग्स फेफड़े में फाइब्रोसिस यानी चकत्ते हो सकते हैं। बार,बार लंग्स में इंफेक्शन होने से निमोनिया होगा।  
प्रमुख खामियां
कंटेनमेंट जोन में लोगों को उनके घरों तक जरूरी सामान न पहुंचाए जाने से बाजारों में भीड़ होने लगी। टेस्ट नतीजे अब भी दो दिन से पहले नहीं मिल रहे हैं। कोविड का टेस्ट पाॅजिटिव आए बिना किसी व्यक्ति को अस्पताल में दाखिला नहीं किया जाता। क्वारंटीन सेंटरों में रह रहे बहुतों से लोगों ने साफ सफाई में कमी,खाना ठीक नहीं,अव्यस्था और खाने के लिए पैसे लिये जाने की शिकायत की है। ज्यादादर अस्पतालों में 25 फीसदी डाॅक्टर और नर्से बीमार हैं या क्वारंटीन में हैं। जिससे स्वास्थ्यकर्मियों की कमी पड़ गई है। समय पर सरकार ने भर्ती का आदेश निकाला नहीं। राज्य सरकार अतिरिक्त स्टाफ उपलब्ध कराने में नाकाम हो गई है। पहले जैसी सख्ती भी नहीं होने की वजह से, कोरोना मरीज बढ़े हैं। सरकार बड़े सरकारी अस्पतालों में एक डिप्टी कलेक्टर नियुक्त करे, ताकि वह प्रत्येक बेड के लिए एक यूनीक कोड तय करे और मरीज के डिस्चार्ज की नीति पर नजर रखे। बहरहाल ऐसी सभावना है कि इस बार की सख्ती से सरकार कोरोना विस्फोट की स्थिति को नियंत्रित कर ले।
 
 
 
 

 
 
 
     

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