गोधन न्याय योजना ग्रामीणों के लिए आजीविका का साधन बन रहा है। वहीं विपक्ष का आरोप है कि बिहार के चारा घोटाला की तरह गोबर घोटाला की कहानी भी आकार लेने लगी है। एक पशुपालक को पन्द्रह दिनों के गोबर बेचे जाने का 44 हजार रूपया भुगतान किया गया। यानी गाय एक दिन में 59 किलो गोबर देती है।
0 रमेश कुमार ‘‘रिपु’’
कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर विकासखण्ड के ग्राम मुंगवाल के रति राम कुमेटी के पास एक भी पालतू मवेशी नहीं है। बावजूद इसके वे 70 से 80 किलो गोबर प्रति दिन गोठान में बेचते हैं। रति राम के तीन एकड़ जमीन है। जिसमें धान की फसल ले रहे हैं। रतिराम खुश हैं कि वे रोज घूम घूम कर गोबर एकत्र कर, बेचने पर डेढ़ पौने दो सौ रूपया पा जाते हैं। सिर्फ रतिराम ही नहीं, प्रदेश में ऐसे लोगों की संख्या अब बढ़ती जा रही है। जाहिर है कि भूपेश सरकार ने ग्रामीण अर्थव्यस्था को मजबूत करने के मकसद से गोधन न्याय योजना शुरू की है,उसके परिणाम अब दिखने लगे हैं। गोरतलब है कि छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य है, जहां सरकार गोबर खरीदती है।
मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने 20 जुलाई हरेली पर्व के दिन गोधन न्याय योजना की शुरूआत की। राज्य के पशुपालक, किसान एवं ग्रामीणों से दो रूपए किलो की दर से गौठानों में गोबर बेच रहे हैं। सुराजी गांव योजना के तहत अब तक राज्य में कुल 4377 गौठानों का निर्माण किया जा चुका है। इनमें से 4341 गौठानों में गोबर खरीदी की जा रही है। राज्य में पशुपालन को बढ़ावा देने, उनका संरक्षण एवं संवर्धन किया जाना इस योजना का उद्देश्य है। गोधन न्याय योजना के तहत क्रय गोबर से वर्मी कम्पोस्ट तैयार करना, जैविक खेती को बढ़ावा देना तथा ग्रामीण अर्थ व्यवस्था को बेहतर बनाने के साथ ही लोगों को रोजगार से जोड़ना है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल 20 अगस्त को राजीव गांधी की जयंती के अवसर पर गोबर बेचने वाले ग्रामीणों, किसानों एवं पशुपालकों को 4 करोड़ 50 लाख 12 हजार 500 रूपए की राशि उनके खाते में स्थानांतरित की। यह राशि राज्य के 4341 गौठानों में 2 अगस्त से 15 अगस्त तक क्रय किए गए गोबर का है। यानी 20 जुलाई से 15 अगस्त तक क्रय गोबर के एवज में कुल 6 करोड़ 17 लाख 60 हजार 200 रूपए का भुगतान किसानों ग्रामीणों एवं पशुपालकों को मिला। एक रिर्पोट के मुताबिक राज्य में प्रतिदिन औसत रूप से 11 हजार क्ंिवटल से अधिक की गोबर खरीदी हो रही है। गोबर बेचने वालों में 49.71 प्रतिशत अन्य पिछड़ा वर्ग के 37.41 प्रतिशत लोग अनुसूचित जनजाति वर्ग के, तथा 8.30 प्रतिशत लोग अनुसूचित जाति वर्ग के हैं।
आत्म निर्भरता
कोरोना काल में रोजगार में कमी आई है। ऐसे समय में गोधन योजना ग्रामीणों के लिए आय का अच्छा जरिया है। सुकमा जिले की गांव दुब्बाटोटा गौठान की कमल स्व.सहायता समूह की 13 महिलाओं द्वारा गोबर में केंचुआ डालकर वर्मी खाद तैयार किया जा रहा है। समूह की महिलाएं बताती है कि गोबर से बने खाद से उन्हें आर्थिक लाभ मिलेगा। साथ ही जैविक खाद से किसानों को अच्छी फसल मिलेगी। कृषि विभाग द्वारा उन्हें जैविक खाद बनाने का प्रशिक्षण भी दिया गया है। सुकमा जिले में अब तक 13 हजार से भी अधिक पशुपालकों का पंजीयन गौठानो में किया जा चुका है। महिलाएं कहती हैंै कि पहले गोबर का उपयोग केवल घर लीपने और छेना बनाने में करते थे,गोधन योजना से अब चार पैसे मिलने लगा है। बिलासपुर जिले के चार विकासखंडों में ग्रामीण क्षेत्रों के 72 गोठानों में स्व सहायता समूहों ने 2 हजार 650 क्विंटल से अधिक खाद का उत्पादन किया। जिनमें 700 क्विंटल से अधिक खाद बेचा जा चुका है। निर्मित खादों को उद्यानिकी विभाग वन विभाग की नर्सरियों में उपयोग किया जा रहा है। इससे जैविक खेती को बढ़ावा मिल रहा है।
अब नाली में नहीं फेकते गोबर
भिलाई के कोसा नाला के पशुपालक रोहित यादव के पास सोलह गायें हैं। हर दिन इनसे लगभग दो सौ से तीन सौ किलो गोबर होता है। समस्या थी कि, इसे कहां फेंके,खासकर शहरी क्षेत्र के लोगों के लिए। गोधन न्याय योजना से यह समस्या तो दूर हुई साथ ही अब उन्हें इसकी अच्छी खासी कीमत भी मिलने लगी है। हर दिन वे पांच सौ से छह सौ रुपए का गोबर बेच रहे हैं। रोहित कहते हैं मेरे पास गोबर रखने के लिए जगह नहीं है। इसलिए हर दिन गौठान में गोबर बेच देते हैं।
