Thursday, October 15, 2020

सुरूर में रहने का फैशन

 

 












साधन संपन्न युवा तबका मौज मस्ती वाली पार्टियों में कोकीन,हेरोइन,ब्राउन शुगर जैसे मादक पदार्थ लेने लगा है। जवां मन की रईस दुनिया में नशे का स्तर बदल गया है। राजधानी रायपुर ही नहीं, प्रदेश के कई जिलों में महंगे नशे का कारोबार तेजी से बढ़ा है। सुरूर में आने का सामान खरीदना रईस तबके के फैशन मंे शुमार हो गया है। 


0 रमेश कुमार ‘‘रिपु’’
                    शराब के नशे से दस गुना ज्यादा कोकीन असरकारक होता है। इसलिए युवाओं में इसकी माँंग ज्यादा है। हर किसी युवा को लगता है कि इसे लेने के बाद वह पूरी रात पार्टी में मस्ती कर सकता है। ब्राउन शुगर, हेरोइन और कोकीन जैसे मादक पदार्थ आंतरिक आनंद से भर देते हैं। उत्तेजना बनाए रखनें में यह अधिक असरकारक है।’’यह कहना है पंचशील नगर रायपुर का निवासी श्रेयाश झाबक का। कोतवाली पुलिस ने इसे और इसके साथी विकास छोर को 17 ग्राम कोकीन के साथ गिरफ्तार किया। बरामद कोकीन की कीमत एक लाख 70 हजार रूपए है। नगर पुलिस अधीक्षक डी.सी. पटेल कहते हैं,‘‘राजधानी रायपुर ड्रग सेंटर बन गया है। यहांँ कई स्थानों में कोकीन, ब्राउन शुगर और हेरोइन के ग्राहक हैं। सभी ग्राहक रईस हैं। बैरन बाजार स्थित पालीटेकनिक काॅलेज के सामने दोनों आरोपी कोकीन के ग्राहक का इंतजार कर रहे थे। अब रईस लोगों की जिन्दगी का हिस्सा बन गया है ड्रग्स है।’’
राजधानी रायपुर में ड्रग्स के शौकीनों की सूची बेहद लंबी है। दो दर्जन से अधिक लोगों के नाम सामने आने के बाद से खलबली मच गई है। पुलिस अब पता करेगी कि मंुबई मैं ड्रग्स बेचता कौन है, और कहाँं से लाता है। राजधानी रायपुर में बड़ी बड़ी पार्टियों में ड्रग्स की सप्लाई करने वाले और भी लोग हैं। वैसे प्रदेश में गांजा भारी मात्रा में पुलिस पकड़ती आई है। गांजा की तस्करी पूरे प्रदेश में होती है।
कभी एक्स्टेसी का चलन अधिक था। अब कोकीन,ब्राउन शुगर और हीरोइन बड़ी असानी से उपलब्ध हो जाने की वजह से व्यापारिक घरानों की संताने साथ ही कंपनियों के अधिकारी, जिन्हें भारी वेतन मिलता है। लुत्फ उठाने की चाह रखते हैं। वे ड्रग्स बेचने वालो ंकी तलाश में रहते हैं। अजय कुमार (बदला नाम) ने बताया कि अब ड्रग्स की शर्मिंदगी जैसी बात नहीं रही। पिछले साल मेरे एक मित्र के जन्म दिन मे केक की जगह 20 ग्राम कोकीन का ढेर था। और जब लोगों ने सुना कि इतना सा पावडर दो लाख का है, तो किसी को आश्चर्य नहीं हुआ।’’जाहिर सी बात है कि ड्रग्स का चलन अब बड़े शहरो में आम बात है। सातवे दशक में हरे रामा, हरे कृष्णा फिल्म में जीनत अमान गांजा पीते हुए दम मारो दम,मिट जाएं गम पर थिरकी थीं। तब सारे युवा उनके दीवाने हो गए थे।  
और ड्रग्स संस्कृति आ गई
नशा मुक्ति संस्था के अध्यक्ष राम निवास तिवारी कहते हैं,‘‘आज ड्रग्स लेागों की कामयाबी और प्रदर्शन का साधन बन गया है। पहले बड़ी पार्टी मे महंगी शराबें परोसी जाती थी, अब कोकीन और ब्राउन शुगर चलता है। भांग का चलन ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ा है। भांग को अध्यात्मिक प्रसाद कहा जाता है। पहले दिन भर का थका हारा मजदूर, शाम को गांँजा पी लेता था। अब इसका चलन कम उम्र के बच्चों में बढ़ गया है। कह सकते हैं कि 17 वर्ष की उम्र के बच्चे भी गांँजा पीते हैं।’’हाॅस्टल मे ंरहने वाले छात्र और छात्राओ में मौज मस्ती की चाहत सबसे पुरानी मानवीय चाहत है। जाम छलकाना और केरल की मारिजुआना सिगरेट फूकने के लिए किसी पार्टी या क्लब जाने की जरूरत नहीं समझते। नारर्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) के अधिकारी कहते हैं,‘‘ करीब दशक भर पहले तक छत्तीसगढ़ में भांग,गांजा,शराब का नशा करने वाले ही मिलते थे। छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद उद्योग धंधे की संख्या बढ़ने के साथ, लोगों के पास जरूरत से ज्यादा पैसा आने से ड्रग्स की संस्कृति यहाँं भी दिखने लगी है। नतीजा, हर जिले में कोकीन,चरस,हीरोइन और ब्राउन शुगर के केस सामने आने लगे हंै।’’
डेढ़ करोड़ की ब्राउन शुगर मिली
महासमुद जिले की पुलिस को राजस्थान निवासी शंकर के पास से 730 ग्राम ब्राउन शुगर मिला। आरोपी रायपुर में कांशीराम नगर में रहता है। उसके पास से ऑटोमेटिक पिस्टल 7.6 एम. एम. और दो जिंदा कारतूस भी मिला। महासमुद एस.पी प्रफुल्ल ठाकुर ने बताया कि 12 अगस्त को दुपहिया वाहन से आरोपी शंकर रायपुर से अपनी मैस्ट्रो मैजिक वाहन में ब्राउन शुगर लेकर ओडिशा खरियार रोड जा रहा था। घोड़ारी नदी मोड़ के पास जांच के दौरान पकड़ा गया। प्रारंभिक पूछताछ में पहले अपने आप को क्राइम ब्रांच रायपुर में पदस्थ होना है। एएसपी मेघा टेम्भुरकर ने कहा, जैसलमेर के रास्ते पाकिस्तान के किसी गिरोह का सदस्य हो सकता है।  
पत्रकार से ब्राउन शुगर मिला
ड्रग्स के कारोबारी युवा हैं और इनके ग्राहक भी युवा ही हैं। पहले कहा जाता था कि तलाक होने, मुहब्बत में नाकाम अथवा गलत सोहबत की वजह से नशीले पदार्थो का इस्तेमाल करने लगा है। लेकिन आज संपन्न और सफल व्यक्ति ही नशीले पदार्थो का सेवन करता है। इसकी फिक्र नहीं करते कि इससे उनके शरीर को कितना नुकसान होगा। जल्द से जल्द रईस बनने की चाहत में युवा वर्ग ड्रग्स के धंघे में आ गए हैं। राजधानी रायपुर के एक प्रतिष्ठित अखबार का 36 वर्षीय संवाददाता प्रकाश गुप्ता पत्रकारिता की आड़ में ब्राउन शुगर के कारोबार में लिप्त पाया गया। अंबिकापुर पुलिस ने 22 सिंतबर को उसके पास से दस ग्राम ब्राउन शुगर बरामद किया। जिसकी कीमत दो लाख रूपये है। आरोपी कुछ दिनों पूर्व ब्राउन शुगर के मामले में जेल से 6 वर्ष की सजा काट कर बाहर आया है। आरोपी को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया है। गौरतलब है कि 8 दिसंबर 2018 में शंकर घाट में पुलिस ने ब्राउन शुगर तस्करी कर रहे दो युवकों को पकड़ा था। इनके पास से तीन लाख रुपए कीमत की ब्राउन शुगर जब्त किया था। इसमें से एक आरोपी बर्खास्त पुलिस आरक्षक है।  
 कुरियर से आते हैं ड्रग्स
ड्रग्स सप्लायर विकास बंछोर के अनुसार रायपुर में होने वाली बड़ी पार्टियों में ड्रग्स खपाया करता था। आरोपी इन पार्टियों में ड्रग्स को खपाने के लिये कोरियर और ट्रेनों में पार्सल से ड्रग्स मंगवाया करता था। ड्रग्स सप्लायर विकास कई बड़ी युथ पार्टियों को मैनेज करने का काम करता था। इन पार्टियों के जरिए वो बड़े घरों के युवक युवतियों से संपर्क कर उन्हें कोड मुहैया करवाता था। आरोपी ड्रग्स के बदले में इन युवओं से काफी मोटी रकम चार्ज करता था। बता दें कोकीन यानी कोक बॉलीवुड का ये सबसे फेवरेट ड्रग्स है। इसे कोक के नाम से जाना जाता है। एक ग्राम कोक की कीमत 6 से 7 हजार रुपए होती है। इसे युवा नाक के जरिए लेते और खाते भी हैं। एक बार जिसे कोक की लत लग गई, इसे छोड़ना मुश्किल होता है। इसे बड़े शहरों का चहेता नशा कहते है। क्योंकि ये वजन कम करता है और नींद उड़ाता है। मुंबई के बाद अब रायपुर में मिले कोकिन ड्रग्स मामले में नया खुलासा सामने आया है।  
अंतर्राज्जीय गांजा तस्कर
महासमुंद जिलां मादक पदार्थों की तस्करी का बड़ा जिला बन गया है। पड़ोसी राज्य उड़ीसा से अवैध मादक पदार्थ गांजा की तस्करी जारी है। थाना कोमाखान की पुलिस नाकाबंदी कर संदिग्ध वाहन की तलाश कर रही थी। इस दरमियान उड़ीसा की ओर से आ रहे एक ट्रक का नंबर राजस्थान पासिंग बताया गया था, को फारेस्ट नाका टेमरी के पास रोका गया। वाहन में सवार दो व्यक्त्यिों से पूछताछ की गई। खाली कैरेट के बीच 26 बोरियों में 165 पैकेट खाकी रंग की झिल्ली में अवैध मादक पदार्थ गांजा लिपटा मिला। खालीद और जाकिर हुसैन ने पुलिस को बताया  िकवे दोनों अलवर राजस्थान के हैं। आरोपियों ने बताया कि उड़ीसा के भवानीपटना से दिल्ली तक गांजा की आपूर्ति उनके द्वारा की जा रही थी। आरोपियों के कब्जे से 8 कुंटल 10 किलो गांजा जप्त किया गया है। जिसकी बाजार मूल्य एक करोड़ बासठ लाख रूपये है।  
बहरहाल नशे में उढ़ते छत्तीसगढ़ की चिंता करते हुए युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुबोध हरितवाल ने एसएसपी अजय यादव से मिलकर युवाओं के बीच ड्रग्स की चर्चा कर दस हजार रूपये प्रति ग्राम खरीदने वाले ग्राहकों तक पुलिस पहुंच कर सुरूर के समान पर रोक लगाएं। ताकि राजधानी रायपुर नशे की गिरफ्त से बच सके।
 