गोधन का सकारात्मक असर
भिलाई नगर निगम के कमिश्नर ऋतुराज रघुवंशी ने सभी जोन कमिश्नरों को हर दिन गोबर खरीदी, वर्मी टैंक बनाने और इसके पेमेंट की स्थिति की नियमित मानिटरिंग करने के निर्देश दिए हैं। आर्य समूह की सुशीला जंघेल ने बताया कि प्रति दिन करीब सात हजार क्विंटल गोबर आता है। बड़े पैमाने पर वर्मी कंपोस्ट के लिए कच्चा माल तैयार हो रहा है। गोधन न्याय योजना में तेजी से भुगतान होने का बड़ा सकारात्मक असर दिखा है। पशुपालकों के लिए सरकार की यह योजना आर्थिक अवसर लेकर आई है। इससे लोग पशुधन को सहेजेंगे भी और पशुपालन को बढ़ावा भी मिलेगा।
गोबर घोटाला की आशंका
भाजपा किसान मोर्चा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष संदीप शर्मा ने गौ धन न्याय योजना को लेकर एक बड़े घोटाले की आशंका जताई है। पशुपालकों को हुए भुगतान की राशि से सवाल उठता है कि ऐसी कौन.सी गाय है, जो रोज 59 किलो गोबर देती है। दुर्ग जिले के एक पशुपालक को 15 दिनों में बेचे गए गोबर के लगभग 44 हजार रुपए भुगतान हुआ है। पशुपालक के पास 25 गायें हैं। एक गाय प्रति दिन 59 किलो गोबर दी यानी 15 दिन में 885 किलो। 25 गाय का कुल गोबर हुआ 22125 किलो। जो कि संभव नहीं है। सवाल यह है कि ऐसी कौन.सी गाय है जो रोज 59 किलो गोबर देती है। आशंका है कि प्रदेश सरकार गौ.धन न्याय योजना के नाम पर एक बड़े घोटाले को अंजाम देने जा रही है। बिहार के चारा घोटाला सदृश्य क्या छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार इस योजना के द्वारा गोबर.घोटाला को अंजाम देने की मंशा से यह योजना लेकर आई है।
गोबर की चोरी से बखेड़ा
गोबर प्रति किलो दो रूपये बिकने की वजह से अब लोग गोबर भी चुराने लगे हैं। कोरिया जिले के मनेंद्रगढ विकासखंड के ग्राम रोझी में एक गो पालक लल्ला राम और सेमलाल के बाडे में रखे करीब सौ किलो गोबर किसी ने चुरा लिया। यह तब पता चला जब दोनों की पत्नियां फूलमति और रिचबुधिया बाड़े में जाकर देखा। वहां गोबर का ढेर नहीं था। गोठान समिति में जाकर गोबर चोरी की इस घटना की जानकारी दी गई। गोठान समिति की ओर से चोर को पकड़ने की फरियाद के साथ एक आवेदन स्थानीय थाने में दिया गया है। हैरानी वाली बात है कि पुलिस कैसे पता चलायेगी कि गोबर आरोप लगाने वाला का कौन सा है।
गोबर की लकड़ी
जशपुरनगर में अब गोबर की लकड़ी से होटल और ढाबों के चूल्हों में आग सुलग रही है। खनिज न्यास निधि के सहयोग से जिला प्रशासन ने जिले के दुलदुला विकासखंड के ग्राम पंचायत पतराटोली में गोबर से लकड़ी बनाने की मशीन स्थापित कर इसका संचालन शुरू कर दिया है। जनपद पंचायत कुनकुरी की अध्यक्ष चंद्रप्रभा भगत ने युग वार्ता को बताया कि 29 स्व.सहायता समूह की महिलाएं गोबर से लकड़ी बना रही हैं। इससे पर्यावरण शुद्ध होगा, साथ ही जंगलों में अनावश्यक लकड़ी का कटाव भी रूकेगा। जल,संरक्षण एवं संर्वधन को बढ़ावा भी मिलेगा। जिले में नवाचार के तहत मशीन के माध्यम से गोबर से लकड़ी बनाई जा रही है। जशपुर जिले के ग्रामीणों को रोजगार भी मिल रहा है। कलेक्टर महादेव कावरे ने बताया कि ग्राम पंचायत पतराटोली में स्व.सहायता समूह की महिलाओं को गौण खनिज मद से 1 लाख 35 हजार की लागत से गोबर से लकड़ी बनाने का मशीन र्दी गई है। इसका लाभ उठाकर समूह की महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही है।
कैसे बनाए गांेबर से लकड़ी
गोबर से लकड़ी बनाने के व्यवसाय में स्पर्धा बहुत कम है। मगर मांग ज्यादा। आत्म निर्भर बनने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण धंधा है। गो मेक मशीन 42 हजार से एक लाख रूपये तक की मिलती है। इस मशीन से 15 सेंकंड में गोबर से एक किलो की लकड़ी बनती है। दस हजार से पचास हजार रूपये तक आय प्रति माह कर सकते हैं। गाय का गोबर,सूखा भूसा और घास को मशीन में डालकर लकड़ी तैयार किया जाता है। जबकि लकड़ी करीब छह सौ रूपये क्विंटल मिलती है। ढाई इंच मोटी और बीच में गोबर की लकड़ी के छिद्र होता है,ताकि यह आसानी से जल सके। ऐसी लकड़ियों का इस्तेमाल ईंट भट्ठों के अलावा यज्ञ एवं हवन में भी होता है।







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