 

 

सियासत के शिकार संविदाकर्मी

  










कांग्रेस के घोषणा पत्र में था कि सरकार बनने के दस दिनों के बाद संविदा स्वास्थ्य कर्मियों को नियमित कर दिया जाएगा। 13 हजार एनएचएम कर्मी हड़ताल पर हैं। पांँच हजार कर्मचारी इस्तीफा दे चुके हैं। कांग्रेसी विधायक इनकी हड़ताल को जायज ठहरा रहे हैं। लेकिन मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री में तनतनी की सियासत का शिकार हड़ताली कर्मी हो रहे हैं।


0 रमेश कुमार ‘‘रिपु’’
                         छत्तीसगढ़ कांग्रेस में सियासत की नई भंगिमा देखी जा रही है। यहांँ मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री के बीच 63 की बजाए 36 का सियासी रिश्ता है। कभी स्वास्थ्य मंत्री टी.एस सिंह देव कांग्रेस सरकार में दूसरे नंबर के मंत्री माने जाते थे,लेकिन अब उनकी गिनती किस नंबर में होती है,कांग्रेसी भी नहीं जानते। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल उन्हें बायें कर दिए हैं। उनका नाम सरकार की प्रवक्ता सूची से हटा दिया गया है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और स्वास्थ्य मंत्री टी.एस सिंह देव में सत्ताई टकराहट का शिकार राज्य के 13 हजार संविदा स्वास्थ्य कर्मी हो रहेे हैं। उन्नीस सितंबर से हड़ताल पर हैं संविदा स्वास्थ्य कर्मी। लेकिन स्वास्थ्य मंत्री टी.एस सिंह देव बात करने की बजाए हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। पाँच हजार एनएचएम कर्मी इस्तीफा दे चुके हैं। आने वाले समय में प्रदेश के सभी संविदा स्वास्थ्य कर्मी इस्तीफा दे देंगे। अन्य कर्मचारी संगठन ने सरकार को धमकी में कहा है कि यदि सख्त  कार्रवाई किए तो उनके समर्थन में हम भी हड़ताल पर चले जाएंगे।  
पूर्व मंत्री एवं बीजेपी विधायक बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि राज्य में बीस हजार कोराना टेस्ट हर दिन हुआ करते थे। संविदा कर्मियों की हड़ताल से अब टेस्ट की संख्या दस हजार के करीब पहुंँच गई है। सरकार को इनसे बातें करके समस्या का हल निकाला जाना चाहिए। इसलिए भी कि कांग्रेस के घोषणा पत्र में है कि सरकार बनने पर दस दिनों के अंदर इन्हें नियमित किया जाएगा। सरकार की हटधर्मिता जनहित में नहीं है।’’
छवि खराब करने की साजिश
कांग्रेस के एक नेता ने कहा,सरकार मतलब मुख्यमंत्री होता है। चूंकि टी.एस सिंह देव की सत्ता में जो स्थिति थी, अब वो नहीं रही। इसलिए वे मुख्यमंत्री से वे नाराज चल रहे हैं। उनकी छवि खराब करने के मकसद से वे चाहते हैं कि संविदा कर्मी हड़ताल पर रहे हैं। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल गोधन न्याय योजना और राजीव गांधी न्याय योजना के जरिए अपनी छवि आम आदमियों के बीच चाऊर वाले बाबा से बेहतर बनाने की रणनीति बनाई। ताकि वे अगली बार भी मुख्यमंत्री बन सकें। लेकिन हैरानी वाली बात है कि   उनकी छवि जैसी बननी चाहिए, वैसी नहीं बन पाई। जो छवि बनी भी, उसे खराब करने एक खेमा पूरे जी जान से लगा हुआ है। कायदे से मुख्यमंत्री को स्वास्थ्य विभाग किसी युवा विधायक को देना चाहिए।’’
अन्य संगठनों का समर्थन
इस समय राज्य में एक लाख से अधिक कोराना मरीज हैं। सात सौ की जानें जा चुकी हैं। सरकारी अस्पताल में बेड खाली नहीं है। संविदा कर्मियों के हड़ताल से न केवल स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं बल्कि, कोरोना के चलते आम आदमी की जान संशय में है। स्वास्थ्य मंत्री की चुप्पी हैरानी वाली है ही ऊपर से उनका यह कहना की हड़ताल खत्म नहीं किए तो सभी को बर्खास्त कर दिया जाएगा।’’ उनके इस बयान पर अब हर जिले से इस्तीफा का सिलसिला शुरू हो गया है। वहीं छत्तीसगढ़ संयुक्त अनियमित कर्मचारी महासंघ, सर्व विभागीय संविदा कर्मचारी महासंघ, मनरेगा कर्मचारी संघ एवं विभिन्न कर्मचारी संगठनों ने हड़ताल का समर्थन कर सरकार की परेशानी बढ़ा दिये हैं। महासंघ के सचिव श्रीकांत लास्कर ने कहा, यदि हड़ताली कर्मचारियों पर किसी प्रकार की कार्रवाई की गई तो राज्य के समस्त संविदा कर्मचारी भी अनिश्चित कालीन हड़ताल करने बाध्य होंगे। समस्त विभागों में कार्यरत अनियमित संविदा दैनिक वेतन भोगी अधिकारी कर्मचारियों द्वारा 25 सितंबर से नियमितिकरण के समर्थन में काली पट्टी लगाकर काम कर रहे हैं।
विधायकों ने सीएम को लिखा पत्र    
कांगे्रस के विधायकों ने संविदा स्वास्थ्य कर्मियों की हड़ताल का समर्थन कर सरकार को संशय में डाल दिया है। विधायक अरुण वोरा ने मुख्यमंत्री को पत्र में लिख कर कहा, पिछले 7 माह से कोरोना काल में संविदा स्वास्थ्य कर्मी लगातार सेवाएं देते आए हैं। कांग्रेस अपने जन.घोषणा पत्र में किए वायदे को न भूले।‘‘ इससे पहले बसपा विधायक इंदू बंजारे, सौरभ सिंह, विनय भगत भी सी.एम को पत्र लिख चुके हैं। जबकि राजनांदगांव विधायक दलेश्वर साहू और महापौर हड़ताल मंच पर पहुंँच कर समर्थन किया। वहीं भिलाई विधायक और मेयर देवेंद्र यादव ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा, 16 साल से 13000 संविदा कर्मचारी अपनी सेवाएं दे रहे हैं। कोरोना में भी उन्होंने 7 माह से निष्ठा पूर्वक सेवा दी है। इसके चलते कई कर्मचारी संक्रमित भी हुए हैं। इनको स्वास्थ्य और अन्य सुविधाएं भी नहीं मिली। ऐसे में इनकी मांगों पर विचार किया जाना चाहिए।’’
एफआईआर के आदेश
जांजगीर में एनएचएम के 300 कर्मचारियों ने इस्तीफा दिया। इसमें डॉक्टर भी शामिल हैं। फावड़ा लेकर  बारिश में भीगते हुए सभी ने गोठान में गोबर उठाया। कर्मचारी बोले,गोबर बेचकर पैसा मुख्यमंत्री राहत कोष में जमा करेंगे। वहीं दूसरी ओर एनएचएम संचालक ने कर्मचारियों को 24 घंटे के भीतर ड्यूटी   ज्वॉइन नहीं करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी। बावजूद इसके बिलासपुर में 350, कोरिया में 300, अंबिकापुर में 250 और सुकमा में 136 से ज्यादा कर्मचारियों ने इस्तीफा दे दिया।ं सरकार ने  संघ के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत कुमार सिन्हा समेत 50 से ज्यादा कर्मचारियों को बर्खास्त कर,  एफआईआर दर्ज करने के आदेश देकर चैका दिया है। बस्तर में चार कर्मचारियों पर एफआईआर दर्ज करने के आदेश वहां के सीएमएचओ ने दिए। बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता संजय श्रीवास्तव ने कहा, आंदोलनरत स्वास्थ्य कर्मचारियों को वेतन देने की बजाए सरकार कोरोना काल मेें बर्खास्तगी का फरमान दे रही है। बिना पीपी किट,दास्ताना दिए कोरोना का इलाज करने, डाॅक्टरों का कह रही है। सरकार लोगों की जिन्दगी से खेल रही है।’’
निकाली गई भर्ती, मांगे आवेदन
हड़तालियों की कमर तोड़ने बलौदाबाजार में जिला चिकित्सा अधिकारी ने संविदा के 18 पदों पर भर्तियां निकाली। इनमें 6 ब्लॉक प्रोग्राम मैनेजर 6 ब्लॉक अकाउंट मैनेजर 6 ब्लॉक डाटा मैनेजर का पद शामिल है। वॉट्सऐप वीडियो कॉल के जरिए इंटरव्यू लिया जाएगा। सीएमएचओ मीरा बघेल ने कहा, रायपुर जिले में 700 संविदा स्वास्थ्यकर्मी हैं। इसमें से 150 हड़ताली कर्मचारियों की लिस्ट अभी उनके पास आई है। इसमें उन्होंने काम बंद करने की बात कही है। वैकल्पिक व्यवस्था कर काम किया जाएगा। कोई काम नहीं रुकेगा। थोड़ा प्रभावित जरूर होगा।’’
जनता की जान जोखिम मेंः जोगी
संविदा कर्मचारियों के समर्थन में जोगी कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अमित जोगी ने कहा,कोरोनाकाल में काम के कर्मचारियों को निकालने का मतलब जनता की जान जोखिम में डालना और अपने पैर पर कुल्हाड़ी मारना है। सरकार में यदि थोड़ी सी भी नैतिकता है, तो बीते 6 माह से कोरोना से लड़ने वाले इन कोरोना योद्धाओं को नोटिस के बजाय नियमितीकरण का आदेश जारी कर इनका सम्मान करें। आम आदमी पार्टी के बस्तर जिला अध्यक्ष तरुणा बेदरकर ने स्वास्थ्य मंत्री टी एस सिंहदेव की मार्मिक अपील को भावुक अत्याचार कहा है। इसी महामारी काल में छत्तीसगढ़ सरकार संसदीय सचिवों की नियुक्ति की, विधायकों का पेंशन बढ़ाया तो इस महामारी काल मे 24 घण्टे डयूटी देने वाले इन कर्मियों को नियमित करने में क्या परेशानी है? कायदे से दिल्ली की तर्ज पर कोरोना वारियर्स की मौत हो जाती है तो उनके परिवार को 1 करोड़ रूपये मुआवजा देना चाहिए।‘‘  
अपना वायदा छोड़ा नहींः सिंहदेव
स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने वीडियो जारी कर कहा है कि घोषणा पत्र के अपने वादों को हमने छोड़ा नहीं है। मुझे लगता है कि यह समय हड़ताल में जाने का नहीं है। नियम कानून अपनी जगह होते हैं। प्रश्न कार्रवाई का नहीं है, प्रश्न आपके विवेक का,आपकी समझदारी का है।’’
बहरहाल संविदा कर्मी अपनी हड़ताल को ताकत बना लिए हैं,वहीं सरकार में बैठे लोग अपने वायदे को अमल में लाने की बजाए एक दूसरे की आस्तीन खींचने की सियासत में लीन है। सवाल यह है कि प्रदेश कोरोना काल में विषम स्थिति के दौर से गुजर रहा है। यदि प्रदेश के सभी संगठन हड़ताल पर चले गए तो क्या होगा,इस को ध्यान में रखकर सरकार को जल्द फैसला करना चाहिए।
 

 
 
 

 

 

 

Wednesday, September 23, 2020

कोविड की बाढ़,खतरे में जान


कोरोना के सक्रिय मरीजों के मामले में छत्तीसगढ़ ने देश के दूसरे राज्यों को पीछे छोड़ दिया है।   कोरोना पीड़ितों की संख्या 60 हजार से ऊपर हो गई है। कोविड इलाज के लिए सरकारी अस्पतालों में बेड नहीं है। कई प्राइवेट अस्पतालों के पास सुविधाएं नहीं है। वहीं संविदा स्वास्थ्य कर्मी 19 सितंबर से अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर रहेंगे। करीब पांच सैकड़ा मौत के बीच मुख्यमंत्री का दावा कि कोरोना की आधी लड़ाई जीत गए हैं।  

 0 रमेश कुमार ‘‘रिपु’’

 











         

   छत्तीसगढ़ के जिला जांजगीर.चांपा निवासी संजय साहू कहते हैं,मार्च में प्रदेश सरकार   फ्रंट में आकर बड़े बड़े दावा कर रही थी। लेकिन अब स्थिति ठीक विपरीत है। राज्य के सरकारी अस्पताल के बेड से कई गुना कोरोना के मरीज हैं। अब मरीजों को बेड का इंतजार करना पड़ रहा है। यह शिकायत सिर्फ संजय साहू की नहीं, प्रदेश के हजारों कोविड मरीजों की है। टेस्ट रिपोर्ट पाॅजिटिव आने के बाद मरीजों को अस्पताल जाने की मनाही है।
सरकार का आदेश है बेड खाली होने पर मोबाइल पर सूचना आएगी और एबुलेंस ले जाएगी। अब प्राइवेट अस्पताल भी कोविड का इलाज कर सकेंगे। इलाज की दर भी तय कर दी गई है। ए,बी,सी तीन श्रेणियां बनाई गई है। राजधानी में 6200 से 17 हजार रुपए प्रतिदिन इलाज का खर्च है। सबसे ज्यादा खर्च ए.श्रेणी के शहर के लिए तय किया गया है। ए श्रेणी में 6, बी श्रेणी में 8 और सी.श्रेणी में 14 जिलों को रखा गया है।
एनएबीएच मान्यता प्राप्त निजी अस्पतालों में सामान्य मरीजों के इलाज के लिए 6200 रुपए प्रतिदिन का शुल्क तय किया गया है। वहीं एनएबीएच से गैर मान्यता प्राप्त निजी अस्पतालों के लिए सामान्य गंभीर और अति गंभीर मरीजों के इलाज के लिए प्रतिदिन 6200 रुपए से 10 हजार और 14 हजार रुपए शुल्क तय किया गया है। जाहिर है कि आम आदमी कोरोना का इलाज कराने की हैसियत नहीं रखता।
नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने कहा कि संक्रमितों को अस्पताल, एम्स और अंबेडकर हॉस्पिटल के आईसीयू में बेड नहीं मिल रहे। सरकार की महामारी से लड़ने इच्छा शक्ति कम है। प्रदेश में करीब 25 कोविड हास्पिटल हैं। निजी और शासकीय अस्पताल में केवल 11544 बिस्तर ही उपलब्ध हैं। राज्य में कोविड अस्पतालों की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए। पीड़ित परिवार इलाज के लिए भटक रहे हैं।’’  कांग्रेस प्रवक्ता आनंद शुक्ला ने कहा, पूर्ववर्ती रमन सरकार ने स्वास्थ्य सुविधाओं पर थोड़ा भी ध्यान दिया होता, कोरोना काल मे राज्य की स्वास्थ्य सुविधाओं को सुधारने में इतनी मशक्कत नहीं करनी पड़ती। जिला अस्पतालों उपस्वास्थ्य केंद्रों तक चिकित्सकों और पैरा मेडिकल स्टाॅफ की भर्तियां नहीं की डॉक्टरों के 75ः पद खाली थे और मेडिकल कालेजों तक मे विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्तियां नहीं कर पाये थे।  
जांजगीर चांपा सहित अनेक जिलों में अभी किसी भी प्राइवेट अस्पताल के संचालकों ने इलाज करने की सहमति नहीं दी है। जिले में कोविड मरीजों की संख्या 18 सौ पार हो गई है। जिले के अधिकांश प्राइवेट अस्पतालों में केवल एक ही इंट्रेस व एक्जिट गेट हैं। जबकि कोविड पेशेंट के आने,जाने के लिए अलग और स्टाफ के लिए अलग अलग रास्ते होना चाहिए। यह समस्या सिर्फ जांजगीर-चांपा जिले की नहीं,बल्कि प्रदेश के हर जिले की है।  
स्वास्थ्य कर्मी नाराज़
राज्य सरकार ने अपनेे चुनावी जन घोषणा पत्र में संविदा कर्मचारियों के नियमित करने का वादा किया  था। राज्य के सभी जिला चिकित्सालय,कोविड केयर सेंटर, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों,प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों,उपस्वास्थ्य केन्द्रों,ं सभी कार्यालयों में कर्मचारी 25 अगस्त से काली पट्टी लगाकर काम कर रहे थे। छत्तीसगढ़ प्रदेश कर्मचारी संघ के बैनर तले यह निर्णय लिया गया है कि राज्य के 13 हजार संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी नियमिती करण संबंधी मांगों को लेकर 19 सितंबर से हड़ताल पर चले जाएंगे। प्रदेश एनएचएम संघ अपनी मांगों को लेकर मुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव से मिल चुके हैं। लेकिन कोई सार्थक आश्वासन नहीं मिला है। इस हड़ताल से कोरोना टेस्ट और इलाज प्रभावित होगा   प्रदेश एनएचएम संघ के महासचिव कौशलेश तिवारी कहते हैं,संविदा पदों के नियमितीकरण की प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए थी किन्तु सरकार हमारी मांगांे को नजर अंदाज कर, वर्तमान में स्वास्थ्य विभाग में 2100 पदों पर नियमित भर्ती कर रही है। जाहिर सी बात है कि सरकार का नजरिया ठीक नहीं है।’’  
आंगन बाड़ी क्यों खोल रहे हैं
प्रदेश में 60 हजार से ज्यादा कोरोना के मरीज हैं,इलाज की व्यवस्था नहीं है। ऐसे समय में सरकार ने 7 सितंबर को आंगनबाड़ी खोलने का आदेश दिया। पूर्व मंत्री एंव विधायक बृजमोहन अग्रवाल कहते हैं सरकार 5 साल से कम उम्र के बच्चों एवं गर्भवती माताओं के साथ,साथ आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की जिंदगी से खिलवाड़ करने पर तुली हुई है। शहर से लेकर गांव तक संक्रमित मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इस काम के लिए ना तो उनके पास थर्मामीटर है और ना ही थर्मल स्कैनर है और ना ही उन्हें पीपीई किट दिया गया है। फिर भी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को ऐसा निर्देश देकर सरकार उनकी जिंदगी से क्यों खिलवाड़ कर रही है?
छग कोरोना लड़ाई में पिछड़ा
कोविड को लेकर सबसे ज्यादा खराब स्थिति राजधानी रायपुर की है। स्वास्थ्य विभाग ने रोजाना 2400 सैंपल टेस्ट करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए कोविड जांच केंद्रों की संख्या भी बढ़ाई गई है लेकिन, समय और एंटीजन किट के अभाव में यह संभव नहीं हो पा रहा है। दूसरी ओर कोरोना की लड़ाई में छत्तीसगढ़ देश के सबसे खराब राज्यों में दूसरे पायदान पर है। राजधानी रायपुर की स्थिति कोरोना संक्रमण को लेकर बिगड़ती जा रही है। सबसे ज्यादा मरीज यहीं मिल रहे हैं और मौतों का आंकड़ा भी। आंकड़ों की बात करें तो प्रदेश में अभी तक 77540 संक्रमित मिले हैं। इनमें से ठीक होने वालों की संख्या महज 21898 यानी रिकवरी रेट 45 फीसदी से कम है। इससे नीचे नार्थ ईस्ट का छोटा सा राज्य मेघालय है। 31 जुलाई तक कोरोना पॉजिटिव 9191 थे,लेकिनं 31 अगस्त तक आंकड़ा 31502 हो गया। ऐसा समझा रहा है कि सितंबर के अंत तक यह संख्या एक लाख के पार पहुंच सकती है। प्रदेश में हर 10 लाख की आबादी में 1097 पॉजिटिव मिल रहे। राष्ट्रीय स्तर पर यह संख्या 2801 है। अभी प्रत्येक 10 लाख की आबादी पर 20280 टेस्ट हो रहे हैं। प्रदेश में टेस्ट पॉजिटिव रेट 5.4 फीसदी है जो कि राष्ट्रीय औसत का 8.6 फीसदी है।
समस्या यह भी
कोविड केयर सेंटर और कोविड अस्पताल में परिजनों को उनके मरीजों के स्वास्थ्य की जानकारी देने की व्यवस्था नहीं है। भिलाई के कोविड अस्पताल में न डिजिटल एक्सरे मशीन है। न ही सीटी स्कैन मशीन। एक्सरे फिल्म देखने विव बॉक्सेस भी नहीं है। आउट डेटेड कानवेंशनल एक्सरे मशीन लगाकर खानापूर्ति की जा रही है। प्रोटोकाल के अनुसार कोविड केयर सेंटर में आईसीयू डील करने के लिए परमानेंट निश्चेतना विशेषज्ञ और चेस्ट फिजिशियन,जनरल फिजिशियन नहीं हैं। पॉजिटिव मरीजों को ट्रेस कर अस्पताल पहुंचाने पर्याप्त संख्या में कर्मचारी नहीं है। प्रोटोकाल के अनुसार गंभीर मरीजों को रेफर करने के लिए परमानेंट एंबुलेंस का काम 108 एंबुलेंस को दिया गया है। यहां तक की कोविड केयर सेंटर में भी परामानेंट एंबुलेंस नहीं है।
सरकारी अस्पताल में खुदकुशी
कोविड सेंटर में खाने की व्यवस्था को लेकर भारी शिकायत है ही, सरकारी अस्पतालों में अव्यवस्था चरम पर है। मरीजों का ध्यान नहीं दिये जाने की वजह से अस्पताल में ही खुदकुशी की वारदात हो रही है। मुंगली जिले के मातृ एवं शिशु अस्पताल लोरमी में बलौदाबाजार निवासी 47 वर्षीय अनिल जायसवाल कोरोना पाॅजीटिव था, ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली है। सात सितम्बर से वह   अस्पताल में भर्ती था। तीन दिनों बाद मरीज वार्ड की खिड़की सेे अपने गमछे से फांसी लगाकर खुदकुशी कर लिया।  
बहरहाल इस बीमारी ने लोगों की जिन्दगी और आकांक्षाओं को बदल दिया है। वहीं सरकार से आम व्यक्ति को जो उम्मीदें थी, अब वो ध्वस्त हो गई है। रोजगार की किल्लत और वित्तीय अनिमितता से जूझ रहे प्रदेश के लोगों के सामने सबसे बड़ी समस्या है, कैसे कोविड से मुकाबला करें,इसलिए कि सरकार को लोगों की जान की परवाह नहीं है।
 
 
 

आदिवासियों की अनदेखी











पेशा कानून और पांँचवी अनुसूची का पालन करने की बजाए,भूपेश सरकार ग्राम सभा से फर्जी अनुमति पत्र के जरिये आदिवासियों की जमीन उद्योगपतियों को दे रही हैं। खनन में माओवादी रोड़ा न बन सकें,निजी कंपनियों को पुलिस का संरक्षण दिया गया है। कांग्रेस के घोषणा पत्र में था,सरकार बनने पर फर्जी आरोप में बंद, आदिवासी रिहा किए जाएंगे। आदिवासियों के हितों की अनदेखी से अब भूपेश सरकार कटघेरे में है।  
0 रमेश कुमार ‘‘रिपु’’
              छत्तीसगढ़ में भूपेश सरकार लाल लड़ाकों को उनके गढ़ में कैसे मात देगी,अभी तक कोई योजना नहीं बना सकी है। जगदलपुर समेत बस्तर के शहरी इलाकों के एकदम करीब तक, नक्सलियों के बैनर,पोस्टर लगने का यह सीधा संकेत है कि, नक्सलियों का सामाजिक जीवन में और दबाव बढ़ने का खतरा बढ़ा है। पिछले बीस साल में 1769 निर्दोष आदिवासी ग्रामीणों की माओवादियों ने जानें ले ली। मगर, लाल गलियारे का दायरा कम नहीं हुआ। दंतेवाड़,बीजापुर और नारायणपुर में नक्सलियों के उत्पात में कोई कमी नहीं आई। अपने हितों की अनदेखी पर अब नाराज आदिवासी विरोध प्रदर्शन कर सरकार को उनके घोषणा पत्र की ओर ध्यान खींचा है। बस्तर संभाग की 12 सीटों को जीतने कांग्रेस ने, अपने घोंषणा पत्र में लिखा था कि,उनकी सरकार बनने पर जेल में बंद सभी    फर्जी नक्सलियों को रिहा कर दिया जाएगा। दो साल बाद भी भूपेश सरकार ने अपने घोंषणा पत्र की ओर ध्यान नहीं दिया।
आदिवासियों ने खोला मोर्चा
नक्सल और जंगल से जुड़े कई मामलों में आदिवासियों को फंसा कर जेलों में बंद किये जाने पर उनकी रिहाई की मांग को लेकर 14 सितम्बर को बड़ी तादाद में महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे नकुलनार, श्यामगिरि,पालनार इलाके में 50-100 किलोमीटर की पैदल यात्रा करके पहुंचे थे। ये ग्रामीण सरकार से अपने परिवार या गाँव के लोगों को रिहा करने की मांग कर रहे थे। इस प्रदर्शन में सुकमा, बीजापुर,नारायणपुर और दंतेवाड़ा जिले के हजारों ग्रामीण पैदल जिला मुख्यालय दंतेवाड़ा जाने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन दंतेवाड़ा से करीब 50 किलोमीटर पहले ही कुआकोंडा तहसील के श्यामगिरी गाँव में पुलिस जवानों ने इन्हें रोका और इनके साथ सख्ती से पेश आए। लाठी चार्ज में कई ग्रामीणों को चोटें आने पर जंगल और पहाड़ की ओर भाग गए। ग्रामीण आदिवासियों ने अपने नेताओं से संपर्क किया। दूसरे दिन अरविंद नेताम, सोनी सोरी और सुजीत कर्मा के नेेतृत्व में ग्रामीणों ने थाने का घेराव किया।  
ग्रामीणों की मांग
चुनाव से पहले कांग्रेस सरकार ने आश्वासन दिया था कि,फर्जी एनकाउंटर और फर्जी मुठभेड़ बंद होगी। निर्दोष आदीवासी बंदी और विचारधीन बंदी,कैदियों के रिहाई की जाएगी। सरकार की ओर से अनदेखी किए जाने से नाराज आदिवासियों ने अपनी प्रमुख माँंगों को लेकर सड़कों पर उतरे। इनकी मांँग है कि जेल में तीन साल से अधिक फर्जी नक्सली मामले में जेल काट रहे आदिवासी बंदियों को निशर्त रिहा किया जाए। आदिवासियों पर यूएपीए की धाराएं लगाना बंद किया जाए। कोरोना महामारी संकट से कैदियों का जान बचाने के लिए जमानत पर तुरंत रिहा किया जाये। जेल में बंद कैदियों को उनके परिवार वालो से मित्रो से मुलाकात करने का मौका देना चाहिए और उन्हें जरूरतमंद सामान दिया जाए। जेल में क्षमता के अनुरूप ही कैदियों को रखा जाए। जेल में अपनी समस्या बता रहे कैदियों को बर्बर तरीके से पीटा जा रहा है, इस गैर कानूनी अमानवीय कृत्य को रोकना जाए। पेशा कानून और पांचवीं अनुसूची का पालन किया जाए। शिक्षा और स्वस्थ्य विकास की मांग को पूरा किया जाए। वहीं मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि, पटनायक समिति के माध्यम से छोटे,छोटे प्रकरणों में जेल में बंद आदिवासियों की रिहाई के लिए कार्रवाई का आदेश दिया गया है। पटनायक समिति के समक्ष 625 प्रकरण प्रस्तुत किए गए थे। जिनमें 404 प्रकरणों में समिति ने अनुशंसा की है। न्यायालय से 206 प्रकरण निराकृत किए गए हैं।‘‘  
आर,पार की लड़ाई लड़ेंगे: सोरी  
रिहाई मंच की प्रमुख सोनी सोरी ने बताया,‘‘पुलिस ने प्रदर्शन में शामिल कई ग्रामीणों को बर्बरता से मारा,पीटा है। हम खाली हाथ ही आये थे। क्योंकि हम सिर्फ सरकार से बात करना चाहते थे। मगर वो भी हमें नहीं करने दिया गया और हम लोगों को बुरी तरह खदेड़ा गया। घायल ग्रामीणों को देखकर इस बार हमें मजबूरन लौटना पड़ रहा है। मगर हमने हार नहीं मानी है। अगली बार हम सरकार से आर,पार की लड़ाई लड़ेंगे।‘‘
खनन के ठेका का विरोध  
भूपेश बघेल सरकार आदिवासियों के हितों की जगह उद्योगपतियों को ज्यादा तरजीह दीे रही है। जैसा कि दंतेवाड़ा के गुमियापाल पंचायत के आश्रित ग्राम आलनार के पहाड़ में लौह अयस्क की खदान है। जिसे आरती स्पंज आयरन कम्पनी को खनन के लिए दिया गया है। नक्सली गतिविधियों की वजह से   आरती स्पंज आयरन कम्पनी अब तक लौह अयस्क का खनन नहीं कर सकी है। कंपनी के खनन में आदिवासी रोड़ा न बनें,इसलिए सरकार ने गुमियापाल में पुलिस का नया कैंप स्थापित किया है।   ग्रामीणों ने कहा कि सुरक्षाबलों का काम, हमारी सुरक्षा करना है लेकिन,इनसे बड़ी कंपिनयों के लिए जमीन अधीग्रहण का काम लिया जा रहा है। बैलाडीला क्षेत्र के ग्रामीण माइंस और जमीन अधिग्रहण का विरोध करते हुए हजारों ग्रामीण किरंदुल थाना क्षेत्र के ग्राम गुमियापाल में इकट्ठे हुए। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन वास्तविक ग्रामसभा की बजाए, फर्जी तरीके से ग्राम सभा करके, लौह अयस्क खनन के अलावा दूसरे काम भी कर रहे हैं। जनपद सदस्य राजू भास्कर ने कहा कि ग्रामीणों की मांँग है कि आलनार ग्रामसभा को भी हिरोली की तरह शून्य घोषित कर आरती स्पंज आयरन कंपनी को दी गई लीज को निरस्त किया जाए।
फर्जी ग्रामीण सभा
ग्रामीणों के मुताबिक पूर्व में हिरोली की ग्रामसभा आखिर फर्जी साबित हुई और आलनार ग्रामसभा की स्थिति भी वैसी ही है। पूरे बस्तर सभंग में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 244(1) पांचवीं अनुसूची लागू है। इसके बावजूद ग्रामसभा की अनुमति लिए बगैर गांँवों के जमीन का अधिग्रहण कर सरकार लीज पर दे रही है। यह आदिवासियों के अधिकार पर प्रहार है।  
आदिवासी युवाओं को मिलेगी वर्दी
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सलवा जुडूम की तर्ज पर बस्तर विशेष बल के गठन का निर्देश दिए हैं। इस विशेष बल में बस्तर के संवेदनशील क्षेत्रों की ग्राम पंचायतों के स्थानीय युवाओं को भर्ती किया जाएगा। भूपेश सरकार इसे नक्लवाद के खात्मे के लिए एक बड़ा प्लान मानती है। बस्तर अंचल की कठिन भौगोलिक परिस्थितियां और स्थानीय भाषा की जानकारी पुलिस के लिए बड़ी चुनौती है। मुख्यमंत्री का तर्क है कि अंदरूनी गांँवों के युवाओं को भर्ती करने से पुलिस का काम आसान हो जाएगा। जाहिर सी बात है कि एक तरफ नक्सली आदिवासी दूसरी तरफ पुलिस आदिवासी। दोनों एक दूसरे के सीने में गोली दागेंगे।
आदिवासियों की अनदेखीः  संजय
भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता संजय श्रीवास्तव ने कहा कि नक्सली उन्मूलन के लिए लगभग दो साल में भी कोई ठोस रणनीति नहीं बनाई जा सकी है। नक्सलियों के प्रति प्रदेश सरकार का नरम रुख कई संदेह और सवाल खड़े कर रहा है। रिहाई की मांग को लेकर नक्सलियों के दबाव से जूझती प्रदेश सरकार इन लोगों की रिहाई से जुड़ी तकनीकी दिक्कतों को लेकर हिचकिचा रही है, और खुद की परेशानी से बचने के लिए अब नक्सलियों से अपनी मित्रता निभाती दिख रही है।’’  
बस्तर पुलिस का प्रति प्रचार युद्ध   
पुलिस महानिरीक्षक बस्तर रेंज सुंदरराज पी. का मानना है कि माओवादियों के विकास विरोधी एंव जन विरोधी का चेहरा उजागर होना जरूरी है। इसलिए उनके खिलाफ प्रति प्रचार युद्ध किया जा रहा है। क्षेत्रीय बोली और भाषा में बैनर पोस्टर, लघु चलचित्र, ऑडियों क्लिप, नाच-गाना, गीत-संगीत एवं अन्य प्रचार,प्रसार के माध्यम से माओवादियों के काले कारनामों को उजागर किया जायेगा। यह सब स्थानीय गोंडी भाषा एवं हल्बी भाषा में किया जा रहा है। यह अभियान स्थानीय नक्सल मिलिशिया कैडर्स एवं नक्सल सहयोगियों को हिंसा त्याग कर समाज की मुख्यधारा में शामिल होने आत्मसमर्पण हेतु प्रेरित करेगा। माओवादियों को लेकर चित्रों के माध्यम से यह बताने और समझाने की कोशिश पुलिस ने किया है कि माओवादी सड़क, स्कूल, पुल उद्योंगो का विरोध कर विकास का विरोध करते हैं। माओवादियों की कू्ररता को बताने उनकी हत्या का भी जिक्र पोस्टर में किय गया है।
बहरहाल आदिवासियों को नाराज करके कोई भी सरकार बस्तर से नक्सलियों को नहीं खदेड़ सकती। इसी का फायदा नक्सली उठा रहे हैं।
 
 

 
 
 
 
 

Wednesday, September 9, 2020

सरकार से तनातनी

    











लाॅक डाउन से अर्थव्यवस्था की चूलें हिल गई है। भूपेश सरकार जीएसटी की बकाया राशि नहीं मिलने और नगरनार स्टील प्लंाट को निजी हाथों में देने से, केन्द्र सरकार से नाराज है। वहीं राज्य की बीजेपी भूपेश सरकार पर हर मोर्चे पर फेल बता रही है। चुनौती दोनों के सामने है। राज्य सरकार के समक्ष अजीविका और जिन्दगी बचाने की सबसे बड़ी समस्या है। सवाल यह है कि गिरती जीडीपी के बीच कैसे उबरेगी सरकार।  
0 रमेश कुमार ‘‘रिपु‘‘
                     छत्तीसगढ़ कोविड 19 के शिकंजे में नहीं थी, तब एक निजी एजेंसी की सर्वे रिपोर्ट मे,ं गैर भाजपा शासित राज्यों की तुलना में भूपेश देश के श्रेष्ठ मुख्यमंत्री थे। पांच महीने बाद देश के श्रेष्ठ मुख्यमंत्री के हाथ पांव फूलने लगे हैं। भूपेश सरकार के सिस्टम को कोरोना हो जाने की वजह से आज, कोरोना मरीजों की संख्या 36 हजार के पार हो गई है। जबकि मार्च में 11 में से सिर्फ एक मरीज करोना का था। राजधानी रायपुर में हर दिन करीब बारह सौ मरीज कोरोना के निकलने लगे हैं। प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष धरमलाल कौशिक कहते हैं,‘‘ प्रदेश सरकार ने आज तक सर्वदलीय बैठक कोरोना के संदर्भ में नहीं की। सरकार का सिस्टम कोरोना पर नकेल लगाने में फेल हो गया। क्वारेंटाइन सेंटर में भारी अव्यस्था की वजह से मरीज वहां से भागने लगे हैं’’।
अनैतिक दबाव बना रहा केन्द्रः सिंह
कोरोना की वजह से प्रदेश सरकार के समक्ष अजीविका और जिन्दगी बचाने की सबसे बड़ी समस्या है। बस ट्रांसपोटर्स को कोरोना की वजह से साढ़े सात सौ करोड़ का नुकसान हुआ। प्रदेश के 350 उद्योगों मंे उत्पादन रूक जाने से अरबों का नुकसान हुआ। प्रदेश सरकार ने सभी विभागों के बजट में तीस फीसदी की कटौती की घोंषणा की। ऐसी विषम परिस्थियों में भूपेश सरकार ने तीन हजार करोड़ से अधिक कर्ज अब तक ले चुकी है। गोधन योजना,राजीव गांधी न्याय योजना की राशि किसानों को देने के लिए। स्वास्थ्य एवं वाणिज्य मंत्री टीएस सिंह देव ने कहा,‘‘ हमें कर्ज लेने की स्थिति न आती। जीएसटी क्षतिपूर्ति प्रदान करना केंद्र सरकार का दायित्व है और वर्तमान में अक्षम नजर आ रही है। केंद्र को स्वयं ऋण लेकर राज्यों को क्षतिपूर्ति प्रदान करनी चाहिए। जीएसटी का उद्देश्य एक राष्ट्र एक कर था। सभी राज्यों ने क्षतिपूर्ति प्रदान करने के आधार पर सहमति दी थी। लेकिन वर्तमान में   भाजपा अनैतिक निर्णय कर राज्यों पर दबाव बना रही है। आरबीआई से कर्ज के नाम पर केंद्र सरकार बोझ डाल रही है। महामारी में ऐसा करना क्रूरता है।’’
भूपेश ने लिखा मोदी को पत्र
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल कहते हैं,हमारी सरकार छत्तीसगढ़ को बदलने में लगी है। हमारे लिए आदिवासी और किसान ही सर्वोपरि हैं। जबकि केन्द्र की बीजेपी सरकार छत्तीसगढ़ के लोगों का अहित कर है, फिर भी बीजेपी के सांसद और विधायक की चुप्पी हैरान करती है। पिछले साल अगस्त में जीएसटी का संग्रहण 1873 करोड़ था, जो इस साल बढ़कर 1994 करोड़ रूपये। वसूली में 6 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। राज्य का पैसा केन्द्र सरकार नहीं देगी तो सरकार जनहित के काम कैसे करेगी? नगरनार स्टील प्लांट को केन्द्र सरकार निजी हाथों में सौपने की तैयारी कर रही है लेकिन, बीजेपी के एक भी विधायक और सांसद ने इस मामले में पी.एम को पत्र तक नहीं लिखा। जाहिर है कि बीजेपी नहीं चाहती कि यहां के लोगों को नगरनार स्टील प्लांट का लाभ मिले। एनएमडीसी द्वारा करीब 20 हजार करोड़ रूपए की लागत से बस्तर में नगरनार स्टील प्लांट का निर्माण किया जा रहा है। इस स्टील प्लांट से बस्तर की बहुमूल्य खनिज सपंदा का दोहन होगा, साथ स्थानीय युवाओं को रोजगार भी मिलेगा। इससे बस्तर के साथ ही राष्ट्र निर्माण में भी इसके सहयोग को याद किया जाएगा। बस्तर के नगरनार स्टील प्लांट को निजी लोगों के हाथों में बेचने से लाखों आदिवासियों की उम्मीदों और आकांक्षाओं को गहरा आघात पहुंचेगा’’। गौरतलब है कि नगरनार स्टील प्लांट में लगभग 211 हेक्टेयर सरकारी जमीन छत्तीसगढ़ शासन की है। 27 हेक्टेयर जमीन 30 वर्षों के लिए सशर्त एनएमडीसी को दी गई है। बाकी पूरी शासकीय जमीन छत्तीसगढ़ शासन के स्वामित्व की है और राज्य शासन ने जो जमीन उद्योग विभाग को हस्तांतरित की है,उसकी पहली शर्त यही है कि उद्योग विभाग द्वारा भूमि का उपयोग केवल एनएमडीसी द्वारा स्टील प्लांट स्थापित किये जाने के प्रयोजन के लिए ही किया जायेगा।
अडानी से जमीन सरकार दिलाए
सरगुजा जिला प्रशासन को जांच से पता चला कि परसा ईस्ट केते बासन कोल ब्लॉक में अडानी ने ग्रामीणों की जमीन अवैध तरीके से हड़प लिया है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार अडानी के खिलाफ एफआईआर दायर कर कोल खनन के लिए दी गई,स्वीकृति जमीन किसानों को वापस कराए। छग किसान सभा के अध्यक्ष संजय पराते और महासचिव ऋषि गुप्ता ने कहा कि नोटरी के शपथ पत्र पर किसानों की जमीन खरीदना अवैध है। अडानी इंटरप्राइजेज जैसी कॉर्पोरेट कंपनियों को न कानून की और न ही लोगों के अधिकारों व आजीविका की चिंता। ग्राम सभाओं के विरोध के बावजूद प्रशासन से मिलीभगत करके ग्राम सभाओं के फर्जी प्रस्ताव बनाकर पर्यावरण स्वीकृति हासिल की। कायदे से अब गांवों के सामुदायिक अधिकारों को बहाल किया जाना चाहिए। जिसे तत्कालीन भाजपा सरकार ने वर्ष 2016 में खारिज कर दिया था। सरगुजा में व्यक्तिगत वनाधिकार पत्रकों को भी सरपंचों की मदद से प्रशासन के अधिकारियों द्वारा छीने जाने के कई प्रकरण मौजूद है। ऐसे सभी पीड़ित आदिवासियों के वनाधिकार पत्रक लौटाए जाएं।   
नकली खाद,बीज पर बहस
विधायक अजय चन्द्राकर ने कहा, निजी लैब में जांच की रिपोर्ट लगाकर अमानक खाद और बीज बेचने वाली कंपिनयों को सरकार तरजीह दे रही है। जांजगीर के नवागढ़ जैजैपुर ब्लाक में 12 हजार एकड़ में धान अंकुरित नहीं हुए। कृषि मंत्री रविंद्र चैबे ने कहा कि राज्य बीज प्रमाणीकरण संस्था से अनुमति के बाद बीज वितरण किया गया है। 12 हजार एकड़ में धान अंकुरित नहीं होने की बात आधारहीन है। कलेक्टर की जांच में पता चला कि तुलसी से 26 बोरी धान भीगने के कारण कम अंकुरित हुआ था। डीएनए टेस्ट केवल हाइब्रिड बीजों का किया जाता है। सत्या नाम की कोई भी संस्था बीज विकास निगम में अनुबंधित नहीं है।  
 मांग से कम यूरिया
कृषि वैज्ञानिक पी एन सिंह के अनुसार एक एकड़ धान की खेती के लिए 200 किलो यूरिया खाद चाहिए। छत्तीसगढ़ में लगभग 39 लाख हेक्टेयर में धान की खेती होती है। ऐसे में प्रदेश को 19 लाख टन यूरिया चाहिए। जबकि सहकारी समिति को केवल 6.3 लाख टन यूरिया सरकार ने उपलब्ध कराया है। इस प्रकार प्रदेश में प्रति हेक्टेयर यूरिया की उपलब्धता केवल 122 किलो और प्रति एकड़ 49 किलो ही है। बाकी 12.13 लाख टन यूरिया के लिए किसान बाजार पर निर्भर है। देश मे रासायनिक खाद का पूरे वर्ष में प्रति हेक्टेयर औसत उपभोग 170 किलो है,जबकि छत्तीसगढ़ में यह मात्र 75 किलो ही है। दावा है कि 18 अगस्त तक सरगुजा संभाग में 18825 टन यूरिया की आपूर्ति की जा चुकी है, लेकिन सहकारी समितियों तक यह सप्लाई नहीं हुई है। यही वजह है कि धमतरी, कांकेर, सरगुजा, अंबिकापुर आदि जिलो में किसान यूरिया के लिए सड़कों पर उतर रहे हैं। छत्तीसगढ़ की 1333 सहकारी समिति में 14 लाख सदस्यों में से 9 लाख सदस्य समिति से लाभ प्राप्त करते हैं। प्रदेश में 8 लाख बड़े और मध्यम किसान है।  
विपक्ष का अरोप
बीजेपी उपध्याक्ष सच्चिदानंद उपासने ने कहा, प्रदेश सरकार ने मंत्रियों और विधायकों के अधिकार छीन लिए। कर्ज लेकर सरकार चल रही। राज्य में सरकार नही, माफिया राज चल रहा। स्मार्ट गांव बनाने का दावा करते हैं, लेकिन एक गांव का नाम बता दें। पंचायतों में धान सड़ रहा, शराब माफिया की नजर है। सरकार ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को कुचला। प्रदेश में पिछले साल 7629 लोगों ने आत्महत्या की। जिसमें 233 किसान भी हैं। यह प्रदेश के लिए शर्मनाक बात है।
सत्ता पक्ष का तर्क
प्रदेश कांग्रेस के संचार विभाग के प्रमुख शैलेश नितिन त्रिवेदी ने कहा,भाजपा नेताओं की वफादारी मोदी के प्रति तो दिखती है लेकिन, छत्तीसगढ़ की जनता के हितों और हकों के प्रति नहीं। मोदी के प्रति वफादारी साबित करने के लिए इनने छत्तीसगढ़ की जनता की जरूरतों, दुख, दर्द और तकलीफ की अनदेखी की हैं। भाजपा के नेता कह रहे हैं कि, राज्य सरकार कर्ज लेती जा रही है। किसानों के साथ जो वायदा किया है, उसे पूरा करने के लिए कर्ज ले रहे हैं। मोदी सरकार संसाधन उपलब्ध नहीं करवा रही है और भाजपा नेता राजनीति कर रहे हैं। केंद्र सरकार छत्तीसगढ़ के साथ अन्याय कर रही है फिर भी भाजपा नेता चुप हैं।  
बरहाल,राजनीतिक विरोध अपनी जगह है। अधिकतर लोगों में सामान्य आर्थिक परिस्थितियों, रोजगार, मंहगाई और को लेकर हताशा है। सामान और सेवाओं की मांग में भी भरी कमी आई है। कायदे से सरकार को उद्योग जगत में कैसे जान फूंकने के लिए क्या कदम उठाए जाएं, इसकी पहल की जानी चाहिए।
 
 

 
 
 
 
    
 

गोबर से बदलती किस्मत

 









गोधन न्याय योजना ग्रामीणों के लिए आजीविका का साधन बन रहा है। वहीं विपक्ष का आरोप है कि बिहार के चारा घोटाला की तरह गोबर घोटाला की कहानी भी आकार लेने लगी है। एक पशुपालक को पन्द्रह दिनों के गोबर बेचे जाने का 44 हजार रूपया भुगतान किया गया। यानी गाय एक दिन में 59 किलो गोबर देती है।
0 रमेश कुमार ‘‘रिपु’’
            कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर विकासखण्ड के ग्राम मुंगवाल के रति राम कुमेटी के पास एक भी पालतू मवेशी नहीं है। बावजूद इसके वे 70 से 80 किलो गोबर प्रति दिन गोठान में बेचते हैं। रति राम के तीन एकड़ जमीन है। जिसमें धान की फसल ले रहे हैं। रतिराम खुश हैं कि वे रोज घूम घूम कर गोबर एकत्र कर, बेचने पर डेढ़ पौने दो सौ रूपया पा जाते हैं। सिर्फ रतिराम ही नहीं, प्रदेश में ऐसे लोगों की संख्या अब बढ़ती जा रही है। जाहिर है कि भूपेश सरकार ने ग्रामीण अर्थव्यस्था को मजबूत करने के मकसद से गोधन न्याय योजना शुरू की है,उसके परिणाम अब दिखने लगे हैं। गोरतलब है कि छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य है, जहां सरकार गोबर खरीदती है।        
मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने  20 जुलाई हरेली पर्व के दिन गोधन न्याय योजना की शुरूआत की। राज्य के पशुपालक, किसान एवं ग्रामीणों से दो रूपए किलो की दर से गौठानों में गोबर बेच रहे हैं। सुराजी गांव योजना के तहत अब तक राज्य में कुल 4377 गौठानों का निर्माण किया जा चुका है। इनमें से 4341 गौठानों में गोबर खरीदी की जा रही है। राज्य में पशुपालन को बढ़ावा देने, उनका संरक्षण एवं संवर्धन किया जाना इस योजना का उद्देश्य है। गोधन न्याय योजना के तहत क्रय गोबर से वर्मी कम्पोस्ट तैयार करना, जैविक खेती को बढ़ावा देना तथा ग्रामीण अर्थ व्यवस्था को बेहतर बनाने के साथ ही लोगों को रोजगार से जोड़ना है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल 20 अगस्त को राजीव गांधी की जयंती के अवसर पर गोबर बेचने वाले ग्रामीणों, किसानों एवं पशुपालकों को 4 करोड़ 50 लाख 12 हजार 500 रूपए की राशि उनके खाते में स्थानांतरित की। यह राशि राज्य के 4341 गौठानों में 2 अगस्त से 15 अगस्त तक क्रय किए गए गोबर का है। यानी 20 जुलाई से 15 अगस्त तक क्रय गोबर के एवज में कुल 6 करोड़ 17 लाख 60 हजार 200 रूपए का भुगतान किसानों ग्रामीणों एवं पशुपालकों को मिला। एक रिर्पोट के मुताबिक राज्य में प्रतिदिन औसत रूप से 11 हजार क्ंिवटल से अधिक की गोबर खरीदी हो रही है। गोबर बेचने वालों में 49.71 प्रतिशत अन्य पिछड़ा वर्ग के 37.41 प्रतिशत लोग अनुसूचित जनजाति वर्ग के, तथा 8.30 प्रतिशत लोग अनुसूचित जाति वर्ग के हैं।
आत्म निर्भरता
कोरोना काल में रोजगार में कमी आई है। ऐसे समय में गोधन योजना ग्रामीणों के लिए आय का अच्छा जरिया है। सुकमा जिले की गांव दुब्बाटोटा गौठान की कमल स्व.सहायता समूह की 13 महिलाओं द्वारा गोबर में केंचुआ डालकर वर्मी खाद तैयार किया जा रहा है। समूह की महिलाएं बताती है कि गोबर से बने खाद से उन्हें आर्थिक लाभ मिलेगा। साथ ही जैविक खाद से किसानों को अच्छी फसल मिलेगी। कृषि विभाग द्वारा उन्हें जैविक खाद बनाने का प्रशिक्षण भी दिया गया है। सुकमा जिले में अब तक 13 हजार से भी अधिक पशुपालकों का पंजीयन गौठानो में किया जा चुका है। महिलाएं कहती हैंै कि  पहले गोबर का उपयोग केवल घर लीपने और छेना बनाने में करते थे,गोधन योजना से अब चार पैसे मिलने लगा है। बिलासपुर जिले के चार विकासखंडों में ग्रामीण क्षेत्रों के 72 गोठानों में स्व सहायता समूहों ने 2 हजार 650 क्विंटल से अधिक खाद का उत्पादन किया। जिनमें 700 क्विंटल से अधिक खाद बेचा जा चुका है। निर्मित खादों को उद्यानिकी विभाग वन विभाग की नर्सरियों में उपयोग किया जा रहा है। इससे जैविक खेती को बढ़ावा मिल रहा है।
अब नाली में नहीं फेकते गोबर
भिलाई के कोसा नाला के पशुपालक रोहित यादव के पास सोलह गायें हैं। हर दिन इनसे लगभग दो सौ से तीन सौ किलो गोबर होता है। समस्या थी कि, इसे कहां फेंके,खासकर शहरी क्षेत्र के लोगों के लिए। गोधन न्याय योजना से यह समस्या तो दूर हुई साथ ही अब उन्हें इसकी अच्छी खासी कीमत भी मिलने लगी है। हर दिन वे पांच सौ से छह सौ रुपए का गोबर बेच रहे हैं। रोहित कहते हैं मेरे पास गोबर रखने के लिए जगह नहीं है। इसलिए हर दिन गौठान में गोबर बेच देते हैं।
गोधन का सकारात्मक असर
भिलाई नगर निगम के कमिश्नर ऋतुराज रघुवंशी ने सभी जोन कमिश्नरों को हर दिन गोबर खरीदी, वर्मी टैंक बनाने और इसके पेमेंट की स्थिति की नियमित मानिटरिंग करने के निर्देश दिए हैं। आर्य समूह की सुशीला जंघेल ने बताया कि प्रति दिन करीब सात हजार क्विंटल गोबर आता है। बड़े पैमाने पर वर्मी कंपोस्ट के लिए कच्चा माल तैयार हो रहा है। गोधन न्याय योजना में तेजी से भुगतान होने का बड़ा सकारात्मक असर दिखा है। पशुपालकों के लिए सरकार की यह योजना आर्थिक अवसर लेकर आई है। इससे लोग पशुधन को सहेजेंगे भी और पशुपालन को बढ़ावा भी मिलेगा।    
गोबर घोटाला की आशंका
भाजपा किसान मोर्चा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष संदीप शर्मा ने गौ धन न्याय योजना को लेकर एक बड़े घोटाले की आशंका जताई है। पशुपालकों को हुए भुगतान की राशि से सवाल उठता है कि ऐसी कौन.सी गाय है, जो रोज 59 किलो गोबर देती है। दुर्ग जिले के एक पशुपालक को 15 दिनों में बेचे गए गोबर के लगभग 44 हजार रुपए भुगतान हुआ है। पशुपालक के पास 25 गायें हैं। एक गाय प्रति दिन 59 किलो गोबर दी यानी 15 दिन में 885 किलो। 25 गाय का कुल गोबर हुआ 22125 किलो। जो कि संभव नहीं है। सवाल यह है कि ऐसी कौन.सी गाय है जो रोज 59 किलो गोबर देती है। आशंका है कि प्रदेश सरकार गौ.धन न्याय योजना के नाम पर एक बड़े घोटाले को अंजाम देने जा रही है। बिहार के चारा घोटाला सदृश्य क्या छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार इस योजना के द्वारा गोबर.घोटाला को अंजाम देने की मंशा से यह योजना लेकर आई है।
गोबर की चोरी से बखेड़ा
गोबर प्रति किलो दो रूपये बिकने की वजह से अब लोग गोबर भी चुराने लगे हैं। कोरिया जिले के मनेंद्रगढ विकासखंड के ग्राम रोझी में एक गो पालक लल्ला राम और सेमलाल के बाडे में रखे करीब सौ किलो गोबर किसी ने चुरा लिया। यह तब पता चला जब दोनों की पत्नियां फूलमति और रिचबुधिया बाड़े में जाकर देखा। वहां गोबर का ढेर नहीं था। गोठान समिति में जाकर गोबर चोरी की इस घटना की जानकारी दी गई। गोठान समिति की ओर से चोर को पकड़ने की फरियाद के साथ एक आवेदन स्थानीय थाने में दिया गया है। हैरानी वाली बात है कि पुलिस कैसे पता चलायेगी कि गोबर आरोप लगाने वाला का कौन सा है।
 गोबर की लकड़ी
जशपुरनगर में अब गोबर की लकड़ी से होटल और ढाबों के चूल्हों में आग सुलग रही है। खनिज न्यास निधि के सहयोग से जिला प्रशासन ने जिले के दुलदुला विकासखंड के ग्राम पंचायत पतराटोली में गोबर से लकड़ी बनाने की मशीन स्थापित कर इसका संचालन शुरू कर दिया है। जनपद पंचायत कुनकुरी की अध्यक्ष चंद्रप्रभा भगत ने युग वार्ता को बताया कि 29 स्व.सहायता समूह की महिलाएं गोबर से लकड़ी बना रही हैं। इससे पर्यावरण शुद्ध होगा, साथ ही जंगलों में अनावश्यक लकड़ी का कटाव भी रूकेगा। जल,संरक्षण एवं संर्वधन को बढ़ावा भी मिलेगा। जिले में नवाचार के तहत मशीन के माध्यम से गोबर से लकड़ी बनाई जा रही है। जशपुर जिले के ग्रामीणों को रोजगार भी मिल रहा है। कलेक्टर महादेव कावरे ने बताया कि ग्राम पंचायत पतराटोली में स्व.सहायता समूह की महिलाओं को गौण खनिज मद से 1 लाख 35 हजार की लागत से गोबर से लकड़ी बनाने का मशीन र्दी गई है। इसका लाभ उठाकर समूह की महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही है।  
कैसे बनाए गांेबर से लकड़ी
गोबर से लकड़ी बनाने के व्यवसाय में स्पर्धा बहुत कम है। मगर मांग ज्यादा। आत्म निर्भर बनने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण धंधा है। गो मेक मशीन 42 हजार से एक लाख रूपये तक की मिलती है। इस मशीन से 15 सेंकंड में गोबर से एक किलो की लकड़ी बनती है। दस हजार से पचास हजार रूपये तक आय प्रति माह कर सकते हैं। गाय का गोबर,सूखा भूसा और घास को मशीन में डालकर लकड़ी तैयार किया जाता है। जबकि लकड़ी करीब छह सौ रूपये क्विंटल मिलती है। ढाई इंच मोटी और बीच में गोबर की लकड़ी के छिद्र होता है,ताकि यह आसानी से जल सके। ऐसी लकड़ियों का इस्तेमाल ईंट भट्ठों के अलावा यज्ञ एवं हवन में भी होता है।